राष्ट्रपति ने पेपर लीक मामलों में त्वरित सुनवाई के लिए संशोधित विधेयक को मंजूरी दी

राष्ट्रपति Droupadi Murmu ने Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026 को अपनी सहमति दे दी है, जिससे यह कानून बन गया है। यह संशोधित कानून राज्यों को त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतें स्थापित करने का अधिकार देता है और सार्वजनिक परीक्षा प्रश्न पत्र लीक में शामिल लोगों के लिए दंड बढ़ाता है। अब जांच दो महीने के भीतर और आरोप पत्र दाखिल होने के तीन महीने के भीतर सुनवाई पूरी करनी होगी। कानून अपराधियों के लिए पांच से दस साल की जेल और ₹50 लाख तक के जुर्माने का प्रावधान करता है, जिसका उद्देश्य परीक्षा में कदाचार पर अंकुश लगाना और निष्पक्ष चयन सुनिश्चित करना है।

मुख्य बिंदु

  • Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026 को राष्ट्रपति की सहमति मिल गई है।
  • कानून पेपर लीक मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतों को अनिवार्य करता है।
  • जांच दो महीने के भीतर और सुनवाई तीन महीने के भीतर पूरी करनी होगी।
  • दंड में 5-10 साल की जेल और ₹50 लाख तक का जुर्माना शामिल है।
  • कानून का उद्देश्य परीक्षा में कदाचार को रोकना और चयन में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।

परीक्षा तथ्य

  • कानून का नाम: Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026।
  • जांच की समय सीमा: दो महीने।
  • सुनवाई पूरी करने की समय सीमा: तीन महीने (आरोप पत्र दाखिल होने से)।
  • जेल की शर्तें: न्यूनतम पांच साल, अधिकतम दस साल।
  • जुर्माना: ₹50 लाख तक।

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