भारत में हालिया Goods and Services Tax (GST) सुधार सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतिनिधित्व करते हैं। सबसे उल्लेखनीय बदलाव व्यक्तिगत स्वास्थ्य और जीवन बीमा प्रीमियम पर GST को पूरी तरह से हटाना है, जो पहले 18% था। इसके अतिरिक्त, GST Council ने अधिकांश दवाओं पर कर घटाकर 5% कर दिया है और जीवन रक्षक दवाओं पर कर को शून्य कर दिया है। चिकित्सा उपकरणों और डायग्नोस्टिक किटों में भी कर कटौती कर उन्हें एक समान 5% स्लैब में लाया गया है। इन उपायों से अस्पतालों के लिए खरीद लागत और मरीजों के लिए अपनी जेब से होने वाले खर्च (out-of-pocket expenses) कम होने की उम्मीद है, जिससे समग्र स्वास्थ्य आपूर्ति श्रृंखला सरल हो जाएगी।
- व्यक्तिगत जीवन और स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर GST 18% से घटाकर 0% कर दिया गया है।
- आवश्यक दवाओं और जीवन रक्षक दवाओं पर कर क्रमशः 5% और 0% तक कम कर दिया गया है।
- डायग्नोस्टिक उपकरण और चिकित्सा उपकरणों पर अब 5% की समान कम दर से कर लगाया जाता है।
भारत सरकार क्रिप्टोकरेंसी को विनियमित करने के लिए एक पूर्ण विधायी ढांचा बनाने के खिलाफ झुकी हुई है, इस डर से कि वे वित्तीय क्षेत्र के लिए प्रणालीगत जोखिम पैदा कर सकते हैं। एक सरकारी दस्तावेज भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के इस दृष्टिकोण पर प्रकाश डालता है कि विनियमन के माध्यम से जोखिमों को नियंत्रित करना व्यवहार में कठिन है। जबकि अमेरिका जैसे देशों ने स्टेबलकॉइन्स (stablecoins) के लिए कानून पारित किए हैं, भारत आंशिक निगरानी को प्राथमिकता देते हुए एक सतर्क रुख बनाए हुए है। सरकार को चिंता है कि औपचारिक विनियमन सट्टा संपत्तियों को 'वैधता' प्रदान कर सकता है, जिससे संभावित रूप से वित्तीय अस्थिरता हो सकती है। इसके बजाय, ध्यान इस क्षेत्र को सक्रिय रूप से बढ़ावा दिए बिना पीयर-टू-पीयर (peer-to-peer) हस्तांतरण और विकेंद्रीकृत एक्सचेंजों की निगरानी पर बना हुआ है।
- RBI का मानना है कि क्रिप्टोकरेंसी को विनियमित करना व्यावहारिक रूप से कठिन है और यह मुख्यधारा की वित्तीय प्रणाली के लिए प्रणालीगत जोखिम पैदा करता है।
- भारत अत्यधिक सट्टा डिजिटल संपत्तियों को वैध बनाने से बचने के लिए पूर्ण नियामक ढांचे के बजाय आंशिक निगरानी को प्राथमिकता देता है।
- अमेरिका ने हाल ही में अस्थिरता को कम करने के लिए फिएट-समर्थित स्टेबलकॉइन्स (fiat-backed stablecoins) के व्यापक उपयोग की अनुमति देने वाला कानून पारित किया है।
नेपाल सरकार में बार-बार होने वाले बदलावों और प्रेषण (remittances) पर भारी निर्भरता के कारण महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना कर रहा है। 1990 के बाद से, किसी भी प्रधानमंत्री ने अपना पूर्ण कार्यकाल पूरा नहीं किया है, जिससे नीतिगत असंगति और जनता में गुस्सा पैदा हुआ है, विशेष रूप से 'Gen Z' आबादी के बीच। आर्थिक रूप से, नेपाल दुनिया का चौथा सबसे अधिक प्रेषण-निर्भर देश है, जहां व्यक्तिगत प्रेषण 1990 में GDP के 1% से बढ़कर 2024 में 33% से अधिक हो गया है। यह निर्भरता उच्च युवा बेरोजगारी (15-24 आयु वर्ग के लिए 22.7%) के कारण है, जो कई लोगों को विदेश में, मुख्य रूप से भारत, कतर और मलेशिया में काम खोजने के लिए मजबूर करती है, जो घरेलू श्रम भागीदारी को और प्रभावित करती है।
- नेपाल में 1990 के बाद से 25 नेतृत्व परिवर्तन देखे गए हैं, जिसमें प्रधानमंत्री का औसत कार्यकाल केवल 13.7 महीने रहा है।
- 2024 तक नेपाल की GDP में प्रेषण (Remittances) का हिस्सा 33% से अधिक है, जो इसे विश्व स्तर पर चौथा सबसे अधिक निर्भर देश बनाता।
- 15-24 आयु वर्ग में युवा बेरोजगारी 22.7% के उच्च स्तर पर है, जो बड़े पैमाने पर बाहरी प्रवास को बढ़ावा दे रही है।
सरकार के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान एक डिलीवरी कर्मचारी की मौत के बाद इंडोनेशिया में हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए हैं। शुरुआत में विधायकों के आवास भत्ते में बदलाव के कारण शुरू हुआ यह असंतोष आर्थिक असमानता और मितव्ययिता उपायों के खिलाफ एक व्यापक आंदोलन में बदल गया। राष्ट्रपति Prabowo Subianto के प्रशासन ने मुफ्त स्कूल भोजन जैसे प्रमुख कार्यक्रमों को वित्तपोषित करने के लिए बजट में महत्वपूर्ण कटौती की है, जिससे सार्वजनिक कार्यों और शिक्षा पर खर्च कम हो गया है। गिरते Gini coefficient के बावजूद, इंडोनेशिया विश्व स्तर पर सबसे असमान देशों में से एक बना हुआ है, जहां चार सबसे अमीर व्यक्तियों के पास नीचे के 100 मिलियन नागरिकों से अधिक संपत्ति है।
- इंडोनेशिया में विरोध प्रदर्शन 'मुफ्त भोजन' कार्यक्रम को वित्तपोषित करने के लिए सार्वजनिक सेवाओं और शिक्षा के बजट में कटौती के कारण हुए थे।
- Oxfam की रिपोर्टों के अनुसार, धन की असमानता के मामले में इंडोनेशिया विश्व स्तर पर छठे स्थान पर है।
- अशांति के कारण कैबिनेट में फेरबदल हुआ है और देश के sovereign credit profile को लेकर चिंताएं पैदा हुई हैं।
चीन वैश्विक rare earth बाजार पर हावी बना हुआ है, जो दुनिया की 60% से अधिक आपूर्ति का उत्पादन करता है और वैश्विक रिफाइनिंग क्षमता का 92% नियंत्रित करता है। Rare earth elements (REEs) 17 धातुओं का एक समूह है जो इलेक्ट्रिक वाहनों, पवन टरबाइन और रक्षा प्रणालियों सहित उच्च तकनीक अनुप्रयोगों के लिए आवश्यक हैं। हाल ही में, चीन के Ministry of Industry and Information Technology ने निष्कर्षण और रिफाइनिंग की निगरानी को केंद्रीकृत करने के लिए सख्त नियंत्रण पेश किया है। यह कदम, neodymium और dysprosium जैसे प्रमुख तत्वों पर निर्यात प्रतिबंधों के साथ, भारत और अमेरिका जैसे देशों के लिए महत्वपूर्ण चुनौतियां पैदा करता है, जो अपने हरित ऊर्जा और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों के लिए चीनी आयात पर भारी निर्भर हैं।
- चीन वैश्विक rare earths का 60% से अधिक उत्पादन करता है और दुनिया के लगभग आधे भंडार पर कब्जा रखता है।
- Rare earth elements को Light Rare Earths (LREEs) और Heavy Rare Earths (HREEs) में वर्गीकृत किया गया है।
- भारत चीन पर अत्यधिक निर्भर है, 2021 से उसके rare earth आयात का 75% से अधिक वहीं से आता है।
भारत के प्रस्तावित 'GST 2.0' का उद्देश्य कर दरों को दो मुख्य स्लैब (5% और 18%) में सरल बनाना है, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इसका सार्वजनिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। कन्फेक्शनरी और चीनी-मीठे पेय पदार्थों जैसे अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों पर कर को 12-18% से घटाकर 5% करने से अस्वास्थ्यकर उत्पादों की खपत बढ़ सकती है। यह गैर-संचारी रोगों (Non-Communicable Diseases - NCDs) से निपटने की भारत की रणनीति के विपरीत है। लेख सुझाव देता है कि कर उपचार को Front-of-Pack Labelling (FOPL) से जोड़ा जाना चाहिए। उच्च-चीनी या उच्च-वसा वाले उत्पादों पर उच्च कर (18% या अधिक) होना चाहिए, जबकि स्वस्थ विकल्पों को बेहतर आहार विकल्पों को प्रोत्साहित करने और राष्ट्रीय स्वास्थ्य परिणामों में सुधार करने के लिए कम दरों से लाभ होना चाहिए।
- प्रस्तावित GST 2.0 सरलीकरण अनजाने में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड, 'अस्वास्थ्यकर' खाद्य पदार्थों पर कर कम कर सकता है।
- उच्च-चीनी उत्पादों की लागत कम करने से भारत में Non-Communicable Diseases (NCDs) का संकट बढ़ सकता है।
- विशेषज्ञ 'health tax' मॉडल की वकालत करते हैं जहां GST दरें उत्पादों के पोषण प्रोफाइल और FOPL स्थिति पर निर्भर करती हैं।
जबकि भारत ने वित्त वर्ष 2024-25 में $81 बिलियन का सकल (gross) FDI प्रवाह देखा, विनिवेश (disinvestments) और प्रत्यावर्तन (repatriations) में भारी वृद्धि के कारण शुद्ध बरकरार पूंजी में गिरावट आई है। हालिया रुझान दीर्घकालिक रणनीतिक निवेश से अल्पकालिक लाभ-खोज की ओर बदलाव दिखाते हैं। विनिर्माण (Manufacturing), जो कभी FDI के लिए एक प्राथमिक क्षेत्र था, अब कुल प्रवाह का केवल 12% प्राप्त करता है। इसके अलावा, FDI पर अमेरिका या ब्रिटेन जैसे पारंपरिक औद्योगिक स्रोतों के बजाय सिंगापुर और मॉरीशस जैसे वित्तीय केंद्रों का तेजी से प्रभुत्व बढ़ रहा है। भारतीय फर्मों द्वारा बाहरी FDI (outward FDI) में उछाल भी घरेलू निवेश के माहौल और दीर्घकालिक आर्थिक लचीलेपन के बारे में चिंता पैदा करता है।
- शुद्ध FDI प्रवाह में गिरावट आई है क्योंकि सकल प्रवाह उच्च स्तर के विनिवेश द्वारा संतुलित हो जाता है, जो वित्त वर्ष 2024-25 में $51.4 बिलियन तक पहुंच गया।
- विनिर्माण क्षेत्र में FDI में काफी गिरावट आई है, जो अब कुल निवेश हिस्सेदारी का केवल 12% है।
- FDI का एक बड़ा हिस्सा प्रत्यक्ष औद्योगिक निवेश के बजाय सिंगापुर और मॉरीशस के माध्यम से टैक्स-कुशल मार्गों द्वारा संचालित होता है।
वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने विश्वास व्यक्त किया कि हालिया GST युक्तिकरण (rationalization), जिसमें टू-टियर टैक्स स्ट्रक्चर (5% और 18%) और 40% स्लैब की ओर कदम शामिल है, उपभोग को प्रोत्साहित करके GDP विकास को मजबूत करेगा। ₹48,000 करोड़ की अनुमानित राजस्व कमी के बावजूद, सरकार को उम्मीद है कि राजस्व उछाल (revenue buoyancy) चालू वित्त वर्ष के भीतर इस अंतर को पाट देगा। इन सुधारों का उद्देश्य टैक्स व्यवस्था को सरल बनाना है, जिससे यह एक 'जन सुधार' बन सके जो सभी नागरिकों को प्रभावित करता है। इसके अतिरिक्त, स्वास्थ्य और जीवन बीमा प्रीमियम पर GST की छूट को भारत की युवा आबादी की वित्तीय सुरक्षा का समर्थन करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में रेखांकित किया गया है।
- GST Council ने 5% और 18% के टू-टियर स्ट्रक्चर के साथ-साथ विशिष्ट वस्तुओं के लिए 40% के पीक स्लैब को मंजूरी दी।
- सरकार ने 2025-26 के लिए राजकोषीय घाटे (fiscal deficit) का अनुमान GDP का 4.4% या लगभग ₹15.69 लाख करोड़ लगाया है।
- GST 2.0 का उद्देश्य आवश्यक वस्तुओं पर टैक्स के बोझ को कम करना और घरेलू क्रय शक्ति बढ़ाने के लिए बीमा जैसी महत्वपूर्ण सेवाओं को छूट देना है।
GST Council अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था के एक नए प्रतिमान पर विचार कर रही है जिसमें कम दरें और तर्कसंगत संरचनाएं शामिल हैं। इन परिवर्तनों पर गौर करने के लिए मंत्रियों के एक समूह (GoM) का गठन किया गया था, जिसका उद्देश्य मौजूदा बहु-दर संरचना (0%, 5%, 12%, 18%, 28%) को सरल बनाना है। प्रमुख प्रस्तावों में मांग को बढ़ावा देने के लिए स्वास्थ्य और जीवन बीमा, कैंसर दवाओं और कुछ उपभोक्ता वस्तुओं पर GST कम करना शामिल है। जबकि स्वास्थ्य सेवा और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे कुछ क्षेत्र इन कदमों का स्वागत करते हैं, कपड़ा और बीमा उद्योगों जैसे अन्य ने इनपुट टैक्स क्रेडिट और बढ़ी हुई लागत के संबंध में चिंता व्यक्त की है। compensation cess को हटाना भी चर्चा का एक प्रमुख बिंदु है।
- युक्तिकरण (rationalization) प्रक्रिया का उद्देश्य वर्तमान GST संरचना की जटिलता को कम करना और आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करना है।
- प्रस्तावित कटौती में कैंसर दवाओं पर GST कम करना और संभावित रूप से कुछ बीमा प्रीमियमों को छूट देना शामिल है।
- compensation cess, जो वर्तमान में विलासिता और 'sin' वस्तुओं पर लगाया जाता है, समाप्त होने या पुनर्गठित होने वाला है।
कार्यकर्ताओं ने Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Scheme (MGNREGS) के लिए घटते केंद्रीय बजट आवंटन पर चिंता जताई है। उनका तर्क है कि कम फंडिंग से उपलब्ध काम की कमी हो रही है, जिससे यह योजना प्रभावी रूप से अपनी 2006 से पहले की स्थिति में वापस जा रही है। यह प्रवृत्ति विशेष रूप से ग्रामीण महिलाओं को प्रभावित करती है, जो MGNREGS कार्यबल का 50% से अधिक हिस्सा हैं। चालू वित्त वर्ष में, महिलाओं ने कुल व्यक्ति-दिवसों (person-days) का 56% पूरा किया। यह योजना ऐतिहासिक रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में लिंग वेतन समानता (gender pay parity) के लिए एक उपकरण रही है, जहाँ महिलाओं को पहले समान काम के लिए पुरुषों की तुलना में काफी कम वेतन मिलता था, जिससे सामाजिक समानता के लिए इसकी फंडिंग महत्वपूर्ण हो जाती है।
- भारत भर में MGNREGS परियोजनाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व कार्यबल के 50% से अधिक है।
- कम बजट आवंटन कल्याणकारी कार्यक्रम को 'भूखा' (starving) बना रहा है, जिससे काम की अनुपलब्धता हो रही है।
- MGNREGS ने पहली बार ग्रामीण महिलाओं को समान वेतन प्रदान किया, जिससे कृषि मजदूरी के अंतर को कम किया गया।
असम के Bodoland Territorial Region (BTR) में युवाओं के नेतृत्व वाली एक पहल ने 21 पारंपरिक वस्तुओं के लिए Geographical Indication (GI) पंजीकरण सफलतापूर्वक प्राप्त किया है। इनमें Dokhona जैसे स्थानीय वस्त्र, Jou Bidwi जैसे पारंपरिक मादक पेय और कृषि उत्पाद शामिल हैं। इस पहल का उद्देश्य स्वदेशी विरासत की रक्षा करना, अनधिकृत नकल को रोकना और स्थानीय शिल्प के बाजार मूल्य को बढ़ाना है। BTR सरकार ने क्षेत्र के सभी 26 समुदायों की वस्तुओं के लिए GI tags सुरक्षित करने के लिए एक विशेष अभियान शुरू किया है। इस आंदोलन का उपयोग कारीगरों को प्रशिक्षण, बुनियादी ढांचे और सीधे बाजार संपर्क के साथ सहायता प्रदान करने के लिए 'GI villages' बनाने के लिए भी किया जा रहा है।
- BTR की कुल 21 वस्तुओं को GI पंजीकरण प्राप्त हुआ है, जिनमें वस्त्र, पेय पदार्थ और वाद्य यंत्र शामिल हैं।
- GI tags नकल के खिलाफ कानूनी सुरक्षा प्रदान करते हैं और स्वदेशी समुदायों की सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने में मदद करते हैं।
- यह पहल पारंपरिक उत्पादों की निर्यात क्षमता और बाजार मूल्य बढ़ाकर ग्रामीण विकास को बढ़ावा देती है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ब्राजील के राष्ट्रपति Lula da Silva द्वारा बुलाए गए एक वर्चुअल BRICS शिखर सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। बैठक का उद्देश्य BRICS सदस्यों सहित कई देशों पर U.S. द्वारा लगाए गए एकतरफा टैरिफ के वैश्विक व्यापार प्रभाव को संबोधित करना है। जबकि भारत और ब्राजील को उच्च टैरिफ (50% तक) का सामना करना पड़ता है, चीन और दक्षिण अफ्रीका को 30% का सामना करना पड़ता है। शिखर सम्मेलन इन आर्थिक उपायों का मुकाबला करने और बहुपक्षवाद को मजबूत करने के लिए एक 'साझा योजना' बनाने का प्रयास करता है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत BRICS समूह की अध्यक्षता संभालने और अगले शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने की तैयारी कर रहा है।
- यह शिखर सम्मेलन विभिन्न BRICS देशों पर 10% से 50% तक के U.S. द्वारा लगाए गए टैरिफ की प्रतिक्रिया है।
- BRICS का विस्तार मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और UAE जैसे नए सदस्यों को शामिल करने के लिए किया गया है।
- बैठक एकतरफा आर्थिक उपायों का मुकाबला करने और बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।
56वीं GST Council की बैठक के बाद, सरकार सरलीकरण, पूर्वानुमेयता और निष्पक्षता पर ध्यान केंद्रित करते हुए 'GST 2.0' की ओर बढ़ रही है। प्रमुख सुधारों में आवश्यक वस्तुओं, जीवन रक्षक दवाओं और कपड़ा और हस्तशिल्प जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों पर कर की दरों को कम करना शामिल है। महत्वपूर्ण संस्थागत परिवर्तनों में विवादों को कुशलतापूर्वक हल करने के लिए Goods and Services Tax Appellate Tribunal (GSTAT) का संचालन शामिल है। कम मूल्य के निर्यात के लिए थ्रेशोल्ड को हटाकर और MSMEs के लिए एक सरलीकृत पंजीकरण योजना शुरू करके, सुधारों का उद्देश्य प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देना, औपचारिकता को प्रोत्साहित करना और भारत को एक विश्वसनीय वैश्विक निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करना है।
- GST 2.0 दरों को सुव्यवस्थित करने, उल्टे शुल्क ढांचे (inverted duty structures) को ठीक करने और विवाद समाधान को मजबूत करने पर केंद्रित है।
- मुकदमेबाजी के बोझ को कम करने के लिए Goods and Services Tax Appellate Tribunal (GSTAT) को क्रियान्वित किया जाएगा।
- MSMEs को तीन दिनों के भीतर अनुमोदन और कम मूल्य के निर्यात के लिए थ्रेशोल्ड को हटाने के साथ एक सरलीकृत पंजीकरण योजना से लाभ होगा।
56वीं GST Council की बैठक में उपभोग को बढ़ावा देने और कर संरचना को सरल बनाने के लिए महत्वपूर्ण 'rate rationalization' पेश किए गए। मुख्य परिवर्तनों में entry-level कारों, चिकित्सा उत्पादों और बीमा प्रीमियम पर GST कम करना शामिल है। Council 'GST 2.0' ढांचे की ओर बढ़ी, जिसका लक्ष्य कपड़ा और उर्वरक जैसे क्षेत्रों में 'inverted duty structures' को संबोधित करते हुए एक सरल दो-दर संरचना (12% और 18%) बनाना है। जबकि ऑटो और फार्मा जैसे क्षेत्रों ने इन कदमों का स्वागत किया, एयरलाइंस और हाई-एंड परिधान निर्माताओं ने उच्च स्लैब पर चिंता व्यक्त की। 'compensation cess' को हटाना संघीय राजकोषीय परिदृश्य में एक बदलाव का प्रतीक है, जिसके लिए राज्यों को वैकल्पिक राजस्व स्रोतों की तलाश करनी होगी।
- GST Council एक संघीय निकाय है जहाँ राज्य और केंद्र कर दरों और नीति सुधारों पर सहयोग करते हैं।
- बीमा प्रीमियम पर कर कटौती का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों और कम आय वाले परिवारों के बीच सामाजिक सुरक्षा और बीमा पैठ बढ़ाना है।
- दो-दर संरचना (12% और 18%) की ओर कदम का उद्देश्य अनुपालन बोझ और कर जटिलता को कम करना है।
Calcutta High Court के एक आदेश के बाद, केंद्र कथित अनियमितताओं के कारण तीन साल के अंतराल के बाद पश्चिम बंगाल में MGNREGA को फिर से शुरू करने के लिए तैयार है। हालांकि, इसे पुनर्जीवित करने में महत्वपूर्ण बाधाएं हैं, जिनमें अनिवार्य Aadhaar-Based Payment System (ABPS) और National Mobile Monitoring System (NMMS) शामिल हैं। लाखों श्रमिक, विशेष रूप से महिलाएं और हाशिए के समूह, अभी भी ABPS के अनुरूप नहीं हैं। लेख इस बात पर जोर देता है कि योजना को फिर से शुरू करने के लिए केवल 'हरी झंडी' से अधिक की आवश्यकता है; इसके लिए विश्वास-निर्माण, रसद तैयारी और प्रशासनिक मजबूती की आवश्यकता है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि तकनीकी बाधाओं के कारण कोई भी श्रमिक पीछे न छूटे।
- MGNREGA ग्रामीण परिवारों के लिए 100 दिनों के गारंटीकृत कार्य का एक महत्वपूर्ण सुरक्षा जाल प्रदान करता है।
- ₹10,000 करोड़ से अधिक की 'व्यापक अनियमितताओं' के कारण मार्च 2022 में पश्चिम बंगाल में इस योजना को रोक दिया गया था।
- ABPS और NMMS (जियो-टैग्ड फोटो) जैसी तकनीकी आवश्यकताएं सीमित डिजिटल पहुंच वाले ग्रामीण श्रमिकों के लिए बड़ी बाधाएं हैं।
Indian Ports Bill 2025 और Merchant Shipping Act 2025 का पारित होना भारत के समुद्री शासन में एक महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतीक है। हालांकि इनका उद्देश्य 1908 और 1958 के पुराने कानूनों को आधुनिक बनाना है, आलोचकों का तर्क है कि ये सुधार राज्यों की कीमत पर शक्ति का केंद्रीकरण करते हैं। नया Ports Act केंद्र को राज्य समुद्री बोर्डों को निर्देश देने की अनुमति देता है, जो संभावित रूप से सहकारी संघवाद को कमजोर करता है। Merchant Shipping Act 'आंशिक' भारतीय स्वामित्व की अनुमति देता है, जिसमें OCI और विदेशी संस्थाएं शामिल हैं, जो सुरक्षा संबंधी चिंताएं पैदा करता है। लेख ease of doing business को संघीय संतुलन और समुद्री सुरक्षा के साथ संतुलित करने के लिए सुधार का आह्वान करता है।
- Indian Ports Bill 2025 समुद्री शासन को सुव्यवस्थित करने और वैश्विक प्रथाओं के साथ संरेखित करने के लिए 1908 के अधिनियम की जगह लेता है।
- आलोचक Maritime State Development Council में शक्ति के केंद्रीकरण को उजागर करते हैं, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय मंत्री करते हैं।
- Merchant Shipping Act 2025 भारतीय ध्वज वाले जहाजों के आंशिक विदेशी स्वामित्व की अनुमति देता है।
केंद्रीय वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman की अध्यक्षता में 56th GST Council की बैठक में टैक्स संरचना को मुख्य रूप से दो स्लैब: 5% और 18% में सरल बनाने का निर्णय लिया गया। एक महत्वपूर्ण कदम में जीवन और स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों पर 18% GST को हटाना शामिल है ताकि उन्हें अधिक किफायती बनाया जा सके। तंबाकू, बड़ी कारों और नौकाओं जैसे 'sin goods' और विलासिता की वस्तुओं के लिए 40% की 'विशेष दर' पेश की जाएगी। 22 सितंबर से प्रभावी ये बदलाव दैनिक उपयोग की वस्तुओं, भोजन और जीवन रक्षक दवाओं की कीमतों को कम करने के साथ-साथ कपड़ा और उर्वरक जैसे क्षेत्रों में लंबे समय से लंबित inverted duty structure को संबोधित करने का लक्ष्य रखते हैं।
- अधिकांश वस्तुओं और सेवाओं के लिए GST संरचना को 5% और 18% स्लैब में सुव्यवस्थित किया जा रहा है।
- स्वास्थ्य और जीवन बीमा प्रीमियम अब GST से मुक्त हैं, जो 18% से घटकर 0% हो गए हैं।
- तंबाकू जैसे sin goods और नौकाओं तथा बड़ी कारों जैसी अति-विलासिता की वस्तुओं पर 40% की विशेष दर लागू होती है।
Prime Minister Narendra Modi ने Semicon India 2025 सम्मेलन में बोलते हुए, अनुमानित $1-trillion के वैश्विक semiconductor बाजार में एक महत्वपूर्ण हिस्सेदारी हासिल करने के भारत के लक्ष्य की घोषणा की। उन्होंने 'file to factory' संक्रमण को तेज करने के लिए 'तेजी से मंजूरी' और कागजी कार्रवाई को कम करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर दिया। semiconductor chips की तुलना 'digital diamonds' से करते हुए, उन्होंने 21वीं सदी के प्रमुख आर्थिक चालकों के रूप में उनकी भूमिका पर प्रकाश डाला। PM ने उल्लेख किया कि भारत ने पहली तिमाही में 7.8% GDP विकास दर हासिल की, जो वैश्विक अनिश्चितताओं और व्यापार शुल्कों के बावजूद मजबूत आर्थिक स्वास्थ्य का संकेत देती है।
- सरकार का लक्ष्य राष्ट्रीय सिंगल-विंडो सिस्टम के माध्यम से विनिर्माण शुरू करने में लगने वाले समय को कम करना है।
- 2025 में पांच नई semiconductor परियोजनाओं को मंजूरी दी गई, जिससे $18 billion के निवेश के साथ कुल संख्या दस हो गई।
- बदलती व्यापार गतिशीलता के बीच भारत खुद को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (supply chain) में एक विश्वसनीय विकल्प के रूप में स्थापित कर रहा है।
UK जनवरी 2027 तक Carbon Border Adjustment Mechanism (UK-CBAM) लागू करने के लिए तैयार है, जो स्टील और एल्युमीनियम जैसे आयात को लक्षित करेगा। यह EU के CBAM के समान है और भारतीय निर्यातकों के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती पेश करता है, जिससे संभावित रूप से लागत में 20-40% की वृद्धि हो सकती है। भारत इन प्रभावों को कम करने के लिए अपना स्वयं का Carbon Credit Trading Scheme (CCTS) विकसित कर रहा है। लेख कार्बन मूल्य निर्धारण पर वैश्विक आम सहमति की आवश्यकता पर चर्चा करता है, जिसमें निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए देश के आय स्तर के आधार पर स्तरीय मूल्य निर्धारण के साथ IMF के International Carbon Price Floor (ICPF) के प्रस्ताव का संदर्भ दिया गया है।
- UK-CBAM जनवरी 2027 से लागू किया जाएगा, जिसमें कठिन-से-कम (hard-to-abate) क्षेत्रों के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यय उत्सर्जन शामिल होंगे।
- IMF ने स्तरीय मूल्य निर्धारण के साथ International Carbon Price Floor (ICPF) का प्रस्ताव दिया: निम्न-आय के लिए $25, मध्यम-आय के लिए $50, और उच्च-आय वाले देशों के लिए $75।
- भारत का Carbon Credit Trading Scheme (CCTS) घरेलू कार्बन बाजार स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत की GDP 7.8% की दर से बढ़ी, जो RBI के 6.5% के अनुमान से अधिक है। जबकि विनिर्माण (manufacturing) क्षेत्र 7.7% की दर से बढ़ा, Index of Industrial Production (IIP) और वाहन बिक्री जैसे अन्य संकेतकों ने सुस्ती के संकेत दिए। मुख्य आर्थिक सलाहकार (Chief Economic Adviser) V. Anantha Nageswaran ने वार्षिक विकास अनुमान को 6.3%-6.8% पर बनाए रखा, जिसका अर्थ है कि अगली तिमाहियों में मंदी की उम्मीद है। आगामी GST दर कटौती और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं से संभावित राजस्व नुकसान के कारण सरकार की राजकोषीय घाटे (fiscal deficit) के लक्ष्यों को पूरा करने की क्षमता के बारे में चिंताएं बनी हुई हैं।
- Q1 GDP वृद्धि 7.8% रही, जो RBI के अगस्त के 6.5% के अनुमान से काफी अधिक थी।
- विनिर्माण क्षेत्र 7.7% की दर से बढ़ा, हालांकि Index of Industrial Production (IIP) ने 3.3% की धीमी वृद्धि दिखाई।
- मुख्य आर्थिक सलाहकार V. Anantha Nageswaran ने वार्षिक विकास अनुमान 6.3%-6.8% पर बरकरार रखा।
राजस्व विभाग और CBDT ने 'विशाल' Income Tax Act, 1961 को सरल बनाने के लिए एक व्यापक समीक्षा पूरी कर ली है। इसके परिणामस्वरूप बना Income Tax Act, 2025, कानून को अधिक स्पष्ट, संक्षिप्त और उपयोगकर्ता के अनुकूल बनाने का लक्ष्य रखता है। मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया में 26 उप-समितियां और 75,000 मानव-घंटे शामिल थे। मुख्य परिवर्तनों में अध्यायों की संख्या 47 से घटाकर 23 और धाराओं (sections) को 819 से घटाकर 536 करना शामिल है। नया अधिनियम अनावश्यक धाराओं को हटाता है, जटिल शब्दावली को सरल बनाता है, और स्पष्ट स्पष्टीकरण के लिए 57 तालिकाएं (tables) पेश करता है। संसद में पारित होने के बाद इसे 1 April, 2026 को लागू करने का कार्यक्रम है।
- नया Income Tax Act, 2025, मुकदमेबाजी को कम करने और अनुपालन में सुधार के लिए 64 साल पुराने 1961 के अधिनियम की जगह लेगा।
- धाराओं की संख्या 819 से घटाकर 536 कर दी गई है।
- मसौदा समिति ने कानून के हर पहलू की समीक्षा करने के लिए 26 उप-समितियों का उपयोग किया।
केंद्र सरकार ने युवाओं की रोजगार क्षमता और उद्यम प्रतिस्पर्धात्मकता की दोहरी चुनौती से निपटने के लिए Pradhan Mantri Viksit Bharat Rozgar Yojana (PMVBRY) शुरू की है। ₹1 lakh crore के परिव्यय के साथ, इस योजना का लक्ष्य दो वर्षों में 3.5 करोड़ नौकरियां पैदा करना है। यह पहली बार काम करने वाले कर्मचारियों (₹15,000 तक) और नियोक्ताओं (₹3,000 प्रति माह तक) को प्रत्यक्ष वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करती है। यह पहल नए श्रमिकों को उनके रोजगार के पहले दिन से सामाजिक सुरक्षा प्रणालियों से जोड़कर कार्यबल को औपचारिक बनाने पर केंद्रित है, जो व्यापक 'Viksit Bharat 2047' विजन का समर्थन करती है।
- PMVBRY औपचारिक क्षेत्र में भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए पहली बार काम करने वाले कर्मचारियों को प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) प्रदान करती है।
- यह योजना श्रमिकों के लिए प्रवेश बाधाओं को कम करती है जबकि सरकारी सब्सिडी के माध्यम से व्यवसायों के लिए भर्ती जोखिमों को कम करती है।
- भारत में सामाजिक सुरक्षा कवरेज 2015 में 19% से बढ़कर 2025 में 64.3% हो गया है, जो 94 करोड़ लाभार्थियों तक पहुंच गया है।
भारत की अर्थव्यवस्था अपनी मजबूत गति जारी रखे हुए है, वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही (Q1) में वास्तविक GDP 7.8% की दर से बढ़ रही है। विनिर्माण, सेवाओं और डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे (digital public infrastructure) के कारण देश विश्व स्तर पर 10वीं से 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। सामाजिक कल्याण में महत्वपूर्ण प्रगति देखी गई है, जिसमें 24.82 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी (multidimensional poverty) से बाहर निकले हैं। ऊर्जा क्षेत्र में, भारत अपनी शोधन क्षमता (refining capacity) का विस्तार कर रहा है और इथेनॉल सम्मिश्रण (ethanol blending) में तेजी ला रहा है, जो 15% तक पहुंच गया है। सरकार का लक्ष्य दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और आयात निर्भरता को कम करने के लिए 2030 तक तलछटी बेसिन अन्वेषण (sedimentary basin exploration) के लिए 1 मिलियन वर्ग किलोमीटर को कवर करना है।
- भारत वर्तमान में दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और 2030 तक तीसरी सबसे बड़ी बनने का अनुमान है।
- वित्त वर्ष 2025-26 की Q1 में 7.8% की वास्तविक GDP वृद्धि मजबूत घरेलू खपत और निवेश को दर्शाती है।
- Jan Dhan-Aadhaar-Mobile (JAM) ट्रिनिटी और UPI अर्थव्यवस्था को औपचारिक बनाने में सहायक रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने जापानी समकक्ष शिगेरू इशिबा के साथ जापान के सेंडाई में एक सेमीकंडक्टर प्लांट का दौरा किया, जब नई दिल्ली और टोक्यो ने महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी क्षेत्र में सहयोग को गहरा करने पर सहमति व्यक्त की। इस यात्रा ने भारत के बढ़ते सेमीकंडक्टर विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र और जापान की शक्तियों के बीच पूरकता पर प्रकाश डाला। दोनों नेताओं ने सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में सहयोग को गहरा करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की। PM मोदी ने 16 जापानी प्रान्तों के राज्यपालों से भी मुलाकात की, जिसमें India-Japan Special Strategic and Global Partnership के तहत मजबूत राज्य-प्रान्त सहयोग की वकालत की गई, जिसमें विनिर्माण, गतिशीलता, नवाचार और स्टार्ट-अप में सहयोग पर जोर दिया गया।
- PM मोदी ने अपने जापानी समकक्ष शिगेरू इशिबा के साथ जापान के सेंडाई में एक सेमीकंडक्टर प्लांट का दौरा किया।
- यह यात्रा महत्वपूर्ण सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकी क्षेत्र और आपूर्ति श्रृंखला में सहयोग को गहरा करने के लिए भारत और जापान की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।
- PM मोदी ने जापानी राज्यपालों और भारतीय राज्य सरकारों से विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने का आग्रह किया।