बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक सुस्पष्ट कम दबाव का क्षेत्र सोमवार सुबह तक चक्रवाती तूफान में बदलने की उम्मीद है, जिसे 'Cyclone Montha' नाम दिया गया है। इस प्रणाली के कारण चेन्नई सहित उत्तरी तमिलनाडु और आसपास के जिलों में भारी से बहुत भारी वर्षा होने की संभावना है। 'Montha' नाम थाईलैंड द्वारा उष्णकटिबंधीय चक्रवातों (tropical cyclones) के लिए क्षेत्रीय नामकरण प्रोटोकॉल के हिस्से के रूप में सुझाया गया था। Indian Coast Guard ने सुरक्षा उपाय शुरू कर दिए हैं, मछुआरों को बंदरगाहों पर लौटने की सलाह दी है और अपतटीय तेल रिग (offshore oil rigs) को सतर्क कर दिया है। Regional Meteorological Centre (RMC) ने कई जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है क्योंकि Northeast monsoon क्षेत्र में अतिरिक्त वर्षा ला रहा है।
कम दबाव की प्रणाली के 28 अक्टूबर तक चक्रवाती तूफान में बदलने से पहले डिप्रेशन और फिर डीप डिप्रेशन बनने की भविष्यवाणी की गई है।
उत्तरी हिंद महासागर क्षेत्र में उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के लिए 'Cyclone Montha' नाम थाईलैंड द्वारा प्रस्तावित किया गया था।
चेन्नई, तिरुवल्लूर, कांचीपुरम और रानीपेट सहित उत्तरी तमिलनाडु के जिलों में भारी वर्षा की उम्मीद है।
परीक्षा बिंदु
'Montha' नाम थाईलैंड द्वारा सुझाया गया था।
Regional Meteorological Centre (RMC) ने 20 सेमी तक बारिश के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया।
Northeast monsoon ने 1 अक्टूबर से तमिलनाडु में 22 सेमी बारिश की है, जो मौसमी औसत का आधा है।
आंध्र प्रदेश और राजस्थान में स्लीपर बसों से जुड़ी हालिया घातक दुर्घटनाओं ने भारतीय परिवहन उद्योग में महत्वपूर्ण सुरक्षा कमियों को उजागर किया है। जबकि प्रमुख निर्माता इंजन और चेसिस (chassis) प्रदान करते हैं, बस बॉडी का निर्माण अक्सर स्वतंत्र दुकानों में किया जाता है जहां सुरक्षा मानकों की अक्सर अनदेखी की जाती है। मुद्दों में अत्यधिक ज्वलनशील सामग्रियों का उपयोग, क्रैश टेस्टिंग की कमी और अतिरिक्त ईंधन टैंक जैसे असुरक्षित संशोधन शामिल हैं। हालांकि Automotive Industry Standards (AIS) मौजूद हैं, लेकिन बॉडी-बिल्डिंग प्रक्रिया के दौरान उनका शायद ही कभी पालन किया जाता है। लेख में व्यापक नियमों, पूरी असेंबली की अनिवार्य क्रैश टेस्टिंग और भविष्य की आग से संबंधित त्रासदियों को रोकने के लिए ड्राइवरों और यात्रियों के लिए बेहतर आपातकालीन प्रशिक्षण का आह्वान किया गया है।
स्वतंत्र दुकानों पर बनाई गई बस बॉडी में अक्सर स्थापित सुरक्षा मानदंडों का पालन करने के बजाय खराब गुणवत्ता वाली, ज्वलनशील मिश्रित सामग्री (composite materials) का उपयोग किया जाता है।
अतिरिक्त ईंधन टैंक स्थापित करना और प्रतिबंधात्मक स्लीपर व्यवस्था जैसे असुरक्षित संशोधन, आपात स्थिति के दौरान यात्रियों को बाहर निकालने में महत्वपूर्ण बाधा डालते हैं।
संरचनात्मक और अग्नि सुरक्षा के लिए वर्तमान Automotive Industry Standards (AIS) को अक्सर बॉडी-बिल्डिंग प्रक्रिया के दौरान दरकिनार कर दिया जाता है।
परीक्षा बिंदु
Automotive Industry Standards (AIS) सड़क परिवहन मंत्रालय (Ministry of Road Transport) द्वारा विकसित किए जाते हैं।
हालिया नियम बसों में चार निकास (exits) अनिवार्य करते हैं: दो मुख्य दरवाजे और दो खुलने वाली खिड़कियां (collapsible windows)।
आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले में हाल ही में हुई एक दुर्घटना में ईंधन रिसाव के कारण लगी आग से 20 लोगों की जान चली गई थी।
दूषित कफ सिरप से जुड़ी बच्चों की मौत के बाद, भारत में बाल चिकित्सा दवाओं (pediatric medicines) के नियामक ढांचे में सुधार का तत्काल आह्वान किया गया है। बच्चे 'छोटे वयस्क' नहीं हैं; दवाओं के प्रति उनकी शारीरिक प्रतिक्रियाएं काफी भिन्न होती हैं, फिर भी वर्तमान में कई खुराक वयस्कों के दिशा-निर्देशों से ही निर्धारित की जाती हैं। लेख विशिष्ट बाल चिकित्सा नैदानिक परीक्षणों (pediatric clinical trials) और Central Drugs Standard Control Organisation (CDSCO) द्वारा सख्त निगरानी की आवश्यकता पर जोर देता है। यह दवा के उपयोग की निगरानी के लिए एक समग्र ढांचे, बेहतर फार्माकोविजिलेंस (pharmacovigilance) और युवा आबादी के लिए सस्ती और सुरक्षित स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करने के लिए बच्चों के लिए WHO की Essential Medicine List को अपनाने की वकालत करता है।
बच्चों को विशिष्ट दवा फॉर्मूलेशन और खुराक की आवश्यकता होती है क्योंकि उनकी फार्माकोडायनामिक (pharmacodynamic) प्रतिक्रियाएं वयस्कों से भिन्न होती हैं।
भारतीय संविधान का Article 39(f) राज्य को यह सुनिश्चित करने का आदेश देता है कि बच्चों को शोषण से बचाया जाए और उन्हें स्वस्थ विकास के अवसर दिए जाएं।
भारत में बाल चिकित्सा दवा अनुसंधान के लिए एक विशिष्ट नीति या कानून की कमी है, जो अक्सर सामान्य दिशा-निर्देशों या वयस्कों के डेटा पर निर्भर करता है।
परीक्षा बिंदु
संविधान का Article 39(f) बाल कल्याण से संबंधित राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांत (Directive Principle of State Policy) है।
Central Drugs Standard Control Organisation (CDSCO) भारत में दवाओं के लिए प्राथमिक नियामक संस्था है।
WHO ने 2007 में बच्चों के लिए पहली Essential Medicine List (EMLc) पेश की थी।
ग्रेट निकोबार में गलाथिया खाड़ी में प्रस्तावित मेगा-पोर्ट अपनी आर्थिक व्यवहार्यता और पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर जांच के दायरे में है। समर्थकों का तर्क है कि यह भारत को एक क्षेत्रीय समुद्री केंद्र (maritime hub) बना देगा, लेकिन आलोचकों ने प्राकृतिक हिंटरलैंड (hinterland) और औद्योगिक आधार की कमी सहित महत्वपूर्ण संरचनात्मक सीमाओं की ओर इशारा किया है। कोलंबो या सिंगापुर जैसे स्थापित केंद्रों के विपरीत, ग्रेट निकोबार में आवश्यक नेटवर्क कनेक्टिविटी और फीडर लिंक की कमी है। परियोजना की सफलता प्रमुख शिपिंग लाइनों को आकर्षित करने पर निर्भर करती है, जो वर्तमान में स्थापित मार्गों को पसंद करती हैं। लेख सुझाव देता है कि रणनीतिक सैन्य हितों को पारदर्शी रूप से आगे बढ़ाया जाना चाहिए, न कि उच्च लागत वाली बुनियादी ढांचा परियोजना के लिए संदिग्ध वाणिज्यिक औचित्य के पीछे छिपाया जाना चाहिए।
गलाथिया खाड़ी में 'हिंटरलैंड' (शहरी केंद्र या औद्योगिक क्षेत्र) की कमी है, जिसका अर्थ है कि सभी कार्गो को जहाज से लाना और ले जाना होगा, जिससे परिचालन लागत काफी बढ़ जाएगी।
परियोजना को कोलंबो, सिंगापुर और केरल के नए विझिंजम (Vizhinjam) बंदरगाह जैसे स्थापित ट्रांसशिपमेंट केंद्रों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है।
सफल ट्रांसशिपमेंट हब के लिए गहरे वाहक संबंधों और एकीकृत लॉजिस्टिक्स की आवश्यकता होती है, जो वर्तमान में ग्रेट निकोबार योजना में अनुपस्थित हैं।
परीक्षा बिंदु
गलाथिया खाड़ी भारतीय मुख्य भूमि से लगभग 1,200 किलोमीटर दूर स्थित है।
परियोजना का लक्ष्य कोलंबो की वर्तमान आठ मिलियन Twenty-foot Equivalent Units (TEUs) से काफी अधिक क्षमता हासिल करना है।
विझिंजम (केरल) और वधावन (महाराष्ट्र) भारत की समुद्री रणनीति के हिस्से के रूप में उल्लिखित अन्य प्रमुख बंदरगाह परियोजनाएं हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर 31 अक्टूबर को गुजरात के केवडिया में राष्ट्रीय एकता दिवस (Rashtriya Ekta Diwas) परेड का नेतृत्व करेंगे। 'विविधता में एकता' विषय पर आधारित इस कार्यक्रम में CRPF और BSF सहित विभिन्न सुरक्षा बलों द्वारा परेड की जाएगी। पहली बार, परेड में रामपुर हाउंड्स और मुधोल हाउंड्स जैसी स्वदेशी कुत्तों की नस्लों की एक मार्चिंग टुकड़ी शामिल होगी। यह उत्सव 562 रियासतों के स्वतंत्र भारत में एकीकरण में पटेल की महत्वपूर्ण भूमिका की याद दिलाता है। 31 अक्टूबर पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि भी है।
भारत के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की विरासत को सम्मानित करने के लिए हर साल 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया जाता है।
2024 का उत्सव विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह 'भारत के लौह पुरुष' की 150वीं जयंती है।
परेड में सीमाओं पर गश्त के लिए BSF द्वारा उपयोग की जाने वाली स्वदेशी कुत्तों की नस्लों (रामपुर और मुधोल हाउंड्स) का प्रदर्शन किया जाएगा।
परीक्षा बिंदु
31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस (National Unity Day) के रूप में मनाया जाता है।
सरदार पटेल को 562 रियासतों को भारतीय संघ में एकीकृत करने का श्रेय दिया जाता है।
Statue of Unity, जहाँ यह कार्यक्रम आयोजित किया जाता है, का उद्घाटन 2018 में केवडिया, गुजरात में किया गया था।
केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने ज्ञान भारतम मिशन शुरू किया है, जो भारत की पांडुलिपियों (manuscripts) के व्यापक संग्रह की पहचान, दस्तावेजीकरण, संरक्षण और डिजिटलीकरण के उद्देश्य से एक प्रमुख पहल है। यह मिशन इस विरासत को विश्व स्तर पर साझा करने के लिए एक National Digital Repository (NDR) स्थापित करेगा। परियोजना को लागू करने के लिए, मंत्रालय भारत भर के लगभग 20 संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापन (MoUs) पर हस्ताक्षर कर रहा है, जिनमें Asiatic Society और कश्मीर विश्वविद्यालय शामिल हैं। इन संस्थानों को क्लस्टर केंद्रों या स्वतंत्र केंद्रों के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा। हाल के केंद्रीय बजट (Union Budget) में घोषित इस मिशन का उद्देश्य एक समर्पित डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाना और प्राचीन ग्रंथों के पेशेवर संरक्षण और अनुसंधान को बढ़ावा देना है।
ज्ञान भारतम मिशन भारत के प्राचीन ज्ञान के नुकसान को रोकने के लिए पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण और संरक्षण पर केंद्रित है।
भारत की पांडुलिपि विरासत तक दुनिया भर में पहुंच प्रदान करने के लिए एक National Digital Repository (NDR) बनाई जाएगी।
इस मिशन में चेन्नई में सरकारी ओरिएंटल पांडुलिपि पुस्तकालय और प्रयागराज में साहित्य सम्मेलन सहित संस्थानों का एक नेटवर्क शामिल है।
परीक्षा बिंदु
इस मिशन की घोषणा चालू वर्ष के केंद्रीय बजट (Union Budget) के दौरान की गई थी।
National Digital Repository (NDR) डिजिटल पांडुलिपियों को साझा करने का केंद्रीय मंच है।
भाग लेने वाले संस्थानों में Asiatic Society (कोलकाता) और कश्मीर विश्वविद्यालय (श्रीनगर) शामिल हैं।
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