STEM प्रतिभा पर अमेरिकी वीजा नीतियों का प्रभाव और कुशल पेशेवरों के लिए वैश्विक प्रतिस्पर्धा
अमेरिकी आव्रजन नीतियों में हालिया बदलाव, जिसमें नए H-1B श्रमिकों के लिए प्रस्तावित $100,000 वीजा शुल्क शामिल है, अंतरराष्ट्रीय STEM प्रतिभा, विशेष रूप से भारत से, के लिए बाधाएं पैदा कर रहे हैं। डेटा से पता चलता है कि जबकि अमेरिकी IT क्षेत्र में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है, घरेलू STEM प्रतिभा की वृद्धि मांग के साथ तालमेल नहीं रख पाई है। गैर-निवासी अमेरिका में STEM मास्टर और डॉक्टरेट डिग्री की असमान रूप से उच्च संख्या अर्जित करते हैं। जैसे-जैसे अमेरिका अपनी सीमाओं को कड़ा कर रहा है, चीन, यूके और जर्मनी जैसे देश सक्रिय रूप से इस प्रतिभा के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। यह बदलाव संभावित रूप से अमेरिका से 'ब्रेन ड्रेन' (brain drain) का कारण बन सकता है, जिससे उसकी दीर्घकालिक तकनीकी बढ़त प्रभावित होगी।
मुख्य बिंदु
- अमेरिका विदेशी मूल की प्रतिभाओं पर बहुत अधिक निर्भर है, 2020-21 में STEM मास्टर डिग्री का 55% गैर-निवासियों ने प्राप्त किया था।
- प्रस्तावित उच्च वीजा शुल्क और प्रतिबंधात्मक नीतियां कुशल भारतीय पेशेवरों को अन्य देशों में अवसर तलाशने के लिए मजबूर कर सकती हैं।
- अमेरिका में कंप्यूटर और गणितीय व्यवसायों में 2016 और 2024 के बीच 40% की वृद्धि हुई, जो घरेलू प्रतिभा आपूर्ति से कहीं अधिक है।
- वैश्विक प्रतिस्पर्धी अमेरिका से बाहर धकेली जा रही STEM प्रतिभा को आकर्षित करने के लिए चीन के 'K visa' जैसे विशेष वीजा पेश कर रहे हैं।
परीक्षा तथ्य
- प्रस्तावित H-1B शुल्क: $100,000।
- अमेरिकी STEM मास्टर डिग्री में गैर-निवासियों की हिस्सेदारी: 55%।
- अमेरिकी कंप्यूटर/गणित नौकरियों में वृद्धि (2016-2024): 40%।
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