बाल चिकित्सा दवाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना: भारत के बच्चों के लिए एक मजबूत नियामक ढांचे (Regulatory Framework) की आवश्यकता

दूषित कफ सिरप से जुड़ी बच्चों की मौत के बाद, भारत में बाल चिकित्सा दवाओं (pediatric medicines) के नियामक ढांचे में सुधार का तत्काल आह्वान किया गया है। बच्चे 'छोटे वयस्क' नहीं हैं; दवाओं के प्रति उनकी शारीरिक प्रतिक्रियाएं काफी भिन्न होती हैं, फिर भी वर्तमान में कई खुराक वयस्कों के दिशा-निर्देशों से ही निर्धारित की जाती हैं। लेख विशिष्ट बाल चिकित्सा नैदानिक परीक्षणों (pediatric clinical trials) और Central Drugs Standard Control Organisation (CDSCO) द्वारा सख्त निगरानी की आवश्यकता पर जोर देता है। यह दवा के उपयोग की निगरानी के लिए एक समग्र ढांचे, बेहतर फार्माकोविजिलेंस (pharmacovigilance) और युवा आबादी के लिए सस्ती और सुरक्षित स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करने के लिए बच्चों के लिए WHO की Essential Medicine List को अपनाने की वकालत करता है।

मुख्य बिंदु

  • बच्चों को विशिष्ट दवा फॉर्मूलेशन और खुराक की आवश्यकता होती है क्योंकि उनकी फार्माकोडायनामिक (pharmacodynamic) प्रतिक्रियाएं वयस्कों से भिन्न होती हैं।
  • भारतीय संविधान का Article 39(f) राज्य को यह सुनिश्चित करने का आदेश देता है कि बच्चों को शोषण से बचाया जाए और उन्हें स्वस्थ विकास के अवसर दिए जाएं।
  • भारत में बाल चिकित्सा दवा अनुसंधान के लिए एक विशिष्ट नीति या कानून की कमी है, जो अक्सर सामान्य दिशा-निर्देशों या वयस्कों के डेटा पर निर्भर करता है।
  • World Health Organization (WHO) ने भारत में निर्मित दूषित कफ सिरप के संबंध में कई चेतावनियां जारी की हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर मौतें हुई हैं।

परीक्षा तथ्य

  • संविधान का Article 39(f) बाल कल्याण से संबंधित राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांत (Directive Principle of State Policy) है।
  • Central Drugs Standard Control Organisation (CDSCO) भारत में दवाओं के लिए प्राथमिक नियामक संस्था है।
  • WHO ने 2007 में बच्चों के लिए पहली Essential Medicine List (EMLc) पेश की थी।

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