Economic Sciences में 2025 का नोबेल पुरस्कार Joel Mokyr, Philippe Aghion और Peter Howitt को दिया गया। Mokyr को तकनीकी प्रगति के माध्यम से निरंतर विकास के लिए आवश्यक पूर्व-शर्तों की पहचान करने के लिए मान्यता दी गई, जिसमें 'उपयोगी ज्ञान' की भूमिका पर जोर दिया गया। Aghion और Howitt को उनके 'creative destruction के माध्यम से निरंतर विकास के सिद्धांत' के लिए सम्मानित किया गया, जो बताता है कि कैसे नए नवाचार पुरानी तकनीकों की जगह लेते हैं, जिससे आर्थिक लाभ होता है लेकिन स्थापित संस्थाओं का विनाश भी होता है। उनका शोध इष्टतम R&D निवेश निर्धारित करने के लिए एक गणितीय मॉडल प्रदान करता है और सुझाव देता है कि सरकारों को दीर्घकालिक सामाजिक लाभ सुनिश्चित करने और स्थापित स्वार्थ समूहों के प्रतिरोध को दूर करने के लिए R&D को सब्सिडी देनी चाहिए।
- Joel Mokyr ने प्रपोजिशनल नॉलेज (प्राकृतिक दुनिया) और प्रिस्क्रिप्टिव नॉलेज (निर्देश/नुस्खे) के बीच अंतर किया।
- 'Creative destruction' का सिद्धांत यह मानता है कि नवाचार विकास की ओर ले जाता है लेकिन मौजूदा तकनीकों और हितों को विस्थापित भी करता है।
- शोध बताता है कि R&D को सब्सिडी दी जानी चाहिए क्योंकि निजी फर्में पर्याप्त निवेश नहीं कर सकती हैं यदि वे पूरे मूल्य को प्राप्त नहीं कर पाती हैं।
सितंबर 2025 में भारत की रिटेल इन्फ्लेशन (खुदरा मुद्रास्फीति) 99 महीने के निचले स्तर 1.54% पर आ गई, जो RBI के 2%-6% के कंफर्ट बैंड से नीचे है। यह प्रवृत्ति बताती है कि आपूर्ति मांग से अधिक हो रही है, जो चीन की ओवरसप्लाई समस्या के समान स्थिति है। लेख का तर्क है कि RBI को अपने पूर्वानुमान की सटीकता में सुधार करने की आवश्यकता है, क्योंकि इसकी भविष्यवाणियों में कम अवधि के भीतर भारी संशोधन देखे गए हैं। अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने के लिए, Monetary Policy Committee (MPC) से दिसंबर में ब्याज दरों में महत्वपूर्ण कटौती पर विचार करने का आह्वान किया गया है ताकि निजी निवेश और खपत को बढ़ावा मिल सके, क्योंकि वर्तमान में घरेलू बचत का उपयोग खर्च बढ़ाने के बजाय कर्ज कम करने के लिए किया जा रहा है।
- सितंबर 2025 में रिटेल इन्फ्लेशन 99 महीने के निचले स्तर 1.54% पर पहुंच गई।
- RBI का लक्ष्य मुद्रास्फीति दर 4% है, जिसमें 2%-6% का टॉलरेंस बैंड है।
- कम मुद्रास्फीति कमजोर घरेलू मांग का संकेत देती है, जिससे MPC द्वारा ब्याज दरों में कटौती की मांग बढ़ रही है।
नवाचार-संचालित आर्थिक विकास पर उनके शोध के लिए Joel Mokyr, Philippe Aghion और Peter Howitt को आर्थिक विज्ञान में 2025 का Nobel Prize प्रदान किया गया। मोकिर का काम ऐतिहासिक कारकों और तकनीकी प्रगति पर केंद्रित है, जबकि एघियन और हॉविट ने "creative destruction" (सृजनात्मक विनाश) का गणितीय मॉडल विकसित किया। यह अवधारणा एक अंतहीन प्रक्रिया का वर्णन करती है जहां नए, बेहतर उत्पाद और प्रौद्योगिकियां पुराने उत्पादों की जगह लेती हैं, जिससे दीर्घकालिक समृद्धि आती है। 1.2 मिलियन डॉलर का यह पुरस्कार इस बात पर प्रकाश डालता है कि निरंतर विकास की गारंटी नहीं है और इसके लिए आर्थिक ठहराव का मुकाबला करने के लिए विशिष्ट संस्थागत और तकनीकी पूर्वापेक्षाओं की आवश्यकता होती है।
- पुरस्कार विजेताओं ने बताया कि कैसे नवाचार और तकनीकी प्रगति दीर्घकालिक आर्थिक विकास के प्राथमिक चालक हैं।
- "Creative destruction" मॉडल का मानना है कि विकास पुरानी प्रौद्योगिकियों के स्थान पर नई प्रौद्योगिकियों के निरंतर प्रतिस्थापन से उत्पन्न होता है।
- Joel Mokyr का शोध नवाचार को बढ़ावा देने में 'विकास की संस्कृति' और संस्थागत ढांचे की ऐतिहासिक भूमिका पर जोर देता है।
विदेश मंत्री S. Jaishankar और कनाडा की विदेश मंत्री Anita Anand के बीच एक बैठक के बाद भारत और कनाडा अपने व्यापार संवाद को फिर से शुरू करने और राजनयिक संबंधों को बहाल करने पर सहमत हुए हैं। चर्चा Comprehensive Economic Partnership Agreement (CEPA) के लिए बातचीत फिर से शुरू करने और AI, ऊर्जा एवं खाद्य सुरक्षा में सहयोग तलाशने पर केंद्रित थी। दोनों देशों ने Small Modular Reactor (SMR) परमाणु-संचालित रिएक्टरों पर प्रारंभिक चर्चा भी शुरू की। यह कदम द्विपक्षीय संबंधों में "रिपेयर मोड" का संकेत देता है, जो 2023 से सुरक्षा मुद्दों और एक खालिस्तानी कार्यकर्ता की हत्या के आरोपों के कारण तनावपूर्ण थे।
- भारत और कनाडा व्यापार और निवेश पर भारत-कनाडा मंत्रिस्तरीय संवाद को फिर से स्थापित कर रहे हैं।
- चर्चाओं में फरवरी 2026 में भारत में AI Impact Summit के लिए कनाडा के प्रधानमंत्री को आमंत्रित करना शामिल था।
- Small Modular Reactor (SMR) तकनीक पर सहयोग नागरिक परमाणु ऊर्जा साझेदारी के एक नए क्षेत्र को चिह्नित करता है।
भारतीय रेलवे 2030 तक नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जक बनने के लिए एक बड़े बदलाव से गुजर रहा है, जो भारत के राष्ट्रीय लक्ष्य से चार दशक पहले है। प्रमुख पहलों में ब्रॉड-गेज पटरियों का 100% विद्युतीकरण, "Hydrogen for Heritage" पहल के तहत हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेनों की शुरुआत और सौर एवं पवन ऊर्जा का उपयोग शामिल है। इस बदलाव में माल ढुलाई को सड़क से रेल पर स्थानांतरित करना भी शामिल है ताकि 2030 तक रेल हिस्सेदारी को बढ़ाकर 45% किया जा सके। Sovereign green bonds और World Bank एवं IRFC के ऋण जैसे वित्तीय तंत्र इस अरबों डॉलर की डीकार्बोनाइजेशन योजना का समर्थन कर रहे हैं।
- भारतीय रेलवे का लक्ष्य विद्युतीकरण और नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण के माध्यम से 2030 तक नेट-जीरो उत्सर्जन प्राप्त करना है।
- ब्रॉड-गेज नेटवर्क का 98% से अधिक पहले ही विद्युतीकृत हो चुका है, जिससे डीजल पर निर्भरता काफी कम हो गई है।
- "Hydrogen for Heritage" पहल के तहत 35 हाइड्रोजन-संचालित ट्रेन सेट तैनात करने की योजना है।
अर्थशास्त्री C. Rangarajan और D.K. Srivastava ने भारत की संभावित विकास दर का विश्लेषण किया है, जिसमें सुझाव दिया गया है कि यह वर्तमान में 6.5% के आसपास बनी हुई है। जबकि कुछ लोग हालिया त्रैमासिक आंकड़ों के आधार पर 7.8% की वृद्धि का तर्क देते हैं, लेखकों ने Real Gross Fixed Capital Formation (GFCF) और Incremental Capital-Output Ratio (ICOR) के बीच संबंधों पर जोर दिया है। 6.5% से ऊपर की वृद्धि प्राप्त करने के लिए, भारत को GFCF दर को GDP के लगभग 34% तक बढ़ाने और ICOR को कम करने की आवश्यकता है। विश्लेषण निजी क्षेत्र के निवेश के महत्व और दीर्घकालिक विकास संभावनाओं पर AI जैसे तकनीकी परिवर्तनों के प्रभाव पर प्रकाश डालता है।
- ऐतिहासिक GFCF और ICOR रुझानों के आधार पर भारत की संभावित विकास दर 6.5% अनुमानित है।
- GFCF GDP के लगभग 33.6% पर स्थिर रहा है, लेकिन विकास को और आगे बढ़ाने के लिए निजी निवेश को बढ़ाने की आवश्यकता है।
- सार्वजनिक क्षेत्र का निवेश हाल ही में एक प्रमुख चालक रहा है, लेकिन इसकी गति धीमी होती दिख रही है।
भारत की खुदरा मुद्रास्फीति (Retail inflation), जिसे Consumer Price Index (CPI) द्वारा मापा जाता है, सितंबर 2025 में गिरकर 1.54% हो गई, जो जून 2017 के बाद सबसे कम है। इस गिरावट का मुख्य कारण खाद्य और ईंधन की कीमतों में कमी है। यह आंकड़ा वर्तमान में Reserve Bank of India (RBI) के 2% के निचले संतोषजनक स्तर (lower comfort bound) से नीचे है। हालांकि अच्छे मानसून के कारण खाद्य मुद्रास्फीति के नरम रहने की उम्मीद है, लेकिन मानसून की देरी से वापसी से जोखिम बने हुए हैं। कपड़े और जूते जैसी श्रेणियों में भी मंदी देखी गई, जबकि आवास और नशीले पदार्थों की मुद्रास्फीति दरों में मामूली वृद्धि हुई।
- खाद्य और पेय पदार्थों की कीमतों में संकुचन के कारण सितंबर में खुदरा मुद्रास्फीति गिरकर 1.54% हो गई।
- वर्तमान मुद्रास्फीति दर RBI द्वारा निर्धारित 2% की निचली संतोषजनक सीमा से नीचे है।
- एक साल पहले 8.4% मुद्रास्फीति की तुलना में सितंबर में खाद्य और पेय पदार्थों में 1.4% का संकुचन देखा गया।
भारत में बिहार की मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना और कर्नाटक की गृह लक्ष्मी जैसी महिला-केंद्रित नकद हस्तांतरण कार्यक्रमों में तेजी देखी गई है। हालांकि 89% भारतीय महिलाओं के पास अब बैंक खाते हैं—जो 77% के वैश्विक औसत से अधिक है—वास्तविक आर्थिक एजेंसी सीमित बनी हुई है। डेटा से पता चलता है कि कई महिलाएं अपने खातों का उपयोग मुख्य रूप से बचत, उधार या व्यावसायिक संचालन के बजाय घरेलू जरूरतों के लिए नकद निकालने के लिए करती हैं। बाधाओं में मोबाइल फोन स्वामित्व में 19% का लिंग अंतर, डिजिटल साक्षरता की कमी और सामाजिक मानदंड शामिल हैं। नकद हस्तांतरण के माध्यम से एजेंसी बनाने के लिए, महिलाओं को संपत्ति पर नियंत्रण और साधारण जमा से परे ऋण तक पहुंच की आवश्यकता है।
- 89% भारतीय महिलाओं के पास बैंक खाते हैं, जो 77% के वैश्विक औसत से काफी अधिक है।
- 'JAM ट्रिनिटी' (Jan Dhan, Aadhaar, Mobile) भारत के प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (Direct Benefit Transfer - DBT) ढांचे की रीढ़ है।
- मोबाइल फोन स्वामित्व और डिजिटल वित्तीय साक्षरता में एक महत्वपूर्ण लिंग अंतर मौजूद है, जो पूर्ण वित्तीय समावेशन में बाधा डालता है।
वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता के बीच, भारत-UK आर्थिक संबंध निरंतर प्रगति दिखा रहे हैं। UK के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर (Keir Starmer) की हालिया भारत यात्रा ने रक्षा, निवेश और सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर ध्यान केंद्रित करते हुए द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत किया। US या EU के साथ कठिन वार्ताओं के विपरीत, भारत और UK ने जुलाई में हस्ताक्षरित अपने व्यापार सौदे को चुपचाप आगे बढ़ाया है। भारत वर्तमान में दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, फिर भी UK के कुल वस्तु निर्यात में इसकी हिस्सेदारी 2% से कम है, जो महत्वपूर्ण विकास क्षमता का संकेत देती है। प्रमुख विकासों में £350 मिलियन का मिसाइल आपूर्ति सौदा और 64 भारतीय कंपनियों द्वारा UK में £1.3 बिलियन निवेश करने की प्रतिबद्धता शामिल है।
- भारत विश्व स्तर पर चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है लेकिन UK के कुल वस्तु निर्यात में इसकी हिस्सेदारी कम है।
- भारत के कुल निर्यात में UK की हिस्सेदारी लगभग 3% है, जो व्यापार विस्तार की पर्याप्त गुंजाइश का सुझाव देती है।
- एक रणनीतिक £350 मिलियन का मिसाइल सौदा दोनों देशों के बीच गहरे होते रक्षा सहयोग को उजागर करता है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने भारतीय वस्तुओं पर 50% अमेरिकी टैरिफ से प्रभावित निर्यातकों की सहायता के लिए Export Promotion Policy 2025-30 पेश की है। यह नीति चमड़ा, कपड़ा और रत्न जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित है, जिन्हें वियतनाम जैसे देशों से महत्वपूर्ण प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है। यह छोटे व्यवसायों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचने में मदद करने के लिए वित्तीय सहायता, विपणन विकास सहायता और लॉजिस्टिक्स सब्सिडी प्रदान करती है। 'One District One Product' (ODOP) योजना को मजबूत करके और नए हवाई अड्डों के माध्यम से वैश्विक कनेक्टिविटी में सुधार करके, राज्य का लक्ष्य एक लचीला निर्यात आधार बनाना और $1 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था हासिल करना है।
- यह नीति लैंडलॉक्ड (landlocked) निर्यातकों की मदद के लिए अंतर्देशीय माल ढुलाई लागत की 30% प्रतिपूर्ति प्रदान करती है।
- MSMEs को अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा करने और वैश्विक व्यापार मेलों में भाग लेने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
- ODOP योजना एक प्रमुख चालक रही है, जो उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों के अनूठे उत्पादों को बढ़ावा देती है।
Brussels में वार्ता के 14वें दौर के बाद भारत और European Union (EU) 2024 के अंत तक Free Trade Agreement (FTA) संपन्न करने को लेकर आशावादी हैं। जबकि 2024 में द्विपक्षीय व्यापार €120 बिलियन तक पहुंच गया, टैरिफ, स्थिरता और कार्बन नियमों के संबंध में चुनौतियां बनी हुई हैं। भारत ने विशेष रूप से EU के Carbon Border Adjustment Mechanism (CBAM) पर आपत्ति जताई है, जो कार्बन-गहन आयात पर एक टैक्स है और जनवरी 2026 में पूर्ण कार्यान्वयन के लिए निर्धारित है। इसके अतिरिक्त, कनेक्टिविटी और निवेश बढ़ाने के लिए India-Middle East-Europe Economic Corridor (IMEC) और Global Gateway Forum पर भी चर्चा हुई।
- वार्ताकार कृषि, डेयरी, फार्मा और ऑटोमोबाइल में संवेदनशील मुद्दों को सुलझाने के लिए काम कर रहे हैं।
- भारत EU के CBAM का विरोध करता है, इसे एक व्यापार बाधा के रूप में देखता है जो जलवायु कार्रवाई को व्यापार से जोड़ता है।
- India-Middle East-Europe Economic Corridor (IMEC) दोनों क्षेत्रों के लिए एक रणनीतिक प्राथमिकता बनी हुई है।
राजनीतिक वादों के बावजूद, बिहार में बेरोजगारी एक गंभीर मुद्दा बनी हुई है। 2023-2024 के Periodic Labour Force Survey (PLFS) के विश्लेषण से पता चलता है कि Worker Population Ratio (WPR) और Labour Force Participation Ratio (LFPR) में बिहार बड़े राज्यों में सबसे निचले स्थान पर है। राज्य की बेरोजगारी दर 5.2% (तिमाही) और 3% (वार्षिक) है। एक महत्वपूर्ण चिंता 'Discouraged Worker Effect' है, जहां खराब नौकरी की संभावनाओं के कारण व्यक्ति काम की तलाश बंद कर देते हैं, जिससे बेरोजगारी के आंकड़े भ्रामक रूप से कम हो जाते हैं। बिहार में आकस्मिक श्रमिकों (casual laborers) का अनुपात भी उच्च (23.8%) है और महिला कार्यबल भागीदारी (30.1%) बहुत कम है।
- भारत के नौ बड़े, कम आय वाले राज्यों में बिहार का WPR और LFPR सबसे कम है।
- राज्य का महिला WPR राष्ट्रीय औसत और झारखंड जैसे पड़ोसी राज्यों की तुलना में काफी कम है।
- कार्यबल का एक बड़ा प्रतिशत (23.8%) आकस्मिक श्रमिकों के रूप में लगा हुआ है, जो औपचारिक नौकरी के अवसरों की कमी को दर्शाता है।
कर्नाटक राज्य मंत्रिमंडल ने 'Karnataka Menstrual Leave Policy-2025' को मंजूरी दे दी है, जो महिला कर्मचारियों को प्रति माह एक दिन का सवैतनिक अवकाश (paid leave) प्रदान करती है। यह ऐतिहासिक निर्णय कर्नाटक को भारत का पहला ऐसा राज्य बनाता है जो इस तरह की नीति के तहत सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों को कवर करता है। जबकि बिहार और ओडिशा सरकारी कर्मचारियों के लिए मासिक धर्म अवकाश प्रदान करते हैं, और केरल ने इसे विश्वविद्यालयों में लागू किया है, कर्नाटक की नीति अब तक की सबसे समावेशी है। इस कदम का उद्देश्य महिलाओं के स्वास्थ्य का समर्थन करना और पूरे राज्य में अधिक लिंग-संवेदनशील कार्य वातावरण को बढ़ावा देना है।
- यह नीति मासिक धर्म वाली कर्मचारियों के लिए हर महीने एक दिन का सवैतनिक अवकाश प्रदान करती है।
- यह कर्नाटक में सरकारी कार्यालयों और निजी कंपनियों में काम करने वाली सभी महिलाओं पर लागू है।
- यह निर्णय कार्यस्थल में भागीदारी और महिलाओं के स्वास्थ्य परिणामों में सुधार की सिफारिशों के बाद लिया गया है।
भारत और United Kingdom ने भारतीय सेना के लिए मिसाइलें खरीदने हेतु £350-million के रक्षा समझौते को अंतिम रूप दिया है। इसके अतिरिक्त, दोनों देशों ने नौसैनिक जहाजों के लिए इलेक्ट्रिक-संचालित इंजन विकसित करने के लिए £250-million के प्रोजेक्ट के लिए एक Implementing Arrangement पर हस्ताक्षर किए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और UK PM Keir Starmer ने इस साझेदारी को वैश्विक स्थिरता का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बताया। इस सौदे के साथ महत्वपूर्ण आर्थिक प्रतिबद्धताएं भी जुड़ी हैं, जिसमें TVS Motor और Cyient सहित 64 भारतीय कंपनियों ने UK में £1.3 billion निवेश करने का संकल्प लिया है, जिससे संभावित रूप से 7,000 नौकरियां पैदा होंगी। इसके अलावा, UK के विश्वविद्यालयों Lancaster और Surrey को भारत में कैंपस स्थापित करने की मंजूरी मिली है।
- यह सौदा भारत और UK के बीच एक व्यापक जटिल हथियार साझेदारी (complex weapons partnership) स्थापित करता है।
- नौसैनिक जहाजों के लिए इलेक्ट्रिक-संचालित इंजनों पर सहयोग समुद्री रक्षा प्रौद्योगिकी में एक नया मील का पत्थर है।
- UK में भारतीय निजी क्षेत्र का निवेश इंजीनियरिंग, सेमीकंडक्टर और ई-मोबिलिटी क्षेत्रों में विस्तार कर रहा है।
चूंकि व्यापार में उतार-चढ़ाव और टैरिफ के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था अनिश्चितता के दौर में प्रवेश कर रही है, लेख भारतीय निजी पूंजी को घरेलू स्तर पर निवेश करने की आवश्यकता पर जोर देता है। रिकॉर्ड मुनाफे के बावजूद, निजी निवेश ने गति नहीं पकड़ी है, और कई फर्में विदेशी बाजारों की ओर देख रही हैं। लेखक का तर्क है कि बाहरी मांग पर निर्भर रहना जोखिम भरा है और ध्यान घरेलू मांग को प्रोत्साहित करने और आंतरिक उत्पादकता बढ़ाने पर केंद्रित होना चाहिए। इसके अलावा, R&D पर भारत का सकल व्यय GDP का 0.64% पर कम बना हुआ है, जो ज्यादातर सरकार द्वारा वित्तपोषित है। दीर्घकालिक आर्थिक लचीलेपन के लिए निजी क्षेत्र के नेतृत्व वाले नवाचार की ओर बदलाव महत्वपूर्ण है।
- उच्च कॉर्पोरेट मुनाफे और PLI योजनाओं जैसे सरकारी प्रोत्साहनों के बावजूद भारत में निजी पूंजीगत व्यय सुस्त बना हुआ है।
- भारत का R&D खर्च वैश्विक समकक्षों (जैसे चीन GDP का 2.1%) की तुलना में काफी कम है, जिसमें निजी क्षेत्र का योगदान बहुत कम है।
- वर्तमान वैश्विक 'वि-वैश्वीकरण' (de-globalisation) का माहौल भारतीय पूंजी के लिए स्थानीय विकास के लिए घरेलू संपत्ति को अनलॉक करना अनिवार्य बनाता है।
विश्व बैंक ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए भारत के GDP विकास अनुमान को अपने पिछले अनुमान 6.3% से बढ़ाकर 6.5% कर दिया है। इस वृद्धि का श्रेय लचीली घरेलू स्थितियों, मजबूत निजी खपत और GST सुधारों के सकारात्मक प्रभाव को दिया गया है। हालांकि, भारतीय निर्यात पर अमेरिकी टैरिफ (tariffs) से संभावित बाधाओं के कारण 2026-27 के पूर्वानुमान को थोड़ा घटाकर 6.3% कर दिया गया है। वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद, भारत के दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बने रहने की उम्मीद है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ग्रामीण मजदूरी वृद्धि और कृषि उत्पादन ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है।
- भारत की वास्तविक GDP वृद्धि अप्रैल-जून 2025 तिमाही में 7.8% तक पहुंच गई, जो शुरुआती उम्मीदों से अधिक थी।
- विश्व बैंक आर्थिक गतिविधियों का समर्थन करने के लिए सरलीकृत अनुपालन और कम टैक्स स्लैब सहित GST सुधारों को श्रेय देता है।
- भारत के तीन-चौथाई माल निर्यात पर संभावित अमेरिकी टैरिफ (50% तक) भविष्य के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण जोखिम कारक हैं।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अपनी Central Bank Digital Currency (CBDC) की शुरुआत के लिए एक नपा-तुला दृष्टिकोण अपना रहा है। डिप्टी गवर्नर रबी शंकर ने कहा कि RBI पूर्ण स्तर पर रिटेल लॉन्च के लिए किसी जल्दी में नहीं है और यह देखने का इंतजार कर रहा है कि अन्य देश अपनी डिजिटल मुद्राओं को कैसे लागू करते हैं। CBDC के लिए सबसे तत्काल और उपयुक्त उपयोग का मामला सीमा पार भुगतान (cross-border payments) के रूप में पहचाना गया है, जो लागत और समय को काफी कम कर सकता है। इसके अतिरिक्त, National Payments Corporation of India (NPCI) ने UPI भुगतान के लिए बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण का अनावरण किया है, जिसका उद्देश्य PIN को अधिक सुरक्षित और उपयोगकर्ता के अनुकूल फिंगरप्रिंट या चेहरे की पहचान से बदलना है।
- RBI अंतरराष्ट्रीय लेनदेन में दक्षता बढ़ाने के लिए सीमा पार भुगतान को CBDC के प्राथमिक उपयोग के मामले के रूप में देखता है।
- भारत पूर्ण रिटेल CBDC रोलआउट से पहले वैश्विक मानकों और अन्य देशों द्वारा एक साथ लॉन्च का इंतजार कर रहा है।
- NPCI ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए सुरक्षा और उपयोग में आसानी में सुधार के लिए UPI के लिए बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण (फिंगरप्रिंट/चेहरा) पेश किया है।
अमेरिकी आव्रजन नीतियों में हालिया बदलाव, जिसमें नए H-1B श्रमिकों के लिए प्रस्तावित $100,000 वीजा शुल्क शामिल है, अंतरराष्ट्रीय STEM प्रतिभा, विशेष रूप से भारत से, के लिए बाधाएं पैदा कर रहे हैं। डेटा से पता चलता है कि जबकि अमेरिकी IT क्षेत्र में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है, घरेलू STEM प्रतिभा की वृद्धि मांग के साथ तालमेल नहीं रख पाई है। गैर-निवासी अमेरिका में STEM मास्टर और डॉक्टरेट डिग्री की असमान रूप से उच्च संख्या अर्जित करते हैं। जैसे-जैसे अमेरिका अपनी सीमाओं को कड़ा कर रहा है, चीन, यूके और जर्मनी जैसे देश सक्रिय रूप से इस प्रतिभा के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। यह बदलाव संभावित रूप से अमेरिका से 'ब्रेन ड्रेन' (brain drain) का कारण बन सकता है, जिससे उसकी दीर्घकालिक तकनीकी बढ़त प्रभावित होगी।
- अमेरिका विदेशी मूल की प्रतिभाओं पर बहुत अधिक निर्भर है, 2020-21 में STEM मास्टर डिग्री का 55% गैर-निवासियों ने प्राप्त किया था।
- प्रस्तावित उच्च वीजा शुल्क और प्रतिबंधात्मक नीतियां कुशल भारतीय पेशेवरों को अन्य देशों में अवसर तलाशने के लिए मजबूर कर सकती हैं।
- अमेरिका में कंप्यूटर और गणितीय व्यवसायों में 2016 और 2024 के बीच 40% की वृद्धि हुई, जो घरेलू प्रतिभा आपूर्ति से कहीं अधिक है।
भारत के पास निजी हाथों में लगभग 25,000 टन सोना है, जिसका मूल्य $2.4 ट्रिलियन है, फिर भी वह एक प्रमुख आयातक बना हुआ है, जो व्यापार घाटे में महत्वपूर्ण योगदान देता है। लेख इस 'तकिए के नीचे' छिपी संपत्ति को अनलॉक करने के लिए एक पुनर्जीवित, विश्वास-आधारित Gold Monetisation Scheme की वकालत करता है। हॉलमार्किंग केंद्रों और डिजिटल गोल्ड खातों के साथ एक पारदर्शी पारिस्थितिकी तंत्र बनाकर, सरकार बुनियादी ढांचे और नवाचार के लिए घरेलू पूंजी जुटा सकती है। यह बदलाव अस्थिर विदेशी निवेश और बाहरी ऋण पर निर्भरता को कम करेगा। सोने को एक निष्क्रिय संपत्ति से उत्पादक आर्थिक उपकरण में बदलना भारत की 'Atmanirbharta' (आत्मनिर्भरता) की यात्रा के लिए आवश्यक माना जाता है।
- भारतीय परिवारों के पास लगभग $2.4 ट्रिलियन मूल्य का सोना है, जो भारतीय बैंकों द्वारा दिए गए कुल ऋण से अधिक है।
- भारत के कुल आयात बिल में सोने के आयात की हिस्सेदारी लगभग 8% है, जिससे लगातार व्यापार घाटा बना रहता है।
- एक सफल Gold Monetisation Scheme के लिए विश्वसनीय मूल्यांकन, निर्बाध लॉजिस्टिक्स और जमाकर्ताओं के लिए कर-मुक्त प्रोत्साहन के बुनियादी ढांचे की आवश्यकता होती है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के एक हालिया पेपर से पता चलता है कि तेलंगाना में भारत में प्रति व्यक्ति UPI लेनदेन की तीव्रता सबसे अधिक है। PhonePe डेटा का उपयोग करने वाले अध्ययन से पता चलता है कि GDP के प्रतिशत के रूप में ATM नकद निकासी में लगातार गिरावट आ रही है, जो डिजिटल भुगतान की ओर बदलाव का संकेत देती है। जबकि उच्च-मूल्य वाले लेनदेन सामान्य हैं, कम-मूल्य वाले, रोजमर्रा के लेनदेन (P2M) के लिए UPI की वृद्धि peer-to-merchant भुगतान की बढ़ती हिस्सेदारी में परिलक्षित होती है। क्षेत्रीय तीव्रता दक्षिणी और पश्चिमी राज्यों में सबसे अधिक है, जिसका श्रेय शहरी केंद्रों, आर्थिक केंद्रों और रोजगार-संचालित प्रवास के उच्च स्तर को दिया जाता है, जबकि पूर्वोत्तर राज्य उच्च नकद मांग बनाए रखते हैं।
- UPI लेनदेन की तीव्रता प्रति व्यक्ति वॉल्यूम के संदर्भ में मापी जाती है, जिसमें तेलंगाना सबसे आगे है, उसके बाद कर्नाटक और आंध्र प्रदेश हैं।
- अर्थव्यवस्था में UPI उपयोग की वृद्धि और नकदी की मांग के बीच एक स्पष्ट विपरीत संबंध है।
- Peer-to-merchant (P2M) लेनदेन वॉल्यूम शेयर में तेजी से हावी हो रहे हैं, विशेष रूप से ₹500 से कम के टिकट आकार के लिए।
भारत के पास अपने demographic dividend का लाभ उठाने के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है, जिसमें कार्यशील आयु की जनसंख्या 2043 के आसपास चरम पर पहुंचने की उम्मीद है। Confederation of Indian Industry (CII) एक Integrated National Employment Policy के माध्यम से रोजगार को राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में मानने पर जोर देता है। मुख्य फोकस क्षेत्रों में उद्योग की जरूरतों और स्नातकों की रोजगार क्षमता के बीच की खाई को पाटना, कपड़ा और पर्यटन जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों का समर्थन करना और विस्तार कर रही gig economy को औपचारिक रूप देना शामिल है। लेख चार Labour Codes के समय पर कार्यान्वयन और शहरों में रोजगार संकट को दूर करने के लिए एक शहरी रोजगार गारंटी कार्यक्रम बनाने की वकालत करता है, जिससे टिकाऊ और समावेशी विकास सुनिश्चित हो सके।
- भारत अगले 25 वर्षों में अपनी कार्यशील आयु की जनसंख्या में लगभग 133 million लोगों को जोड़ेगा।
- gig economy वर्तमान में 80 लाख से 1.8 crore श्रमिकों को रोजगार देती है और 2030 तक इसके 9 crore होने का अनुमान है।
- कॉलेज के पाठ्यक्रम और उद्योग की आवश्यकताओं के बीच एक महत्वपूर्ण अंतर है, जिसके लिए कौशल-संरेखित कार्यक्रमों की आवश्यकता है।
RBI Governor Sanjay Malhotra ने उल्लेख किया कि हालांकि वैश्विक अर्थव्यवस्था ने उच्च U.S. tariffs और व्यापार प्रतिबंधों के खिलाफ आश्चर्यजनक लचीलापन दिखाया है, लेकिन जोखिम बने हुए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि U.S. President Donald Trump की प्रतिबंधात्मक व्यापार नीतियां कुछ अर्थव्यवस्थाओं में विकास को स्थायी रूप से नुकसान पहुंचा सकती हैं, क्योंकि सभी जोखिमों को अभी तक बाजारों में पूरी तरह से शामिल (priced into) नहीं किया गया है। हालांकि वास्तविक अर्थव्यवस्था पर प्रत्यक्ष प्रभाव अब तक कम रहा है, Governor ने जोर दिया कि विभिन्न देशों के बीच अलग-अलग विकास पथ आने वाले वर्षों में वास्तविक क्षमता के सापेक्ष वैश्विक प्रदर्शन में कमी ला सकते हैं।
- RBI Governor ने रेखांकित किया कि बढ़ती व्यापार अनिश्चितताओं और उच्च टैरिफ के बावजूद वैश्विक विकास उत्साहजनक बना हुआ है।
- यह चिंता है कि प्रतिबंधात्मक व्यापार नीतियां विशिष्ट कमजोर अर्थव्यवस्थाओं में स्थायी संरचनात्मक क्षति का कारण बन सकती हैं।
- वर्तमान व्यापार तनावों का पूर्ण प्रभाव अभी तक बाजार मूल्य निर्धारण या वास्तविक अर्थव्यवस्था के मेट्रिक्स में प्रतिबिंबित नहीं हुआ है।
भारत का clean energy क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है, जिसने 2024 में 24.5 GW solar capacity जोड़ी है, जिससे यह विश्व स्तर पर तीसरा सबसे बड़ा योगदानकर्ता बन गया है। हालांकि, एक महत्वपूर्ण वित्तीय सहायता की कमी (financial scaffolding gap) मौजूद है। 1.5°C pathway के अनुरूप होने के लिए, भारत को 2030 तक लगभग $1.5 trillion से $2.5 trillion की आवश्यकता है। वर्तमान प्रवाह इस लक्ष्य से कम है। लेख public finance, blended finance और partial guarantees जैसे credit enhancement instruments के माध्यम से वित्त रणनीतियों में विविधता लाने का सुझाव देता है। LIC और EPFO जैसी संस्थाओं से घरेलू संस्थागत पूंजी को अनलॉक करना, पारदर्शी carbon credit trading schemes के साथ, renewables और green hydrogen के लिए निवेश अंतर को पाटने के लिए आवश्यक है।
- भारत ने 2024 में 24.5 GW solar capacity जोड़ी, जो वैश्विक योगदान में केवल चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका से पीछे है।
- Ministry of Finance का अनुमान है कि राष्ट्रीय जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने और बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए 2030 तक $2.5 trillion की आवश्यकता है।
- जोखिम-रिटर्न प्रोफाइल में सुधार करके निजी ऋणदाताओं के लिए हरित परियोजनाओं को अधिक आकर्षक बनाने के लिए blended finance और credit enhancement instruments की आवश्यकता है।
Kautilya Economic Conclave में बोलते हुए, Finance Minister Nirmala Sitharaman ने इस बात पर जोर दिया कि cryptocurrency में नवाचार, विशेष रूप से Stablecoins, वैश्विक धन और पूंजी प्रवाह को मौलिक रूप से बदल रहे हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रों को इन नई मौद्रिक संरचनाओं के अनुकूल होना चाहिए या वैश्विक वित्तीय प्रणाली से बाहर होने का जोखिम उठाना चाहिए। जबकि RBI ने निजी virtual digital assets पर प्रतिबंध लगाने की वकालत की है, वह साथ ही अपनी स्वयं की Central Bank Digital Currency (CBDC) का परीक्षण भी कर रहा है। Stablecoins, जो अपने मूल्य को dollar या gold जैसी संपत्तियों से जोड़ते हैं, अद्वितीय नियामक चुनौतियां पेश करते हैं। भारत वर्तमान में crypto लेनदेन पर कर लगाता है लेकिन उन्हें विनियमित वित्तीय उत्पादों के रूप में वैध नहीं किया है।
- Stablecoins ऐसे crypto assets हैं जिन्हें US dollar या gold जैसी विशिष्ट संपत्ति या संपत्तियों के समूह के सापेक्ष स्थिर मूल्य बनाए रखने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- Finance Minister ने रेखांकित किया कि मौद्रिक संरचना में ये बदलाव राष्ट्रों को अनुकूलन या बहिष्कार के संबंध में बाइनरी विकल्प चुनने के लिए मजबूर करते हैं।
- Central Bank Digital Currencies (CBDCs) केंद्रीय बैंकों द्वारा जारी की जाती हैं और उनके पास आधिकारिक संप्रभु मुद्रा के समान कानूनी समर्थन होता है।