सैन्य क्षेत्र में AI का शासन (REAIM) राष्ट्रीय सुरक्षा निहितार्थों के कारण एक महत्वपूर्ण वैश्विक चुनौती है। जबकि कुछ देशों ने 'Pathways to Action' घोषणा पर हस्ताक्षर किए हैं, अमेरिका, भारत और चीन जैसी प्रमुख शक्तियों ने रणनीतिक अनिच्छा दिखाई है। प्राथमिक चिंता Lethal Autonomous Weapons Systems (LAWS) का विकास है। भारत का मानना है कि क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए LAWS पर कानूनी रूप से बाध्यकारी उपकरण समयपूर्व है। लेख जवाबदेही और पारदर्शिता में निहित एक गैर-बाध्यकारी ढांचे को शुरुआती बिंदु के रूप में सुझाता है, जो अंततः कानूनी रूप से बाध्यकारी मानदंडों की ओर ले जाता है क्योंकि युद्ध में AI की तैनाती अधिक बार होती है।
- REAIM शिखर सम्मेलन सैन्य क्षेत्र में जिम्मेदार Artificial Intelligence (Responsible Artificial Intelligence in the Military Domain) पर केंद्रित है।
- Lethal Autonomous Weapons Systems (LAWS) अंतरराष्ट्रीय निरस्त्रीकरण वार्ता में विवाद का एक प्रमुख बिंदु हैं।
- रणनीतिक अनिच्छा AI की दोहरे उपयोग वाली प्रकृति और सैन्य बाधाओं के अनुपालन की पुष्टि करने की कठिनाई से उपजी है।
बेंगलुरु में छठी India-France Annual Defence Dialogue के दौरान भारत और फ्रांस ने अपने रक्षा सहयोग समझौते को एक और दशक के लिए बढ़ा दिया है। मुख्य चर्चा Rafale jets में 'indigenous content' को 50% तक बढ़ाने और भारत के भीतर Maintenance, Repair, and Overhaul (MRO) सुविधाओं के विस्तार पर केंद्रित थी। साझेदारी का उद्देश्य सैन्य-से-सैन्य सहयोग और niche technologies के सह-विकास को बढ़ाना है। दोनों देशों ने Indian Ocean Region में क्षेत्रीय स्थिरता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, जिसमें भारत खुद को first responder और net security provider के रूप में स्थापित कर रहा है। यह समझौता स्थायी Indo-French रणनीतिक संरेखण और साझा सुरक्षा हितों को रेखांकित करता है।
- भारत और फ्रांस के बीच रक्षा सहयोग समझौते को 10-वर्ष की अवधि के लिए नवीनीकृत किया गया है।
- भारत Rafale jets में स्वदेशी सामग्री को 50% तक बढ़ाने और घरेलू MRO सुविधाओं का विस्तार करना चाहता है।
- साझेदारी रक्षा उपकरणों और niche technology के सह-विकास और सह-उत्पादन पर जोर देती है।
Shashi Tharoor 1945 के बाद की liberal international order के क्षरण का विश्लेषण करते हैं, जिसमें इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि कैसे प्रमुख शक्तियों की एकतरफा कार्रवाइयों द्वारा multilateralism को कमजोर किया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय समझौतों से पीछे हटना, व्यापार का हथियार बनाना और Ukraine जैसे संघर्षों में संप्रभुता की अवहेलना 'might is right' की ओर बदलाव का संकेत देती है। लेख इस बात पर जोर देता है कि महामारी और climate change जैसी तत्काल वैश्विक चुनौतियों के लिए सामूहिक कार्रवाई की आवश्यकता है, फिर भी नेतृत्व में वर्तमान शून्यता एक खंडित वैश्विक शासन प्रणाली की ओर ले जाती है। rules-based system से कच्ची शक्ति द्वारा निर्देशित प्रणाली में यह संक्रमण अंतरराष्ट्रीय संस्थानों की वैधता और वैश्विक स्थिरता के लिए खतरा है।
- अंतरराष्ट्रीय कानून और संस्थानों पर आधारित WWII के बाद की व्यवस्था को power politics द्वारा प्रतिस्थापित किया जा रहा है।
- Multilateralism विफल हो रहा है क्योंकि प्रमुख शक्तियां अंतरराष्ट्रीय ढांचे से हट रही हैं और संप्रभुता की अनदेखी कर रही हैं।
- Climate change और महामारी जैसे वैश्विक मुद्दों को अकेले काम करने वाले देशों द्वारा हल नहीं किया जा सकता है, जिसके लिए कार्यात्मक वैश्विक शासन की आवश्यकता है।
ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi अमेरिका और IAEA के साथ परमाणु वार्ता के दूसरे दौर के लिए जिनेवा पहुंचे हैं। ये चर्चाएं बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के बीच हो रही हैं, क्योंकि Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) रणनीतिक Strait of Hormuz के पास 'लाइव-फायर गहन अभ्यास' कर रहा है। 'Smart Control of Hormuz Strait' नामक इस अभ्यास का उद्देश्य ईरान की नौसेना बलों की तैयारी का परीक्षण करना है। जबकि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम के संबंध में एक 'उचित और न्यायसंगत सौदे' की तलाश में है, एक साथ सैन्य युद्धाभ्यास अमेरिका की बढ़ती नौसैनिक उपस्थिति के सामने कूटनीति और प्रतिरोध (deterrence) के दोहरे दृष्टिकोण का संकेत देता है।
- Strait of Hormuz फारस की खाड़ी को अरब सागर और ओमान की खाड़ी से जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण समुद्री चोकपॉइंट है।
- वार्ता में परमाणु चिंताओं को दूर करने के लिए अमेरिका, ईरान और International Atomic Energy Agency (IAEA) शामिल हैं।
- IRGC का अभ्यास अमेरिका द्वारा क्षेत्र में दूसरा विमानवाहक पोत भेजने और बल प्रयोग की धमकियों की प्रतिक्रिया है।
भारत और अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते ने प्रमुख हितधारकों, विशेष रूप से किसानों पर इसके प्रभाव के संबंध में चिंताएं पैदा कर दी हैं। जबकि अमेरिका कुछ भारतीय औद्योगिक वस्तुओं पर टैरिफ कम करेगा, भारत ने कृषि आयात पर रियायतें दी हैं और पांच वर्षों में $500 बिलियन के अमेरिकी ऊर्जा और तकनीकी उत्पाद खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है। आलोचकों का तर्क है कि इस सौदे में पिछले भारतीय FTAs के विपरीत, अनाज जैसे संवेदनशील कृषि उत्पादों के लिए स्पष्ट सुरक्षा की कमी है। इसके अलावा, यह समझौता लंबे समय से चले आ रहे Non-Tariff Barriers (NTBs) को संबोधित करता है, जो संभावित रूप से भारतीय बाजारों को Genetically Modified (GM) खाद्य उत्पादों के लिए खोल सकता है, जिससे खाद्य सुरक्षा और संप्रभु निर्णय लेने पर सवाल उठते हैं।
- इस सौदे में भारत द्वारा अमेरिकी खाद्य और कृषि उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला पर टैरिफ कम करना शामिल है।
- एक बड़ी प्रतिबद्धता में भारत द्वारा पांच वर्षों में विमान और प्रौद्योगिकी सहित $500 बिलियन मूल्य के अमेरिकी सामान खरीदना शामिल है।
- चिंताएं हैं कि यह सौदा GM खाद्य उत्पादों के आयात की अनुमति दे सकता है, जिसका भारत ने ऐतिहासिक रूप से विरोध किया है।
मालदीव के एक निर्जन द्वीप पर ISRO के लोगो और राष्ट्रीय प्रतीक वाला मलबा मिला है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मलबा, जो संभवतः एक payload fairing है, 19 दिसंबर, 2025 को लॉन्च किए गए LVM3-M6 मिशन से आया है। यह मिशन एक समर्पित वाणिज्यिक उड़ान थी जिसने अमेरिका स्थित AST SpaceMobile के लिए BlueBird Block-2 उपग्रह को सफलतापूर्वक तैनात किया था। LVM3 भारत का सबसे भारी रॉकेट है, जिसमें तीन चरणों वाला डिज़ाइन है। यह घटना 2025 के अंत में श्रीलंका में हुई इसी तरह की खोज के बाद हुई है, जो भारतीय प्रक्षेपणों से अंतरिक्ष मलबे के भौगोलिक प्रसार को उजागर करती है।
- मलबा 12 फरवरी को मालदीव के L. Kunahandhoo द्वीप पर पाया गया था।
- LVM3 (Launch Vehicle Mark-3) ISRO का सबसे भारी रॉकेट है, जिसका उपयोग महत्वपूर्ण वाणिज्यिक और राष्ट्रीय मिशनों के लिए किया जाता है।
- LVM3-M6 मिशन अमेरिकी कंपनी AST SpaceMobile के लिए एक वाणिज्यिक प्रक्षेपण था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नई दिल्ली में AI Impact Summit 2026 और India AI Expo का उद्घाटन करने वाले हैं। इस कार्यक्रम में वैश्विक तकनीकी नेता और 20 देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे, जो 'सभी के आर्थिक लाभ' के लिए AI के 'मानव-केंद्रित' दृष्टिकोण पर ध्यान केंद्रित करेंगे। नियामक ढांचे की तलाश करने वाले विकसित देशों के विपरीत, भारत AI संसाधनों तक समान पहुंच और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए नियम बनाने पर जोर देता है। शिखर सम्मेलन में तीन विषयगत चक्र शामिल हैं: People, Planet, और Progress। इसका उद्देश्य Global South में AI की परिवर्तनकारी क्षमता को प्रदर्शित करना है और इसमें फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन जैसे नेताओं के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी शामिल है।
- यह शिखर सम्मेलन Global South के किसी देश में आयोजित होने वाला अपनी तरह का पहला आयोजन है, जो समावेशी AI विकास पर केंद्रित है।
- 'India AI Expo' में 13 देशों के पैवेलियन और AI स्टार्टअप्स के प्रदर्शन शामिल हैं।
- भारत वैश्विक डिजिटल नीति मंचों में विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की आवाज उठाने की वकालत करता है।
जैसे-जैसे एशिया में AI परिवर्तन असमान रूप से प्रकट हो रहा है, हितधारकों के बीच विश्वास पैदा करने के लिए एक साझा शासन ढांचे की तत्काल आवश्यकता है। विभिन्न देशों के अलग-अलग एजेंडे हैं: दक्षिण कोरिया चिप प्रभुत्व पर ध्यान केंद्रित करता है, सिंगापुर 'पेस-सेटर' बनने पर, और चीन संप्रभु नियंत्रण पर। भारत, Global South में एक नेता के रूप में स्थित होकर, 'मानव-केंद्रित' दृष्टिकोण की वकालत करता है। एक विश्वसनीय AI पारिस्थितिकी तंत्र के लिए प्रतिनिधि डेटा बुनियादी ढांचे, लचीले AI बुनियादी ढांचे और व्यापक AI साक्षरता जैसी आधारभूत परतों की आवश्यकता होती है। एक क्षेत्रीय ढांचा यह सुनिश्चित करेगा कि तकनीकी प्रगति समावेशी मानव विकास में परिवर्तित हो, जबकि गलत सूचना और डीपफेक जैसे जोखिमों को कम किया जा सके।
- AI शासन को गलत सूचना और ऋण जाल जैसे जोखिमों को रोकने के लिए नवाचार और जवाबदेही के बीच संतुलन बनाना चाहिए।
- भारत के AI Governance Guidelines (नवंबर) और दक्षिण कोरिया का AI Basic Act (जनवरी 2026) प्रमुख क्षेत्रीय विधायी कदम हैं।
- एक साझा ढांचा वैश्विक मानदंडों, जैसे UNESCO की Recommendation on the Ethics of AI के साथ अंतर-संचालनीय (interoperable) होना चाहिए।
2022 में हस्ताक्षरित Comprehensive Economic Partnership Agreement (CEPA) के बाद भारत और UAE के बीच आर्थिक संबंधों में महत्वपूर्ण वृद्धि देखी गई है। द्विपक्षीय व्यापार समय से पांच साल पहले ही $100 बिलियन तक पहुंच गया, जिससे 2030 तक $200 बिलियन का नया लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह कॉरिडोर तेल व्यापार से आगे बढ़कर उन्नत विनिर्माण, वित्तीय सेवाओं और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में विकसित हो रहा है। DP World, ADNOC और Mubadala से भारत में बड़े निवेश आ रहे हैं, जबकि भारतीय उद्यम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार कर रहे हैं। यह साझेदारी AI infrastructure और digital public infrastructure में सहयोग की भी तलाश कर रही है, जो दोनों देशों को Global South में नेताओं के रूप में स्थापित करती है।
- 2022 के CEPA ने लगभग 90% टैरिफ लाइनों पर शुल्क समाप्त कर दिया, जिससे गैर-तेल व्यापार में काफी वृद्धि हुई।
- एकीकरण की तीव्र गति को दर्शाते हुए, 2030 के लिए $200 बिलियन का नया द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
- कम कार्बन वाले रसायनों, सोलर-प्लस-स्टोरेज परियोजनाओं और स्वास्थ्य सेवा में निवेश के माध्यम से इस कॉरिडोर को नया रूप दिया जा रहा है।
भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम समझौते (Interim Agreement) की टैरिफ कटौती और विशिष्ट क्षेत्र के प्रभावों के संबंध में जांच की जा रही है। अमेरिका भारतीय आयात पर पारस्परिक टैरिफ को घटाकर 18% करने पर सहमत हो गया है, जिससे कपड़ा क्षेत्र को लाभ होगा। हालांकि, इस बात पर विवाद है कि क्या भारत रूसी तेल खरीदना बंद करने के लिए सहमत हुआ है, जिस दावे को भारत सरकार ने स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है। कृषि में, भारत नट्स और प्रसंस्कृत फलों जैसे विभिन्न अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ समाप्त करने के लिए सहमत हो गया है, जबकि यह बनाए रखा है कि डेयरी और दालों जैसी संवेदनशील वस्तुएं संरक्षित रहेंगी। इस सौदे में पांच वर्षों में 500 बिलियन डॉलर मूल्य की वस्तुओं से जुड़ी 'buy American' मंशा भी शामिल है।
- इस सौदे का लक्ष्य कपड़ा जैसे कुछ सामानों पर मौजूदा 25% से घटाकर 18% का पारस्परिक टैरिफ (reciprocal tariff) करना है।
- भारत का कपड़ा क्षेत्र एक प्रमुख लाभार्थी है, विशेष रूप से कपास सोर्सिंग और शुल्क मुक्त पहुंच के संबंध में नए खंडों के साथ।
- 'Buy American' मंशा में भारत द्वारा ऊर्जा, तकनीक और विमान में संभावित रूप से 500 बिलियन डॉलर मूल्य के अमेरिकी सामान खरीदना शामिल है।
'Earth’s Future' में प्रकाशित एक अध्ययन से पता चलता है कि सिंधु और गंगा नदी प्रणालियाँ विपरीत हाइड्रोलॉजिकल दिशाओं में बढ़ रही हैं। 1980 और 2021 के बीच, सिंधु बेसिन में वार्षिक प्रवाह में 8% की वृद्धि हुई, जिसका मुख्य कारण पश्चिमी विक्षोभ (western disturbances) से होने वाली बढ़ी हुई वर्षा है। इसके विपरीत, गंगा बेसिन में प्रवाह में 17% की कमी देखी गई। गंगा में गिरावट का मुख्य कारण सिंचाई के लिए गहन भूजल पंपिंग है, जिसने कुछ हिस्सों में एक्विफर्स (aquifers) और नदियों के बीच प्राकृतिक प्रवाह को उलट दिया है। इसके जल सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण निहितार्थ हैं और सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) ढांचे के तहत समन्वित भूजल विनियमन की आवश्यकता है।
- सिंधु बेसिन के प्रवाह में वृद्धि मानसून के योगदान और मुख्य नदी एवं सहायक नदियों को प्रभावित करने वाले पश्चिमी विक्षोभ से जुड़ी है।
- गंगा बेसिन में गिरावट 60% से 80% भूजल निष्कर्षण के कारण है, विशेष रूप से कमजोर मानसून वर्षों के दौरान।
- अध्ययन में वर्षा, भूजल और सिंचाई को जोड़ने वाले उच्च-रिज़ॉल्यूशन, भौतिकी-आधारित हाइड्रोलॉजिकल मॉडल का उपयोग किया गया।
भारत सरकार नई दिल्ली में AI Impact Summit की मेजबानी करने के लिए तैयार है, जिसका लक्ष्य कम से कम 15 ठोस परिणाम (tangible outcomes) और डिलिवरेबल्स प्राप्त करना है। शिखर सम्मेलन में ब्राजील, फ्रांस और स्पेन के राष्ट्राध्यक्षों सहित 100 से अधिक देशों की भागीदारी देखी जाएगी। एक प्रमुख पुष्टि किया गया परिणाम अमेरिका के नेतृत्व वाली Pax Silica पहल में भारत का प्रवेश है, जो एक लचीली इलेक्ट्रॉनिक्स आपूर्ति श्रृंखला बनाने पर केंद्रित गठबंधन है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य चर्चा से आगे बढ़कर AI शासन के लिए अंतर्राष्ट्रीय निकाय बनाना है, जो International Solar Alliance के समान होगा, और इसमें भारत का AI Safety Institute (AISI) एक केंद्रीय अनुसंधान निकाय के रूप में कार्य करेगा।
- शिखर सम्मेलन केवल सैद्धांतिक AI चर्चा का मंच होने के बजाय 'ठोस परिणामों' पर केंद्रित है।
- भारत का AI Safety Institute (AISI) AI सुरक्षा और नैतिकता के लिए अनुसंधान निकाय बनाने के वैश्विक रुझान का हिस्सा है।
- Pax Silica पहल एक रणनीतिक गठबंधन है जिसका उद्देश्य वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करना है।
म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन (Munich Security Conference) में बोलते हुए, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जलवायु परिवर्तन को कम करने के लिए 'polluter pays' सिद्धांत की वकालत की। उन्होंने देशों के बीच 'विभेदित जिम्मेदारी' (differentiated responsibility) का आह्वान किया, इस बात पर जोर दिया कि ऐतिहासिक उत्सर्जन वाले उन्नत देशों को जलवायु वित्तपोषण में अधिक योगदान देना चाहिए। सीतारमण ने रेखांकित किया कि कम उत्सर्जन वाले देशों को समान रूप से भुगतान करने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने व्यावसायिक आधार पर मजबूत तकनीकी सहयोग का भी आग्रह किया और उत्सर्जन नियंत्रण के साथ-साथ लचीलेपन (resilience) और अनुकूलन (adaptation) के महत्व पर जोर दिया। मंत्री ने वैश्विक चुनौतियों और कुछ देशों द्वारा जलवायु समझौतों से हटने के बावजूद जलवायु कार्रवाई पर भारत के बढ़ते GDP खर्च का उल्लेख किया।
- 'Polluter pays' सिद्धांत सुझाव देता है कि जो प्रदूषण फैलाते हैं, उन्हें इसके प्रबंधन की लागत वहन करनी चाहिए।
- विभेदित जिम्मेदारी (Differentiated responsibility) यह स्वीकार करती है कि ग्लोबल वार्मिंग में विकसित देशों की ऐतिहासिक भूमिका अधिक रही है।
- भारत मानव जीवन और पशुधन की रक्षा के लिए उत्सर्जन नियंत्रण और लचीलेपन/अनुकूलन दोनों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
Chief of Defence Staff (CDS) General Anil Chauhan ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद भारत का मानना था कि 1954 के Panchsheel Agreement ने चीन के साथ उसकी उत्तरी सीमा को सुलझा लिया था। जबकि पूर्व में McMahon Line मौजूद थी, लद्दाख सीमा स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं थी। भारत ने माना कि व्यापार और तीर्थयात्रा के लिए छह दर्रों (passes) की पहचान करके सीमा की वैधता को सुदृढ़ किया गया था। हालांकि, चीन ने बाद में यह रुख अपनाया कि समझौता केवल व्यापार के लिए था और सीमा विवाद पर उनके रुख को प्रतिबिंबित नहीं करता था। यह ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य चल रहे क्षेत्रीय मतभेदों की जड़ों और 1954 के समझौते के बाद आई रणनीतिक अस्पष्टता पर प्रकाश डालता है।
- भारत ने शुरू में 1954 के Panchsheel Agreement को चीन के साथ उत्तरी सीमा के वास्तविक समाधान (de facto settlement) के रूप में देखा था।
- McMahon Line पूर्वी क्षेत्र में सीमा के रूप में कार्य करती थी, लेकिन लद्दाख में पश्चिमी क्षेत्र अपरिभाषित रहा।
- समझौते में भारत और तिब्बत क्षेत्र के बीच व्यापार और तीर्थयात्रा के लिए छह पहाड़ी दर्रों की पहचान की गई थी।
भारत U.S. के साथ एक जटिल व्यापार परिदृश्य का सामना कर रहा है, जिसमें 'Framework for an Interim Agreement on reciprocal trade' शामिल है। U.S. ने भारत पर कुछ दंडात्मक टैरिफ (punitive tariffs) इस शर्त पर वापस ले लिए हैं कि भारत रूसी तेल पर अपनी निर्भरता कम करेगा। यह सौदा भारत की रणनीतिक स्वायत्तता (strategic autonomy) और ईरान तथा रूस जैसे अन्य भागीदारों के साथ उसके संबंधों के बारे में चिंता पैदा करता है। आलोचकों का तर्क है कि यह सौदा एकतरफा हो सकता है, जिसमें भारत U.S. के सामानों की भारी खरीद और अपनी विदेश नीति को संरेखित करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह स्थिति भारत की 'multi-alignment' रणनीति और ईरान में Chabahar port जैसी रणनीतिक परियोजनाओं के प्रति उसकी प्रतिबद्धता का परीक्षण करती है।
- U.S. ने भारत पर 25% दंडात्मक टैरिफ इस शर्त पर वापस ले लिए कि भारत रूसी तेल की खरीद को काफी कम कर देगा या बंद कर देगा।
- व्यापार को संतुलित करने के लिए भारत ने कथित तौर पर ऊर्जा और कृषि उत्पादों सहित 500 बिलियन डॉलर मूल्य के U.S. उत्पादों को खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है।
- ईरान के संबंध में U.S. के दबाव के कारण यह सौदा BRICS में भारत की स्थिति और Chabahar port जैसी उसकी रणनीतिक परियोजनाओं को प्रभावित कर सकता है।
चूंकि सत्ता की राजनीति के कारण UN और WTO जैसी पारंपरिक बहुपक्षीय संरचनाओं में गिरावट आ रही है, भारत को अपनी विदेश नीति को फिर से तैयार करना चाहिए। लेख 'strategic autonomy' से आगे बढ़कर 'endogenous capabilities' के निर्माण और 'Viksit Bharat 2047' को आगे बढ़ाने का सुझाव देता है। दुनिया के अमेरिका-चीन द्विध्रुवीयता (bipolarity) की ओर बढ़ने के साथ, भारत को व्यापार कूटनीति को प्राथमिकता देनी चाहिए, निर्यात में विविधता लानी चाहिए और एशिया और अफ्रीका के साथ संबंधों को मजबूत करना चाहिए। इसके अलावा, यह पाकिस्तान के साथ संबंधों में एक व्यावहारिक बदलाव की वकालत करता है, इसे केवल एक सुरक्षा चुनौती के बजाय एक विदेश नीति और आर्थिक अवसर के रूप में देखता है, ताकि ईरान-पाकिस्तान-भारत पाइपलाइन जैसी क्षेत्रीय क्षमता को अनलॉक किया जा सके।
- वैश्विक बहुपक्षवाद को लेन-देन के संबंधों और शक्ति-आधारित ब्लॉकों द्वारा प्रतिस्थापित किया जा रहा है।
- वैश्विक प्रभाव बनाए रखने के लिए भारत को आंतरिक तकनीकी और विनिर्माण शक्ति बनाने की आवश्यकता है।
- आर्थिक विकास के लिए उभरते बाजारों के साथ व्यापार कूटनीति और Free Trade Agreements (FTAs) महत्वपूर्ण हैं।
शोधकर्ताओं ने मिस्र की Valley of the Kings में मकबरों में Tamil Brahmi, Prakrit और Sanskrit में लगभग 30 शिलालेखों की पहचान की है, जो पहली और तीसरी शताब्दी ईस्वी (1st and 3rd Centuries CE) के बीच के हैं। यह क्रांतिकारी खोज Tamilagam, भारत के अन्य हिस्सों और Roman Empire के बीच प्राचीन व्यापारिक संबंधों पर प्रकाश डालती है। 'Cikai Korran' नाम बार-बार सामने आता है, जो पांच मकबरों में आठ बार अंकित है। विद्वानों का सुझाव है कि ये व्यक्ति भारतीय उपमहाद्वीप के आगंतुक थे जिन्होंने मकबरों के अंदर अपना नाम छोड़ने की प्रथा का पालन किया। ये निष्कर्ष Berenike जैसे लाल सागर बंदरगाहों से नील नदी घाटी की ओर पुरातात्विक ध्यान में बदलाव का संकेत देते हैं।
- शिलालेख Theban Necropolis, विशेष रूप से मिस्र की Valley of the Kings में पाए गए थे।
- यह खोज प्रारंभिक शताब्दियों ईस्वी के दौरान भारतीय उपमहाद्वीप और Roman Empire के बीच सक्रिय व्यापार और सांस्कृतिक विनिमय की पुष्टि करती है।
- शिलालेखों में पाया गया 'Korran' नाम Sangam साहित्य, विशेष रूप से Purananooru में भी मौजूद है।
प्रमुख निजी अंतरिक्ष कंपनियां, SpaceX और Blue Origin, मंगल की दीर्घकालिक महत्वाकांक्षाओं के बजाय चंद्र मिशनों को तेजी से प्राथमिकता दे रही हैं। यह बदलाव मुख्य रूप से NASA के Artemis कार्यक्रम की तत्काल बाहरी मांग और तकनीक को करीब, अधिक सुलभ वातावरण में परिपक्व करने की आवश्यकता से प्रेरित है। चंद्रमा लाइफ-सपोर्ट सिस्टम और SpaceX के Starship जैसे भारी-भरकम रॉकेटों के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षण स्थल के रूप में कार्य करता है। इसके अतिरिक्त, चंद्र दौड़ भू-राजनीतिक नेतृत्व का प्रतीक बन गई है, जिसमें अमेरिका प्रतिद्वंद्वी देशों से पहले मनुष्यों को चंद्रमा पर वापस भेजने का लक्ष्य बना रहा है। यह बदलाव एक स्थायी अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के निर्माण के प्रति व्यावहारिक दृष्टिकोण को दर्शाता है।
- चंद्रमा 'रॉकेट उड़ान द्वारा एक सप्ताह की दूरी' पर है, जो तकनीक के परीक्षण के लिए मंगल की तुलना में अधिक व्यवहार्य तत्काल लक्ष्य है।
- NASA का Artemis कार्यक्रम निजी क्षेत्र में चंद्र लैंडर विकास के लिए प्राथमिक वित्त पोषण और मांग प्रदान करता है।
- SpaceX का Starship चंद्र और अंतरग्रहीय यात्रा दोनों के लिए एक परिवहन प्रणाली के रूप में विकसित किया जा रहा है।
Artificial Intelligence (AI) दुनिया को औद्योगिक क्रांति के बराबर बड़े पैमाने पर बदलने के लिए तैयार है। Large Language Models (LLMs) से परे, AI कूटनीति, शासन और आधुनिक युद्ध में एक महत्वपूर्ण उपकरण बन रहा है। यूक्रेन के संघर्ष ने पहले ही 'game age technology' की शक्ति का प्रदर्शन किया है, जहाँ AI-संचालित ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध युद्धक्षेत्र को फिर से परिभाषित कर रहे हैं। हालांकि, AI की तीव्र प्रगति महत्वपूर्ण जोखिम लाती है, जिसमें स्वायत्त प्रणालियों के मानव नियंत्रण से बाहर निकलने की संभावना शामिल है। विशेषज्ञ AI को मानव जाति के लिए एक अनियंत्रित खतरा बनने से रोकने के लिए प्रभावी वैश्विक निगरानी और 'checks and balances' के एक सेट का आह्वान करते हैं।
- AI एक माध्यमिक उपकरण से राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धात्मकता और सैन्य शक्ति के प्राथमिक प्रवर्तक के रूप में बदल रहा है।
- AI का सैन्यीकरण युद्ध को मानव-नियंत्रित से स्वायत्त प्रणालियों की ओर ले जा रहा है जो स्वतंत्र निर्णय लेने में सक्षम हैं।
- न्यायिक सेटिंग्स में AI 'hallucinations' और स्वायत्त ड्रोन झुंडों द्वारा बड़े पैमाने पर हताहत होने की संभावना के संबंध में चिंताएं मौजूद हैं।
अमेरिका और रूस के बीच 'New' Strategic Arms Reduction Treaty (START) 5 फरवरी, 2026 को समाप्त हो गई, जो परमाणु हथियार नियंत्रण में एक महत्वपूर्ण युग के अंत का प्रतीक है। मूल रूप से 2010 में हस्ताक्षरित, इस संधि ने दोनों देशों को 1,550 तैनात रणनीतिक परमाणु हथियारों तक सीमित कर दिया था। बदलती वैश्विक भू-राजनीति और परमाणु शक्ति के रूप में चीन के उदय के बीच इसकी समाप्ति, हथियारों की एक नई दौड़ की आशंका पैदा करती है। अमेरिकी नेतृत्व ने संकेत दिया है कि भविष्य के समझौतों में चीन को शामिल किया जाना चाहिए। START का अंत Non-Proliferation Treaty (NPT) जैसे अन्य अंतरराष्ट्रीय ढांचों के लिए खतरा पैदा करता है, जिससे वैश्विक परमाणु स्थिरता के लिए एक नए, अधिक समावेशी दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है।
- New START Treaty अमेरिका और रूस के बीच अंतिम शेष प्रमुख हथियार नियंत्रण समझौता था।
- इस संधि ने तैनात हथियारों को शीत युद्ध के चरम स्तर से घटाकर प्रति पक्ष 1,550 करने में सफलता प्राप्त की थी।
- भू-राजनीतिक बदलाव और टैरिफ युद्ध पारंपरिक हथियार नियंत्रण कूटनीति को कमजोर कर रहे हैं।
एक ऐतिहासिक U.S.-Bangladesh व्यापार समझौते के बाद बांग्लादेश भारतीय कपास को अमेरिका निर्मित कपास से बदलने के लिए तैयार है। यह समझौता बांग्लादेश को कपड़ा उत्पादों पर 19% टैरिफ कटौती (शून्य तक) प्रदान करता है यदि वे अमेरिकी कपास या मानव निर्मित फाइबर का उपयोग करते हैं। इस कदम का उद्देश्य बांग्लादेश को विशाल अमेरिकी कपड़ा बाजार तक अधिक पहुंच प्रदान करना है। हालांकि, विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यह बांग्लादेश को अन्य प्रतिस्पर्धी बाजारों की खोज करने से रोक सकता है। ऐतिहासिक रूप से, भारत एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता रहा है, जिसने 2024 में बांग्लादेश को 1.6 बिलियन डॉलर मूल्य के सूती धागे का निर्यात किया था। यह बदलाव दो पड़ोसियों के बीच तनावपूर्ण व्यापार संबंधों और जवाबी प्रतिबंधों की अवधि के बाद आया है।
- एक नया व्यापार समझौता अमेरिकी कपास का उपयोग करने वाले बांग्लादेशी कपड़ों पर 19% टैरिफ को समाप्त करता है, जिससे भारतीय कच्चे माल से दूर जाने का प्रोत्साहन मिलता है।
- बांग्लादेश पारंपरिक रूप से अपने बड़े कपड़ा क्षेत्र के लिए घरेलू उत्पादन की कमी के कारण भारत और मध्य एशिया से कपास का आयात करता था।
- इस सौदे को अमेरिकी बाजार तक पहुंच के लिए 'game changer' के रूप में देखा जा रहा है, जो बांग्लादेशी निर्माताओं के लिए सबसे बड़ा कपड़ा बाजार है।
जैसे-जैसे भारत 2026 में Kimberley Process (KP) की अध्यक्षता करने की तैयारी कर रहा है, 'conflict diamonds' को नियंत्रित करने वाले तंत्र में सुधार करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। 2003 में स्थापित वर्तमान प्रणाली को संघर्ष की संकीर्ण परिभाषा और राजनीतिक वीटो के प्रति संवेदनशीलता के लिए आलोचना का सामना करना पड़ता है। भारत एक प्रमुख हीरा प्रसंस्करण केंद्र के रूप में अपनी स्थिति का लाभ उठाकर blockchain-आधारित प्रमाणन जैसे तकनीकी सुधार पेश कर सकता है। प्रस्तावित सुधारों में स्वतंत्र तीसरे पक्ष के ऑडिट, अफ्रीकी उत्पादक देशों के लिए तकनीकी सहायता और यह सुनिश्चित करने के लिए कि हीरे का राजस्व सामुदायिक विकास का समर्थन करता है, KP लक्ष्यों को Sustainable Development Goals के साथ जोड़ना शामिल है।
- भारत वर्ष 2026 के लिए Kimberley Process (KP) की अध्यक्षता ग्रहण करेगा।
- KP सरकारों, उद्योग संगठनों और नागरिक समाज का एक त्रिपक्षीय सेटअप है जो 'conflict diamond' व्यापार को रोकने के लिए है।
- भारत धोखाधड़ी को कम करने और हीरा शिपमेंट में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए blockchain-आधारित प्रमाणन का उपयोग करने का प्रस्ताव करता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मलेशिया यात्रा द्विपक्षीय संबंधों में एक महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतीक है, जो हालिया तनावों को पीछे छोड़ती है। दोनों देशों ने आतंकवाद और सीमा पार आतंकवाद की स्पष्ट रूप से निंदा करते हुए एक संयुक्त बयान जारी किया। मुख्य समझौतों में IIT Madras Global और Advanced Semiconductor Academy of Malaysia से जुड़ा सेमीकंडक्टर्स पर एक MoU शामिल है। चर्चाओं में व्यापार, रक्षा, ऊर्जा और डिजिटल तकनीक शामिल थी। महत्वपूर्ण रूप से, दोनों पक्षों ने प्रचारक Zakir Naik के प्रवास जैसे विवादास्पद मुद्दों पर सार्वजनिक चर्चा से बचने का विकल्प चुना और ASEAN-India Trade in Goods Agreement (AITIGA) की समीक्षा पर ध्यान केंद्रित किया।
- इस यात्रा का उद्देश्य 2024 और 2025 में क्षेत्रीय सुरक्षा पर टिप्पणियों के कारण आए तनाव के बाद संबंधों को सुधारना था।
- IIT Madras Global और मलेशिया की Advanced Semiconductor Academy के बीच सेमीकंडक्टर सहयोग के लिए एक प्रमुख MoU पर हस्ताक्षर किए गए।
- दोनों राष्ट्र आतंकवाद विरोधी सहयोग और खुफिया जानकारी साझा करने को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हुए।
म्यांमार के सैन्य जुंटा ने 2025 के अंत में चरणों में चुनाव कराए, जिनकी विश्वसनीयता और समावेशिता की कमी के लिए व्यापक रूप से आलोचना की गई है। भारत के लिए, 'Act East Policy' के तहत म्यांमार दक्षिण पूर्व एशिया का एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार है। नई दिल्ली के सामने एक जटिल चुनौती है: सुरक्षा और कनेक्टिविटी हितों की रक्षा के लिए जुंटा के साथ कार्यात्मक संबंध बनाए रखते हुए लोकतांत्रिक बदलाव का समर्थन करना। Kaladan Multi-Modal Transit Transport Project जैसी प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाएं आंतरिक संघर्ष के कारण देरी का सामना कर रही हैं। भारत अपनी मानवीय भूमिका जारी रखे हुए है, जिसका उदाहरण मार्च 2025 के भूकंप के दौरान 'Operation Brahma' है, जबकि शासन के स्पष्ट राजनीतिक समर्थन से बच रहा है।
- म्यांमार के चुनाव सैन्य नियंत्रण में आयोजित किए गए थे, जिससे विश्वसनीयता की भारी कमी और अंतरराष्ट्रीय आलोचना हुई।
- भारत म्यांमार को अपनी Act East Policy और पूर्वोत्तर सुरक्षा के लिए आवश्यक एक रणनीतिक पड़ोसी के रूप में देखता है।
- क्षेत्रीय अस्थिरता के कारण India-Myanmar-Thailand Trilateral Highway जैसी प्रमुख कनेक्टिविटी परियोजनाओं में देरी हो रही है।