यह लेख जीवित पशु परीक्षण से कृत्रिम जैविक मॉडल की ओर एक प्रतिमान बदलाव की वकालत करता है, जिसमें नैतिक चिंताओं और मानव हानि की भविष्यवाणी के लिए पशु परीक्षण परिणामों की अविश्वसनीयता का हवाला दिया गया है। यह जानवरों द्वारा सहे गए कष्टों पर प्रकाश डालता है और प्रस्तावित करता है कि ऊतक इंजीनियरिंग में प्रगति विभिन्न कृत्रिम शारीरिक अंगों की खेती की अनुमति देती है, जिससे पशु-मुक्त प्रयोग संभव हो जाता है। लेखक 'The Prevention of Cruelty to Animals Act, 1960' में संशोधन का सुझाव देते हैं ताकि लैब-विकसित मॉडलों पर विचार करना अनिवार्य हो सके। यह लेख सामाजिक मूल्यों में बदलाव और पशु पीड़ा के बारे में जागरूकता बढ़ाने का भी आह्वान करता है, सुरक्षा परीक्षण के लिए शिक्षा और अनुसंधान में दृश्य और ex-corpus मॉडल के उपयोग की वकालत करता है।
- पशु परीक्षण नैतिक रूप से समस्याग्रस्त है और अक्सर मनुष्यों को होने वाले नुकसान की भविष्यवाणी के लिए अविश्वसनीय होता है।
- ऊतक इंजीनियरिंग में प्रगति प्रयोगों के लिए कृत्रिम शारीरिक अंगों के निर्माण को सक्षम बनाती है।
- लेखक The Prevention of Cruelty to Animals Act, 1960 में संशोधन का प्रस्ताव करता है, ताकि लैब-विकसित मॉडलों को प्राथमिकता दी जा सके।
यह लेख युद्ध में मौलिक परिवर्तनों पर चर्चा करता है, जो पारंपरिक शारीरिक बल से हटकर डिजिटल रूप से स्वायत्त और परस्पर जुड़े सिस्टम की ओर बढ़ रहा है। यह बताता है कि Operation Desert Storm, यूक्रेन युद्ध और मई 2025 में एक काल्पनिक भारत-पाकिस्तान संघर्ष जैसी घटनाएं ड्रोन, AI, साइबर युद्ध और हाइपरसोनिक हथियारों पर बढ़ती निर्भरता को कैसे प्रदर्शित करती हैं। लेखक M.K. Narayanan इस बात पर जोर देते हैं कि भारत को भविष्य के बहु-मोर्चे संघर्षों की तैयारी के लिए अपनी सैन्य आधुनिकीकरण योजनाओं को तेजी से अनुकूलित करना चाहिए, रक्षा खरीद पर पुनर्विचार करना चाहिए और अपने हार्डवेयर में विविधता लानी चाहिए, क्योंकि युद्ध जीतने की पारंपरिक अवधारणाएं पुरानी हो चुकी हैं। नेटवर्क-केंद्रित युद्ध की ओर बदलाव के लिए एक व्यापक रणनीतिक सुधार की आवश्यकता है।
- आधुनिक युद्ध पारंपरिक शारीरिक बल से हटकर डिजिटल रूप से स्वायत्त और परस्पर जुड़े सिस्टम की ओर बदलाव की विशेषता है।
- ड्रोन, AI, साइबर युद्ध और हाइपरसोनिक हथियारों का व्यापक उपयोग युद्धक्षेत्र की गतिशीलता को बदल रहा है।
- भारत को इन उभरती चुनौतियों का सामना करने के लिए अपनी सैन्य आधुनिकीकरण योजनाओं को तत्काल अनुकूलित करने और अपने हार्डवेयर में विविधता लाने की आवश्यकता है।
लेख इस बात पर प्रकाश डालता है कि खनन, भूजल निष्कर्षण, बांधों के पीछे पानी जमा करना और जमीन में तरल पदार्थ डालना जैसी मानवीय गतिविधियाँ भूकंपीय गतिविधि को प्रेरित कर सकती हैं, जिससे मानव-प्रेरित भूकंप आते हैं। ये गतिविधियाँ tectonic plates के बीच तनाव संचय का कारण बनती हैं। 2021 के एक अध्ययन ने National Capital Region में उथले भूकंपों को अत्यधिक भूजल निष्कर्षण से जोड़ा। Koyna hydroelectric dam जैसे बड़े बांधों को भी महत्वपूर्ण भूकंपों से जोड़ा गया है। भारत की बढ़ती ऊर्जा मांग, जो जलविद्युत और तेल/गैस निष्कर्षण (fracking सहित) के माध्यम से पूरी होती है, इस जोखिम को और बढ़ाती है। वैज्ञानिकों ने भूजल के वैज्ञानिक प्रबंधन, बांध निर्माण से पहले उचित मूल्यांकन और इन गतिविधियों की निगरानी के लिए मजबूत भूकंपीय नेटवर्क की आवश्यकता पर जोर दिया है।
- भूजल निष्कर्षण, बांध निर्माण और ऊर्जा निष्कर्षण जैसी मानवीय गतिविधियाँ भूकंपों को प्रेरित कर सकती हैं।
- ये गतिविधियाँ पृथ्वी की पपड़ी में तनाव व्यवस्था को बदल देती हैं, जिससे भूकंपीय घटनाएँ होती हैं।
- उदाहरणों में दिल्ली-NCR में भूजल की कमी और Koyna dam से जुड़े भूकंप शामिल हैं।
NISAR (NASA-ISRO Synthetic Aperture Radar), NASA और ISRO द्वारा विकसित पहला संयुक्त उपग्रह, 30 जुलाई को श्रीहरिकोटा के Satish Dhawan Space Centre से लॉन्च होने वाला है। GSLV-F16 रॉकेट 2,392 किलोग्राम के उपग्रह को 743 किलोमीटर की sun-synchronous orbit में स्थापित करेगा। NISAR एक अद्वितीय पृथ्वी अवलोकन उपग्रह है, जो dual-frequency Synthetic Aperture Radar (NASA का L-band और ISRO का S-band) के साथ पृथ्वी का अवलोकन करने वाला पहला उपग्रह है। यह SweepSAR तकनीक का उपयोग करके दुनिया को स्कैन करेगा, जो 12-दिवसीय अंतराल पर ground deformation, ice sheet movement, vegetation dynamics, sea ice classification और disaster response जैसे अनुप्रयोगों के लिए सभी मौसम, दिन-रात डेटा प्रदान करेगा।
- NISAR पृथ्वी अवलोकन के लिए NASA और ISRO के बीच पहला संयुक्त उपग्रह मिशन है।
- यह व्यापक डेटा संग्रह के लिए dual-frequency Synthetic Aperture Radar (L-band और S-band) से लैस है।
- उपग्रह SweepSAR तकनीक का उपयोग करके 12-दिवसीय अंतराल पर सभी मौसम, दिन-रात डेटा प्रदान करेगा।
जैसे-जैसे UK और भारत एक Free Trade Agreement (FTA) की ओर बढ़ रहे हैं, Global Capability Centres (GCCs) सहयोग के एक प्रमुख क्षेत्र के रूप में उभर रहे हैं। भारत, जो पहले से ही 1,500 से अधिक GCCs का घर है, जिसमें 1.9 मिलियन लोग कार्यरत हैं, को ब्रिटिश कंपनियां केवल एक लागत प्रभावी बैक ऑफिस के रूप में नहीं बल्कि R&D और डिजिटल परिवर्तन के लिए एक रणनीतिक भागीदार के रूप में देखती हैं। FTA से नियामक बाधाओं को कम करके, पेशेवर आवाजाही को सुव्यवस्थित करके और डिजिटल व डेटा शासन को सामंजस्यपूर्ण बनाकर गहरे जुड़ाव की सुविधा मिलने की उम्मीद है। UK के दृष्टिकोण से, FTA तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था तक पहुंच प्रदान करता है, जबकि भारत के लिए, यह डिजिटल अर्थव्यवस्था की महत्वाकांक्षाओं और उच्च-मूल्य वाली सेवाओं के लिए एक वैश्विक केंद्र बनने के साथ संरेखित होता है।
- UK-India Free Trade Agreement (FTA) Global Capability Centres (GCCs) में सहयोग को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाने के लिए तैयार है।
- भारत GCCs के लिए एक अग्रणी केंद्र है, जो वैश्विक नवाचार और डिजिटल परिवर्तन में योगदान दे रहा है।
- FTA का लक्ष्य नियामक बाधाओं को कम करना, प्रतिभा की गतिशीलता को सुविधाजनक बनाना और डिजिटल मानकों को सामंजस्यपूर्ण बनाना है।
European Commission Digital Services Act के तहत हानिकारक ऑनलाइन सामग्री से नाबालिगों की सुरक्षा के लिए एक आयु सत्यापन ऐप विकसित कर रहा है, जबकि वयस्क उपयोगकर्ताओं की गोपनीयता की रक्षा करने का दावा कर रहा है। हालांकि, आलोचकों का तर्क है कि यह कदम गोपनीयता से समझौता करने का जोखिम उठाता है और बच्चों को प्रभावी ढंग से सुरक्षित रखने में विफल रहता है। यह ऐप, European Digital Identity Wallets के समान तकनीकी विशिष्टताओं पर निर्मित, उपयोगकर्ताओं को सटीक आयु या पहचान बताए बिना यह साबित करने की अनुमति देने का लक्ष्य रखता है कि वे 18 वर्ष से अधिक के हैं, गोपनीयता के लिए zero-knowledge proof का उपयोग करते हुए। जबकि कुछ पोर्न कंपनियां वेबसाइट-स्तर के आयु सत्यापन का विरोध करती हैं, डिवाइस-आधारित जांच की वकालत करती हैं, आयोग का कहना है कि उसका दृष्टिकोण डेटा सुरक्षा सुनिश्चित करता है और सभी के लिए इंटरनेट को सुरक्षित बनाने का लक्ष्य रखता है।
- European Commission Digital Services Act के तहत हानिकारक ऑनलाइन सामग्री से नाबालिगों की सुरक्षा के लिए एक आयु सत्यापन ऐप विकसित कर रहा है।
- आलोचकों ने चिंता व्यक्त की है कि ऐप वयस्क उपयोगकर्ताओं की गोपनीयता से समझौता कर सकता है और बच्चों को प्रभावी ढंग से सुरक्षित नहीं रख सकता है।
- ऐप का उद्देश्य उपयोगकर्ताओं को सटीक पहचान बताए बिना आयु साबित करने की अनुमति देना है, गोपनीयता सुरक्षा के लिए zero-knowledge proof का उपयोग करना।
फरवरी 2026 में AI Impact Summit की मेजबानी करने की तैयारी करते हुए, भारत के पास वैश्विक AI बहस को समावेशी विकास, उन्नति और ग्रह संरक्षण की ओर मोड़ने का अवसर है, जिससे भू-राजनीतिक विभाजन को पाटा जा सके। अपने डिजिटल अनुभव का लाभ उठाते हुए, भारत पांच प्रमुख सुझाव प्रस्तावित कर सकता है: प्रतिज्ञाओं और रिपोर्ट कार्ड के साथ प्रगति को मापना, Global South की भागीदारी सुनिश्चित करना, एक सामान्य सुरक्षा जांच बनाना, AI नियमों पर एक मध्य मार्ग प्रदान करना, और शिखर सम्मेलनों के विखंडन से बचना। Global Majority के साथ AI क्षमता साझा करने और भागीदारी को प्रगति में बदलने पर ध्यान केंद्रित करके, भारत अत्याधुनिक मुद्दों पर एक नेता के रूप में अपनी पहचान को फिर से परिभाषित कर सकता है।
- भारत फरवरी 2026 में AI Impact Summit की मेजबानी करके वैश्विक AI बहस का नेतृत्व करने के लिए तैयार है।
- शिखर सम्मेलन का उद्देश्य AI को समावेशी विकास, उन्नति और ग्रह की रक्षा पर केंद्रित करना है, जिससे भू-राजनीतिक विभाजन को पाटा जा सके।
- भारत का डिजिटल अनुभव, जिसमें Aadhaar और UPI शामिल हैं, उसके AI प्रस्तावों के लिए एक विश्वसनीय आधार प्रदान करता है।
तमिलनाडु पुलिस जल्द ही "e-Sakshaya" नामक एक मोबाइल ऐप लॉन्च करेगी, जिसे Union Ministry of Home Affairs द्वारा अनिवार्य ऑडियो-विजुअल साक्ष्य एकत्र करने के लिए विकसित किया गया है। यह ऐप पुलिस कर्मियों को अपराध स्थलों, गवाहों की तस्वीरें और वीडियो अपलोड करने और अपरिवर्तनीय SID पैकेट (सुरक्षित, भू-टैग किए गए, समय-मुद्रांकित साक्ष्य के साथ hash verification) उत्पन्न करने में सक्षम बनाएगा, जिससे साक्ष्य की श्रृंखला और स्वीकार्यता मजबूत होगी। एप्लिकेशन डेटा अखंडता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए blockchain technology का उपयोग करता है। अपलोड किए गए साक्ष्य Inter-Operable Criminal Justice System (ICJS) के माध्यम से मजिस्ट्रेटों और अदालतों के लिए सुलभ होंगे।
- तमिलनाडु पुलिस द्वारा ऑडियो-विजुअल साक्ष्य एकत्र करने के लिए e-Sakshaya मोबाइल ऐप लॉन्च किया जा रहा है।
- Union Ministry of Home Affairs द्वारा विकसित, इसका उद्देश्य साक्ष्य की श्रृंखला और स्वीकार्यता को मजबूत करना है।
- यह ऐप वीडियो, तस्वीरें और गवाहों का विवरण रिकॉर्ड करता है, सुरक्षित, भू-टैग किए गए और hash verification के साथ समय-मुद्रांकित साक्ष्य पैकेट उत्पन्न करता है।
भारतीय नौसेना ने विशाखापत्तनम में INS निस्तार को कमीशन किया, जो पहला स्वदेशी रूप से डिज़ाइन किया गया और निर्मित डाइविंग सपोर्ट वेसल है। केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ इस समारोह में उपस्थित थे। 118 मीटर का यह जहाज Hindustan Shipyard Ltd. द्वारा बनाए जा रहे दो डाइविंग सपोर्ट वेसल में से एक है। इसे जटिल गहरे समुद्र में सैचुरेशन डाइविंग और बचाव अभियानों के लिए डिज़ाइन किया गया है, यह क्षमता विश्व स्तर पर केवल कुछ नौसेनाओं के पास है। INS निस्तार अत्याधुनिक डाइविंग उपकरणों से लैस है, जिसमें remotely operated vehicles, self-propelled hyperbaric lifeboats और diving compression chambers शामिल हैं, जो 300 मीटर की गहराई तक संचालन में सक्षम हैं। यह गहरे सबमर्जेंस बचाव वेसल के लिए "Mother Ship" के रूप में भी कार्य करेगा।
- INS निस्तार भारतीय नौसेना का पहला स्वदेशी रूप से डिज़ाइन किया गया और निर्मित डाइविंग सपोर्ट वेसल है।
- इसे केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ की उपस्थिति में विशाखापत्तनम में कमीशन किया गया।
- यह वेसल Hindustan Shipyard Ltd. द्वारा निर्मित है और इसे जटिल गहरे समुद्र में सैचुरेशन डाइविंग और बचाव अभियानों के लिए डिज़ाइन किया गया है।
चीन हरित ऊर्जा क्षेत्र में एक वैश्विक नेता के रूप में उभरा है, जिसने 2024 में अन्य सभी देशों की तुलना में अधिक पवन टर्बाइन और सौर पैनल स्थापित किए हैं और नवीकरणीय आपूर्ति श्रृंखला पर हावी है। यह प्रभुत्व दशकों की रणनीतिक राज्य योजना और नवाचार में भारी निवेश से उपजा है, जिसमें State-owned Enterprises (SOEs) और बैंकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जलवायु लक्ष्यों, गंभीर वायु प्रदूषण और ऊर्जा असुरक्षा से प्रेरित होकर, चीन ने 2024 में नवीकरणीय ऊर्जा के लिए $940 बिलियन आवंटित किए। ग्रिड अवशोषण और अव्यवस्थित सब्सिडी जैसी चुनौतियों के बावजूद, बीजिंग ने अल्ट्रा-हाई वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइनों और दक्षता पर ध्यान केंद्रित करके प्रतिक्रिया दी, अब AI smart grids और green hydrogen जैसी अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकियों में नेतृत्व का लक्ष्य बना रहा है।
- चीन हरित ऊर्जा प्रतिष्ठानों में विश्व स्तर पर अग्रणी है और नवीकरणीय ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को नियंत्रित करता है।
- इसकी सफलता का श्रेय दीर्घकालिक रणनीतिक राज्य योजना, भारी निवेश और SOEs तथा राज्य बैंकों की महत्वपूर्ण भूमिका को दिया जाता है।
- प्रमुख चालकों में गंभीर वायु प्रदूषण को संबोधित करना, जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करना और ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाना शामिल है।
भारतीय सेना ने पूर्वी लद्दाख में 15,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर स्वदेशी रूप से विकसित Akash Prime वायु रक्षा प्रणाली का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। DRDO द्वारा विकसित, Akash Prime ने उच्च ऊंचाई वाले वातावरण में तेजी से आगे बढ़ रहे हवाई लक्ष्यों पर दो सीधे निशाने लगाए। Akash प्रणाली का यह नवीनतम संस्करण, एक मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्लेटफॉर्म, भारतीय सेना की वायु रक्षा प्रणालियों की तीसरी और चौथी रेजिमेंट के लिए अभिप्रेत है। इसके अतिरिक्त, रक्षा मंत्रालय ने Strategic Forces Command द्वारा ओडिशा के चांदीपुर से कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों Prithvi-II और Agni-I के सफल परीक्षण-फायरिंग की पुष्टि की।
- Akash Prime वायु रक्षा प्रणाली, एक स्वदेशी विकास, का सेना द्वारा लद्दाख में सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया।
- परीक्षणों ने उच्च ऊंचाई वाली परिस्थितियों में तेजी से आगे बढ़ रहे हवाई लक्ष्यों के खिलाफ प्रणाली की प्रभावशीलता का प्रदर्शन किया।
- Akash Prime एक मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल है, जो भारत की वायु रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण है।
भारत के Shubhanshu Shukla, जो चार-अंतरिक्ष यात्री दल का हिस्सा थे, ने International Space Station (ISS) के लिए दो सप्ताह का मिशन पूरा किया, जिसे भारत के Gaganyaan मिशन के लिए एक महत्वपूर्ण पूर्वाभ्यास के रूप में देखा जा रहा है, जिसकी उम्मीद 2027 में है। ISRO द्वारा Axiom Space के माध्यम से ₹500 करोड़ में आयोजित इस मिशन ने शुक्ला और Prasanth Nair (जो Gaganyaan के पहले दल का भी हिस्सा हैं) को उन्नत अंतरिक्ष यान प्रणालियों, आपातकालीन प्रोटोकॉल और सूक्ष्म-गुरुत्वाकर्षण अनुकूलन से परिचित कराया। ISRO के अध्यक्ष V. Narayanan ने कहा कि Axiom मिशन ISRO द्वारा स्वतंत्र रूप से अंतरिक्ष यात्रियों को प्रशिक्षित करने की तुलना में अधिक लागत प्रभावी था। इस सहयोग को एक प्रशंसनीय परिणाम माना जाता है, जो भारत की मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमताओं को बढ़ाता है और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष सहयोग को मजबूत करता है।
- भारतीय अंतरिक्ष यात्री Shubhanshu Shukla का ISS मिशन Gaganyaan मिशन के लिए एक प्रमुख प्रारंभिक कदम है।
- NASA और Axiom Space के साथ सहयोग ने उन्नत अंतरिक्ष उड़ान संचालन और आपातकालीन प्रबंधन में महत्वपूर्ण प्रशिक्षण प्रदान किया।
- यह मिशन स्वदेशी प्रशिक्षण सुविधाओं को विकसित करने की तुलना में ISRO के लिए अपने अंतरिक्ष यात्रियों को प्रशिक्षित करने का एक लागत प्रभावी तरीका था।
गुजरात ने आदिवासी स्वास्थ्य सेवा को बढ़ाने के लिए भारत की पहली Tribal Genome Sequencing Project शुरू की है। इस परियोजना का उद्देश्य राज्य के 17 जिलों में आदिवासी समुदायों के 2,000 व्यक्तियों के जीनोम को अनुक्रमित करना है। यह पहल इन समुदायों में प्रचलित आनुवंशिक विकारों, जैसे sickle cell anaemia, thalassemia और कुछ hereditary cancers का शीघ्र पता लगाने और लक्षित उपचार पर ध्यान केंद्रित करेगी। इसके अतिरिक्त, एकत्र किए गए आनुवंशिक डेटा का उपयोग प्राकृतिक प्रतिरक्षा से संबंधित मार्करों की पहचान करने और आदिवासी आबादी के लिए तैयार व्यक्तिगत स्वास्थ्य सेवा समाधानों के विकास का समर्थन करने के लिए किया जाएगा।
- गुजरात ने आदिवासी समुदायों के लिए स्वास्थ्य सेवा में सुधार के लिए भारत की पहली Tribal Genome Sequencing Project शुरू की है।
- यह परियोजना गुजरात के 17 जिलों में आदिवासी समुदायों के 2,000 व्यक्तियों के जीनोम को अनुक्रमित करेगी।
- इसका प्राथमिक लक्ष्य sickle cell anaemia, thalassemia और hereditary cancers जैसे आनुवंशिक विकारों का शीघ्र पता लगाना और लक्षित उपचार करना है।
दिल्ली में हाल के झटके (परिमाण 4.4) और एशिया भर में भूकंपों की एक श्रृंखला भारत की भूकंपीय भेद्यता को उजागर करती है, खासकर जब Indian Plate उत्तर की ओर खिसक रही है, जिससे हिमालय "Great Himalayan Earthquake" के लिए प्रवण हो गया है। Seismic Zone IV में स्थित दिल्ली, तेजी से शहरीकरण और गैर-अनुपालक पुरानी संरचनाओं के कारण उच्च जोखिम का सामना करती है। लेख भारत के लिए भूकंपीय कोडों को सख्ती से लागू करने, पुरानी इमारतों को रेट्रोफिट करने और लचीले बुनियादी ढांचे को अपनाने की तत्काल आवश्यकता पर जोर देता है। यह बैंकॉक के उच्च-शक्ति वाले कंक्रीट के उपयोग से सबक लेता है और म्यांमार में देखी गई अनरिनफोर्स्ड चिनाई के खिलाफ चेतावनी देता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि ₹50,000 करोड़ के वार्षिक रेट्रोफिटिंग निवेश की आवश्यकता है, जो भेद्यता को ताकत में बदलने के लिए तैयारी के लिए एक राष्ट्रीय संवाद और सार्वजनिक शिक्षा का आग्रह करता है।
- दिल्ली में हाल के झटके और एशिया भर में व्यापक भूकंपीय गतिविधि भारत की उच्च भूकंपीय भेद्यता को रेखांकित करती है, विशेष रूप से हिमालयी क्षेत्र में।
- Seismic Zone IV में स्थित दिल्ली, तेजी से शहरीकरण और भूकंपीय कोडों का पालन न करने वाली बड़ी संख्या में पुरानी इमारतों के कारण महत्वपूर्ण जोखिम का सामना करती है।
- Indian Plate के उत्तर की ओर खिसकने से भारत का भूकंपीय जोखिम बढ़ गया है, जिससे हिमालय में एक बड़े भूकंप की संभावना बढ़ गई है।
वैश्विक शिपिंग का लक्ष्य 2040-50 तक डीकार्बोनाइजेशन (decarbonisation) है, जो भारत के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर प्रस्तुत करता है। उद्योग Very Low Sulphur Fuel Oil (VLSFO) और LNG जैसे पारंपरिक ईंधनों से हरित विकल्पों जैसे green ammonia और e-methanol की ओर बढ़ रहा है। नवीकरणीय ऊर्जा (renewable energy) के माध्यम से उत्पादित green hydrogen मूलभूत है, जिसमें green ammonia को शिपिंग में इसकी स्थिरता के लिए पसंद किया जाता है। भारत को अपनी सौर ऊर्जा क्रांति और नीतिगत ढाँचों का लाभ उठाते हुए समुद्री हरित ईंधन उत्पादन केंद्र बनने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। चुनौतियों में उच्च प्रारंभिक पूंजी लागत, मूल्य विसंगतियाँ और प्रमुख प्रौद्योगिकियों के लिए आयात पर निर्भरता शामिल है। लेख इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अभिनव वित्तीय साधनों, PLI योजनाओं, CCUS प्रोत्साहनों और हरित जहाज निर्माण के लिए मांग-पक्ष समर्थन का सुझाव देता है।
- वैश्विक शिपिंग 2040-50 तक डीकार्बोनाइजेशन (decarbonisation) के लिए प्रतिबद्ध है, जो पारंपरिक ईंधनों से green ammonia और e-methanol जैसे हरित विकल्पों की ओर बढ़ रहा है।
- नवीकरणीय ऊर्जा (renewable power) से प्राप्त Green hydrogen प्रमुख प्रवर्तक है, जिसमें green ammonia स्वयं हाइड्रोजन की तुलना में शिपिंग के लिए अधिक स्थिर और व्यावहारिक ईंधन है।
- भारत के पास अपनी सफल सौर ऊर्जा क्रांति के आधार पर समुद्री हरित ईंधन उत्पादन के लिए एक वैश्विक केंद्र के रूप में खुद को स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।
लेख का तर्क है कि U.S., विशेष रूप से Donald Trump के तहत, UN और बहुपक्षवाद (multilateralism) को हाशिए पर धकेल दिया है, द्विपक्षीय सौदों (bilateral deals) का पक्ष लेते हुए जो वैश्विक व्यवस्था को खंडित करते हैं। यह सुझाव देता है कि भारत को इस बदलाव को स्वीकार करना चाहिए और राष्ट्रीय समृद्धि और दक्षिण-दक्षिण सहयोग (South-South cooperation) पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। भारत को 'strategic autonomy' को परिभाषित करने और अपने मूल हितों को प्राथमिकता देने की आवश्यकता है, विचारों और व्यापार समझौतों के लिए पश्चिम के बजाय पूर्व की ओर देखना चाहिए। लेखक चौथी औद्योगिक क्रांति (fourth industrial revolution) और रक्षा में भारत की आंतरिक शक्तियों पर प्रकाश डालता है, विकास-केंद्रित दृष्टिकोण की वकालत करता है, सीमा मुद्दों पर फिर से विचार करता है, और 2026 में BRICS Summit जैसे अवसरों का लाभ उठाकर Global South का नेतृत्व करने की बात करता है ताकि पुनर्गठित शुल्कों (reoriented tariffs) और मूल्य श्रृंखलाओं (value chains) के माध्यम से साझा समृद्धि को बढ़ावा दिया जा सके।
- U.S. बहुपक्षवाद (multilateralism) से द्विपक्षीय सौदों (bilateral deals) की ओर बढ़ रहा है, जिससे वैश्विक व्यवस्था का विखंडन हो रहा है।
- भारत को राष्ट्रीय समृद्धि, दक्षिण-दक्षिण सहयोग (South-South cooperation) पर ध्यान केंद्रित करके और अपनी 'strategic autonomy' को स्पष्ट रूप से परिभाषित करके अनुकूलन करना चाहिए।
- भारत की विदेश नीति को पूर्वी राष्ट्रों (जैसे, ASEAN) के साथ व्यापार समझौतों को प्राथमिकता देनी चाहिए और प्रौद्योगिकी और रक्षा में अपनी शक्तियों का लाभ उठाना चाहिए।
भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला और Axiom Mission 4 (Ax-4) के तीन अंतरराष्ट्रीय चालक दल के सदस्य मंगलवार को सैन डिएगो तट पर उतरकर पृथ्वी पर लौट आए। चालक दल ने International Space Station (ISS) पर 18 दिन का प्रवास पूरा किया, जो भारत की मानव अंतरिक्ष उड़ान महत्वाकांक्षाओं के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। Group Captain शुक्ला, जो एक भारतीय वायु सेना अधिकारी हैं, को भारत के Gaganyaan Mission के लिए भी चुना गया है। इस मिशन में 320 परिक्रमाएँ, 60 से अधिक शोध गतिविधियाँ और 23 आउटरीच कार्यक्रम शामिल थे। अंतरिक्ष यात्री सूक्ष्मगुरुत्वाकर्षण (microgravity) की स्थिति का अनुभव करने के बाद गुरुत्वाकर्षण (gravity) के अनुकूल होने के लिए एक पुनर्वास कार्यक्रम से गुजरेंगे।
- भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला और तीन अंतरराष्ट्रीय चालक दल के सदस्य International Space Station (ISS) पर 18 दिन के मिशन के बाद पृथ्वी पर लौट आए।
- Axiom Mission 4 (Ax-4) नामक इस मिशन में ISS पर 18 दिन का प्रवास शामिल था, जिसमें SpaceX Dragon कैप्सूल सैन डिएगो के तट पर उतरा।
- Group Captain शुक्ला भारत के आगामी Gaganyaan Mission के लिए चुने गए एक प्रमुख अंतरिक्ष यात्री हैं, जो भारत की मानव अंतरिक्ष उड़ान महत्वाकांक्षाओं को उजागर करता है।
भारतीय अंतरिक्ष यात्री Group Captain Shubhanshu Shukla और उनके Axiom Mission 4 (Ax-4) दल 18 दिनों के बाद International Space Station (ISS) से रवाना हुए, जिसमें सात माइक्रोग्रैविटी प्रयोग पूरे किए गए। Dragon अंतरिक्ष यान के कैलिफोर्निया तट से दूर पानी में उतरने की उम्मीद है। इस बीच, Indian Institute of Space Science and Technology (IIST) "Crop Seeds on ISS" परियोजना के तहत ISS में भेजे गए फसल बीजों (Jyothi और Uma चावल, Horse gram, टमाटर, तिल, बैंगन) पर उड़ान के बाद के क्षेत्र अध्ययनों की तैयारी कर रहा है। इन बीजों को विकास और उपज पर माइक्रोग्रैविटी के अद्वितीय प्रभावों का आकलन करने के लिए उगाया जाएगा, जिसमें तुलनात्मक अध्ययन की योजना है।
- भारतीय अंतरिक्ष यात्री Group Captain Shubhanshu Shukla और Ax-4 दल International Space Station (ISS) पर 18 दिनों के बाद पृथ्वी पर लौट आए।
- शुक्ला ने अपने मिशन के दौरान सात माइक्रोग्रैविटी प्रयोग पूरे किए।
- Dragon अंतरिक्ष यान कैलिफोर्निया के तट से दूर प्रशांत महासागर में उतरने वाला है।
पर्यावरण मंत्रालय ने भारत के अधिकांश कोयला-आधारित बिजली संयंत्रों को अनिवार्य Flue Gas Desulphurisation (FGD) प्रणालियों से छूट दे दी है, जिन्हें सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) उत्सर्जन को कम करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह निर्णय 2015 के उस आदेश को कमजोर करता है जिसमें सभी 180 कोयला संयंत्रों (600 इकाइयों) को 2017 तक FGDs स्थापित करने की आवश्यकता थी। वर्तमान में, केवल लगभग 8% इकाइयों ने FGDs स्थापित किए हैं। आधिकारिक कारणों में सीमित विक्रेता, उच्च लागत और COVID-19 व्यवधान शामिल हैं। एक विशेषज्ञ समिति ने भारतीय कोयले में कम सल्फर सामग्री और FGDs वाले और बिना FGDs वाले संयंत्रों के पास SO2 स्तरों में नगण्य अंतर का हवाला दिया। सल्फेट्स के वार्मिंग को दबाने में लाभकारी दुष्प्रभाव के बारे में भी चिंताएं उठाई गई हैं, जिसका अर्थ है कि उन्हें कम करने से जलवायु लक्ष्यों और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रतिबद्धताओं को खराब किया जा सकता है।
- भारत के पर्यावरण मंत्रालय ने अधिकांश कोयला-आधारित बिजली संयंत्रों को अनिवार्य Flue Gas Desulphurisation (FGD) प्रणालियों से छूट दी है।
- मूल 2015 के आदेश में सभी कोयला संयंत्रों को 2017 तक FGDs स्थापित करने की आवश्यकता थी, लेकिन केवल 8% ने इसका पालन किया है।
- छूट के कारणों में भारतीय कोयले में कम सल्फर सामग्री, उच्च स्थापना लागत और जलवायु वार्मिंग पर सल्फेट में कमी का संभावित प्रभाव शामिल है।
केरल के पलक्कड़ जिले में निपाह का एक नया मामला सामने आया है, जिसमें 58 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई है, जिससे वायरस की निरंतर उपस्थिति के बारे में आशंकाएं बढ़ गई हैं और छह जिलों में अलर्ट जारी कर दिया गया है। पलक्कड़ और मलप्पुरम में स्वास्थ्य अधिकारियों ने पीड़ित के संपर्क में आए 46 व्यक्तियों के लिए तुरंत कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग शुरू कर दी। यह घटना एक साल के भीतर केरल में निपाह का छठा मामला है। कोझिकोड, त्रिशूर, कन्नूर और वायनाड जैसे जिलों को भी अलर्ट पर रखा गया है, जिसमें केरल भर में 543 व्यक्ति वर्तमान में निगरानी में हैं। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV), पुणे ने इस मामले की पुष्टि की, जो चल रही सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती को उजागर करता है।
- केरल के पलक्कड़ में निपाह के हालिया मामले से एक व्यक्ति की मौत हुई और इसके बाद छह जिलों में स्वास्थ्य अलर्ट जारी किया गया।
- स्वास्थ्य अधिकारियों ने मृतक के संपर्क में आए व्यक्तियों के लिए तेजी से कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग शुरू की।
- यह पिछले एक साल में केरल में रिपोर्ट किया गया निपाह का छठा मामला है, जो एक आवर्ती सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती का संकेत देता है।
भारत का पहला स्वदेशी टेट्रावैलेंट डेंगू वैक्सीन, DengiAll, जिसे Panacea Biotec द्वारा विकसित किया गया है और Indian Council of Medical Research (ICMR) द्वारा समर्थित है, अपने तीसरे चरण के क्लिनिकल परीक्षणों के पूरा होने के करीब है। देश भर के 20 केंद्रों में लक्षित 10,000 प्रतिभागियों में से लगभग 8,000 ने नामांकन किया है। इस वैक्सीन का उद्देश्य भारत में फैल रहे डेंगू के सभी चार सीरोटाइप के खिलाफ प्रभावी प्रभावकारिता प्रदान करना है। डेंगू विश्व स्तर पर और भारत में एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता है, जिसमें उच्च घटना और रक्तस्रावी बुखार जैसी गंभीर स्थितियों की संभावना है। वर्तमान में, भारत में डेंगू के लिए कोई एंटीवायरल उपचार या लाइसेंस प्राप्त वैक्सीन उपलब्ध नहीं है।
- भारत का पहला स्वदेशी टेट्रावैलेंट डेंगू वैक्सीन, DengiAll, Phase 3 क्लिनिकल परीक्षणों से गुजर रहा है।
- ये परीक्षण Indian Council of Medical Research (ICMR) और Panacea Biotec Ltd. के बीच एक सहयोगात्मक प्रयास हैं।
- इस वैक्सीन का उद्देश्य डेंगू वायरस के सभी चार सीरोटाइप के खिलाफ प्रभावकारिता प्रदान करना है, जो भारत में सह-परिसंचरण करते हैं।
भारतीय अंतरिक्ष यात्री Group Captain Shubhanshu Shukla, Axiom-4 (Ax-04) मिशन के सदस्य, और उनके तीन चालक दल के सदस्य 14 जुलाई को International Space Station (ISS) से अलग होने वाले हैं। Ax-4 मिशन में लगभग 60 वैज्ञानिक अध्ययन, प्रयोग और गतिविधियां शामिल थीं, जो U.S., भारत, पोलैंड, हंगरी, सऊदी अरब, ब्राजील, नाइजीरिया, संयुक्त अरब अमीरात और कई यूरोपीय देशों सहित 31 देशों का प्रतिनिधित्व करती थीं। यह मिशन अंतरिक्ष अनुसंधान में अंतरराष्ट्रीय सहयोग और वैश्विक अंतरिक्ष प्रयासों में भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों की भागीदारी पर प्रकाश डालता है।
- भारतीय अंतरिक्ष यात्री Group Captain Shubhanshu Shukla Axiom-4 मिशन का हिस्सा हैं।
- Axiom-4 मिशन 14 जुलाई को International Space Station (ISS) से अलग होने वाला है।
- इस मिशन में वैज्ञानिक अध्ययनों और प्रयोगों पर व्यापक अंतरराष्ट्रीय सहयोग शामिल था।
NITI Aayog ने सिफारिश की है कि Department of Science and Technology (DST) State Science and Technology (S&T) Councils के लिए अपनी 'core grant support' को कम करे, 'project-based support' की ओर बदलाव की वकालत करते हुए। यह सिफारिश 'Roadmap for strengthening State Science and Technology Councils' नामक एक रिपोर्ट का हिस्सा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जबकि State S&T Councils वैज्ञानिक अनुसंधान और लोकव्यापीकरण के लिए महत्वपूर्ण हैं, भारत के समग्र वैज्ञानिक उत्पादन में उनका योगदान Centrally funded institutions की तुलना में कम महत्वपूर्ण रहा है। 2023-25 में State S&T Councils के लिए कुल फंडिंग में 17.65% की वृद्धि के बावजूद, S&T विकास में क्षेत्रीय असंतुलन एक चिंता का विषय बना हुआ है, जिसमें केंद्रीय फंडिंग अक्सर राज्य के बजट के लिए एक नगण्य स्रोत होती है।
- NITI Aayog ने State S&T Councils के लिए 'core grant support' को कम करने का प्रस्ताव दिया है, जो परियोजना-आधारित फंडिंग का समर्थन करता है।
- रिपोर्ट में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि State S&T Councils ने केंद्रीय संस्थानों जितना राष्ट्रीय वैज्ञानिक उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान नहीं दिया है।
- कुल फंडिंग में वृद्धि के बावजूद, S&T विकास में क्षेत्रीय असमानताएं बनी हुई हैं।
रक्षा मंत्रालय ने भारत में S-400 air defence system के लिए एक maintenance, repair, and overhaul (MRO) सुविधा स्थापित करने के लिए एक भारतीय फर्म की पहचान की है। S-400 के निर्माता, रूस के Almaz-Antey, इस भारतीय फर्म के साथ सहयोग करेंगे। इस 'ऐतिहासिक कदम' का उद्देश्य महत्वपूर्ण रक्षा प्रणालियों के लिए विदेशी संस्थाओं पर भारत की निर्भरता को कम करना है, जो 'Make In India' पहल के अनुरूप है और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और आपूर्ति श्रृंखला disruptions द्वारा उत्पन्न चुनौतियों को दूर करता है। भारत वर्तमान में 'Sudarshan Chakra' नामक तीन S-400 प्रणालियों का संचालन करता है, जो पाकिस्तानी ड्रोन और मिसाइलों के खिलाफ Operation Sindoor में महत्वपूर्ण साबित हुई थीं। शेष दो S-400s 2026 और 2027 में वितरित होने की उम्मीद है।
- रूसी निर्माता Almaz-Antey के सहयोग से S-400 air defence system के लिए एक MRO सुविधा स्थापित करने के लिए एक भारतीय फर्म का चयन किया गया है।
- यह पहल रक्षा में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और 'Make In India' कार्यक्रम के अनुरूप है।
- यह कदम महत्वपूर्ण रक्षा उपकरणों के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और आपूर्ति श्रृंखला disruptions से जुड़े जोखिमों को कम करेगा।