भारतीय रेलवे 2030 तक नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन प्राप्त करने के लिए हरित संक्रमण में तेजी ला रहा है

भारतीय रेलवे 2030 तक नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जक बनने के लिए एक बड़े बदलाव से गुजर रहा है, जो भारत के राष्ट्रीय लक्ष्य से चार दशक पहले है। प्रमुख पहलों में ब्रॉड-गेज पटरियों का 100% विद्युतीकरण, "Hydrogen for Heritage" पहल के तहत हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेनों की शुरुआत और सौर एवं पवन ऊर्जा का उपयोग शामिल है। इस बदलाव में माल ढुलाई को सड़क से रेल पर स्थानांतरित करना भी शामिल है ताकि 2030 तक रेल हिस्सेदारी को बढ़ाकर 45% किया जा सके। Sovereign green bonds और World Bank एवं IRFC के ऋण जैसे वित्तीय तंत्र इस अरबों डॉलर की डीकार्बोनाइजेशन योजना का समर्थन कर रहे हैं।

मुख्य बिंदु

  • भारतीय रेलवे का लक्ष्य विद्युतीकरण और नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण के माध्यम से 2030 तक नेट-जीरो उत्सर्जन प्राप्त करना है।
  • ब्रॉड-गेज नेटवर्क का 98% से अधिक पहले ही विद्युतीकृत हो चुका है, जिससे डीजल पर निर्भरता काफी कम हो गई है।
  • "Hydrogen for Heritage" पहल के तहत 35 हाइड्रोजन-संचालित ट्रेन सेट तैनात करने की योजना है।
  • Dedicated Freight Corridors (DFCs) से 30 वर्षों में 457 मिलियन टन CO2 को रोकने की उम्मीद है।

परीक्षा तथ्य

  • भारतीय रेलवे के लिए नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य वर्ष 2030 है।
  • सरकार ने FY2023 से ₹58,000 करोड़ मूल्य के sovereign green bonds जारी किए हैं।
  • World Bank ने जून 2022 में Rail Logistics Project के लिए 245 मिलियन डॉलर के ऋण को मंजूरी दी थी।

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