भारत AI शासन में एक वैश्विक नेता बनने का लक्ष्य रखता है, जो एक समावेशी और मानव-केंद्रित दृष्टिकोण का समर्थन करता है। हालांकि, यह आकांक्षा एक व्यापक, लोकतांत्रिक रूप से आधारित राष्ट्रीय AI रणनीति की अनुपस्थिति से कमजोर होती है, जिसमें IndiaAI Mission जैसी वर्तमान पहलें अपर्याप्त हैं। राष्ट्रीय प्राथमिकताओं, शासन मूल्यों और संस्थागत संरचना के बारे में अनसुलझे प्रश्न रणनीतिक निर्भरता और लोकतांत्रिक वैधता की कमी के जोखिम पैदा करते हैं। लेखक रक्षा, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे, रोजगार व्यवधान (उदाहरण के लिए, 2024 में शीर्ष IT फर्मों द्वारा 65,000 नौकरियों में कटौती), और महत्वपूर्ण ऊर्जा निहितार्थों में महत्वपूर्ण जोखिमों पर प्रकाश डालता है। खुली सार्वजनिक चर्चा और संसदीय निरीक्षण के माध्यम से विकसित एक राष्ट्रीय रणनीति, राष्ट्रीय नेतृत्व और सार्वजनिक भलाई के लिए AI का उपयोग करने के लिए महत्वपूर्ण है।
- AI शासन में नेतृत्व करने की भारत की महत्वाकांक्षा एक व्यापक, लोकतांत्रिक रूप से आधारित राष्ट्रीय AI रणनीति की कमी से बाधित है।
- IndiaAI Mission जैसी वर्तमान पहलें स्पष्ट राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और शासन ढांचे के बिना अपर्याप्त हैं।
- जोखिमों में विदेशी प्रौद्योगिकियों पर रणनीतिक निर्भरता, स्वचालन के कारण नौकरी विस्थापन, और AI की महत्वपूर्ण ऊर्जा मांगें शामिल हैं।
Global South के साथ भारत के विकास सहयोग में महत्वपूर्ण वृद्धि देखी गई है, जिसमें वित्तीय प्रवाह 2010-11 में $3 बिलियन से लगभग दोगुना होकर 2023-24 में $7 बिलियन हो गया है। हालांकि, Global South में बढ़ते संप्रभु ऋण स्तर और Official Development Assistance (ODA) में वैश्विक गिरावट के कारण विकास वित्त रणनीतियों का पुनर्मूल्यांकन आवश्यक हो गया है। यह लेख एक संतुलित दृष्टिकोण के लिए Global Development Compact (GDC) की अवधारणा पर जोर देता है और Triangular Cooperation (TrC) को Global North-South विभाजन को पाटने के लिए एक शक्तिशाली तंत्र के रूप में उजागर करता है। TrC, जिसमें पारंपरिक दाता, प्रमुख Global South देश और भागीदार देश शामिल हैं, साझा सीखने और समाधानों के सह-निर्माण को बढ़ावा देता है, जो भौतिक बुनियादी ढांचे और सामाजिक प्रगति में प्रभावकारिता प्रदर्शित करता है।
- Global South के साथ भारत के विकास सहयोग में पर्याप्त वृद्धि देखी गई है, लेकिन वैश्विक वित्तीय चुनौतियों के कारण विकास वित्त के पुनर्गठन की आवश्यकता है।
- Global Development Compact (GDC) की अवधारणा जुड़ाव के विभिन्न तरीकों में एक संतुलित दृष्टिकोण को बढ़ावा देती है।
- Triangular Cooperation (TrC) को Global North-South विभाजन को पाटने के लिए एक प्रभावी तंत्र के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिसमें साझा सीखने के लिए कई भागीदार शामिल हैं।
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की पांच देशों की यात्रा, जिसमें ब्राजील में BRICS शिखर सम्मेलन भी शामिल है, का उद्देश्य Global South के भीतर सहयोग को मजबूत करना और एक "संतुलित बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था" को बढ़ावा देना है। भारत, BRICS के संस्थापक सदस्य के रूप में, उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग के लिए इस मंच के प्रति प्रतिबद्ध है, जो एक शांतिपूर्ण, न्यायसंगत और लोकतांत्रिक वैश्विक व्यवस्था के लिए प्रयासरत है। मोदी के यात्रा कार्यक्रम में घाना, त्रिनिदाद और टोबैगो, अर्जेंटीना और नामीबिया की यात्राएं भी शामिल हैं, जहाँ वे द्विपक्षीय बैठकें करेंगे और उच्च राजकीय सम्मान प्राप्त करेंगे। इन यात्राओं से निवेश, ऊर्जा, स्वास्थ्य, क्षमता निर्माण और विकास में साझेदारी बढ़ने की उम्मीद है, जिसमें घाना का लक्ष्य अफ्रीका का "वैक्सीन हब" बनना है।
- PM मोदी की पांच देशों की यात्रा में ब्राजील में BRICS शिखर सम्मेलन शामिल है, जिसका उद्देश्य एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को बढ़ावा देना और Global South सहयोग को मजबूत करना है।
- भारत BRICS को उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में देखता है ताकि एक शांतिपूर्ण और न्यायसंगत वैश्विक व्यवस्था प्राप्त की जा सके।
- प्रधान मंत्री अपनी यात्रा के दौरान घाना और त्रिनिदाद और टोबैगो में उच्च राजकीय सम्मान प्राप्त करेंगे।
हैदराबाद में Sigachi Industries की एक फार्मा इकाई में हाल ही में हुई एक घातक दुर्घटना, जिसमें 36 लोगों की मौत हो गई, भारत के फार्मा विनिर्माण उद्योग में उच्च सुरक्षा संस्कृति की महत्वपूर्ण आवश्यकता को उजागर करती है। पदार्थ (Microcrystalline Cellulose) की सौम्य प्रकृति के बावजूद, इसके उत्पादन में जोखिम भरी प्रक्रियाएं शामिल होती हैं। लेख इस बात पर जोर देता है कि ऐसी खतरनाक इकाइयों को सक्षम कर्मचारियों द्वारा Process Hazard Analysis (HAZOP) आयोजित करना चाहिए, असामान्यताओं का पता लगाने के लिए डेटा को एकीकृत करना चाहिए, और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ऑपरेटर अच्छी तरह से प्रशिक्षित और सुरक्षा के प्रति जागरूक हों। इस क्षेत्र में बार-बार होने वाली दुर्घटनाएं, जो एक प्रमुख विदेशी मुद्रा अर्जक है, वैश्विक सुरक्षा मानदंडों का पालन करने में विफलता को रेखांकित करती हैं, जिससे भारत के व्यापार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
- हैदराबाद की एक फार्मा इकाई में हाल ही में हुई दुर्घटना, जिसमें 36 लोगों की मौत हो गई, विनिर्माण क्षेत्र में मजबूत सुरक्षा प्रोटोकॉल की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करती है।
- लेख इस बात पर प्रकाश डालता है कि सौम्य पदार्थों के साथ भी, विनिर्माण प्रक्रियाएं खतरनाक हो सकती हैं, जिसके लिए सुरक्षा प्रक्रियाओं का कड़ाई से पालन करना आवश्यक है।
- यह Process Hazard Analysis (HAZOP), असामान्यताओं का पता लगाने के लिए डेटा एकीकरण, और ऑपरेटरों के लिए निरंतर प्रशिक्षण के महत्व पर जोर देता है।
केंद्रीय कैबिनेट ने मुख्य रूप से विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए ₹99,446 करोड़ के आवंटन के साथ एक Employment-Linked Incentive (ELI) योजना को मंजूरी दी है। यह योजना पहली बार नौकरी पाने वालों (₹15,000 तक का एक महीने का वेतन) और नियोक्ताओं (दो साल के लिए प्रति माह ₹3,000 तक, विनिर्माण के लिए विस्तारित) को प्रोत्साहन प्रदान करती है। इसका लक्ष्य 3.5 करोड़ से अधिक नौकरियां पैदा करना है, जिसमें 1.92 करोड़ लाभार्थी पहली बार नौकरी पाने वाले होंगे। यह लाभ 1 अगस्त, 2025 और 31 जुलाई, 2027 के बीच सृजित नौकरियों के लिए लागू होंगे, जो युवा रोजगार और कौशल के लिए एक बड़े सरकारी पैकेज का हिस्सा है।
- केंद्रीय कैबिनेट ने विशेष रूप से विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए Employment-Linked Incentive (ELI) योजना को मंजूरी दी है।
- यह योजना अतिरिक्त रोजगार सृजित करने के लिए पहली बार नौकरी पाने वाले कर्मचारियों और नियोक्ताओं दोनों को वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करती है।
- इसका लक्ष्य 3.5 करोड़ से अधिक नौकरियां पैदा करना है, जिसमें कार्यबल में नए प्रवेशकों को एकीकृत करने पर महत्वपूर्ण ध्यान दिया गया है।
यह लेख सांस्कृतिक दुर्विनियोजन को रोकने में Geographical Indication (GI) टैग की भूमिका की पड़ताल करता है, जिसे Prada द्वारा Kolhapuri चप्पल के डिजाइनों के उपयोग से प्रेरित किया गया है। यह एक GI टैग को बौद्धिक संपदा के रूप में परिभाषित करता है जो उन वस्तुओं की पहचान करता है जिनके विशिष्ट गुण उनके भौगोलिक मूल से जुड़े होते हैं, जो ग्रामीण विकास और सांस्कृतिक संरक्षण के लिए एक शक्तिशाली विपणन उपकरण के रूप में कार्य करता है। जबकि भारत में 658 पंजीकृत GI-टैग वाले उत्पाद हैं, GI अधिकार मुख्य रूप से क्षेत्रीय होते हैं, जिसका अर्थ है कि कोई स्वचालित अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा नहीं है। लेख वैश्विक निगमों द्वारा भारतीय पारंपरिक ज्ञान, जैसे Basmati चावल, हल्दी और नीम के शोषण के ऐतिहासिक उदाहरणों पर प्रकाश डालता है, जो भविष्य के दुर्विनियोजन को रोकने के लिए Traditional Knowledge Digital Library के विस्तार जैसे तंत्रों की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
- Geographical Indication (GI) टैग उन उत्पादों की पहचान करते हैं जिनके अद्वितीय गुण उनके भौगोलिक मूल से जुड़े होते हैं, जो एक विपणन उपकरण के रूप में कार्य करते हैं और सांस्कृतिक ज्ञान को संरक्षित करते हैं।
- GI अधिकार मुख्य रूप से क्षेत्रीय होते हैं, जिसका अर्थ है कि सुरक्षा उस देश या क्षेत्र तक सीमित है जहां टैग प्रदान किया जाता है, बिना स्वचालित अंतरराष्ट्रीय मान्यता के।
- भारत में 658 पंजीकृत GI-टैग वाले उत्पाद हैं, लेकिन इसके पारंपरिक उत्पादों और ज्ञान को ऐतिहासिक रूप से वैश्विक संस्थाओं द्वारा शोषण और सांस्कृतिक दुर्विनियोजन का सामना करना पड़ा है।
यह लेख भारत में Goods and Services Tax (GST) के आठ वर्षों की समीक्षा करता है, बाजार को एकीकृत करने, आर्थिक दक्षता बढ़ाने और राष्ट्रीय राजस्व को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ावा देने में इसकी सफलता को स्वीकार करता है, जिसमें 2024-25 में संग्रह ₹22.08 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। हालांकि, यह सार्वजनिक स्वास्थ्य में एक बड़ी कमी को उजागर करता है, विशेष रूप से तंबाकू कराधान में। GST लागू होने के बाद से, तंबाकू उत्पादों पर कोई महत्वपूर्ण कर वृद्धि नहीं हुई है, जिससे उनकी सामर्थ्य बढ़ी है और सार्वजनिक स्वास्थ्य लक्ष्यों को कमजोर किया है। तंबाकू उत्पादों पर वर्तमान कर भार WHO की 75% की सिफारिश से काफी नीचे है। लेख तंबाकू पर GST दरों को अधिकतम 40% तक बढ़ाने और खपत को कम करने और राजस्व को बढ़ावा देने के लिए विशिष्ट उत्पाद शुल्क बढ़ाने की वकालत करता है।
- GST ने 2017 में अपनी शुरुआत के बाद से भारत के बाजार को सफलतापूर्वक एकीकृत किया है, आर्थिक दक्षता में सुधार किया है और राष्ट्रीय राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि की है।
- GST व्यवस्था में एक बड़ी कमी तंबाकू उत्पादों पर महत्वपूर्ण कर वृद्धि की कमी है, जिसने उन्हें अधिक किफायती बना दिया है और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयासों में बाधा डाली है।
- तंबाकू उत्पादों पर वर्तमान कर भार World Health Organization (WHO) द्वारा अनुशंसित खुदरा मूल्य के 75% से काफी कम है।