हिजाब पहनना मुस्लिम महिलाओं के लिए 'आवश्यक धार्मिक प्रथा' नहीं, Allahabad High Court का फैसला
Allahabad High Court ने फैसला सुनाया कि सिर पर स्कार्फ पहनना इस्लाम में 'आवश्यक धार्मिक प्रथा' नहीं है, एक मुस्लिम छात्रा की स्कूल यूनिफॉर्म के साथ हिजाब पहनने की याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि विवाद मुख्य रूप से संस्थागत ड्रेस कोड के अनुपालन से संबंधित था, न कि आस्था की स्वतंत्रता से। इसने इस बात पर प्रकाश डाला कि पहले स्कार्फ पहनने से स्कूल को अपनी यूनिफॉर्म नीति बदलने के लिए मजबूर करने का कोई प्रवर्तनीय अधिकार नहीं बनता है। यह फैसला Bombay और Karnataka High Courts के पूर्व निर्णयों पर आधारित था, जिसमें इस बात पर जोर दिया गया कि संस्थागत अनुशासन का पालन आवश्यक और उचित है, और हर धार्मिक प्रथा को स्वचालित रूप से संवैधानिक संरक्षण नहीं मिलता है।
मुख्य बिंदु
- Allahabad High Court ने माना कि सिर पर स्कार्फ पहनना इस्लाम में मुस्लिम महिलाओं के लिए एक आवश्यक धार्मिक प्रथा नहीं है।
- अदालत ने जोर दिया कि यह मामला संस्थागत ड्रेस कोड के अनुपालन के बारे में था, न कि धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के बारे में।
- पहले सिर पर स्कार्फ पहनने से स्कूल की यूनिफॉर्म नीति को बदलने का कोई प्रवर्तनीय अधिकार स्थापित नहीं होता है।
- यह फैसला इस सिद्धांत को पुष्ट करता है कि यूनिफॉर्म सहित संस्थागत अनुशासन आवश्यक और उचित है।
- यह फैसला इसी तरह के हिजाब मामलों पर Bombay और Karnataka High Courts के पिछले निर्णयों के अनुरूप है।
परीक्षा तथ्य
- यह फैसला Allahabad High Court द्वारा सुनाया गया था।
- छात्रा की याचिका ने संविधान के Articles 14 और 19(1)(a) के तहत मौलिक अधिकारों का आह्वान किया था।
- अदालत ने Bombay High Court और Karnataka High Court के निर्णयों पर भरोसा किया।
- इस मामले में Tagore Public School, Prayagraj की कक्षा 11 की एक छात्रा शामिल थी।
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