भारत सरकार ने नागरिक परमाणु सुविधाओं के संचालन और निर्माण में सुधार के लिए SHANTI Bill पेश किया है। 2047 तक 100 GW परमाणु क्षमता का लक्ष्य रखते हुए, यह Bill घरेलू निजी पूंजी को परमाणु ऊर्जा गतिविधियों में भाग लेने की अनुमति देता है, जो पहले केवल सरकारी संस्थाओं तक सीमित थी। जबकि इसका उद्देश्य नए प्रवेशकों के लिए लेनदेन लागत को कम करना और कानूनी अस्पष्टताओं को स्पष्ट करना है, दायित्व ढांचे (liability framework) और नियामक की स्वतंत्रता के बारे में चिंताएं बनी हुई हैं। यह Bill संवेदनशील ईंधन चक्रों (fuel cycles) को राज्य के नियंत्रण में रखता है लेकिन बड़े पैमाने पर पूंजी जुटाने के लिए प्लांट डिलीवरी और आपूर्ति श्रृंखलाओं को निजी खिलाड़ियों के लिए खोलता है।
सरकार का लक्ष्य 2047 तक 100 GW परमाणु क्षमता हासिल करना है, जिसमें 2033 तक पांच स्वदेशी small modular reactors शामिल हैं।
SHANTI Bill घरेलू निजी पूंजी को लाइसेंस के माध्यम से नागरिक परमाणु सुविधाओं के निर्माण और संचालन की अनुमति देता है।
परमाणु प्रसार को रोकने के लिए संवेदनशील ईंधन चक्र (fuel cycles) राज्य के नियंत्रण में रहेंगे।
परीक्षा बिंदु
परमाणु क्षमता लक्ष्य: 2047 तक 100 GW।
परमाणु घटना के लिए अधिकतम ऑपरेटर दायित्व: ₹3,000 करोड़।
परमाणु ऊर्जा वर्तमान में भारत की बिजली में लगभग 3% का योगदान देती है।
Trump प्रशासन की National Security Strategy (NSS) एक व्यापारिक 'America First' दृष्टिकोण की ओर बदलाव का संकेत देती है, जिससे यूरोप के लिए अस्तित्व का संकट पैदा हो गया है। यह दस्तावेज युद्ध के बाद की नियम-आधारित व्यवस्था को चुनौती देता है और NATO सहयोगियों की अमेरिकी सुरक्षा पर निर्भरता के लिए उनकी आलोचना करता है। यूरोप के पास तीन विकल्प हैं: इस बदलाव को अनदेखा करना, अमेरिकी प्रशासन को खुश करने का प्रयास करना, या स्वतंत्र रक्षा क्षमताएं विकसित करना। NSS व्यापार असंतुलन पर जोर देता है और यूरोप को एक सहयोगी के बजाय एक समस्या के रूप में देखता है, जिससे नियम-आधारित प्रणाली के टूटने पर अंतरराष्ट्रीय संबंधों में 'Hobbesian free-for-all' की स्थिति पैदा हो सकती है।
NSS एक MAGA-शैली की व्यापारिक स्थिति को दर्शाता है जो व्यापार असंतुलन और राष्ट्रीय संप्रभुता पर केंद्रित है।
नए अमेरिकी सुरक्षा ढांचे में यूरोप को एक पारंपरिक सहयोगी के बजाय एक रणनीतिक समस्या के रूप में देखा जाता है।
यह रणनीति युद्ध के बाद की व्यापारिक व्यवस्था और WTO जैसे अंतरराष्ट्रीय संस्थानों को चुनौती देती है।
परीक्षा बिंदु
NATO का Hague Summit: जून 2025।
यूरोपीय देश सैन्य खर्च को GDP के 5% तक बढ़ाने पर सहमत हुए।
NSS एक Congress-mandated दस्तावेज है जो राष्ट्रीय रक्षा रणनीति की दिशा तय करता है।
अदीस अबाबा की यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री Abiy Ahmed Ali द्वारा 'The Great Honour Nishan of Ethiopia' से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार भारत और इथियोपिया के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने में श्री मोदी की महत्वपूर्ण भूमिका को मान्यता देता है। आपसी हित के मुद्दों पर उच्च स्तरीय चर्चा के बाद, दोनों देशों ने अपने संबंधों को 'strategic partnership' के स्तर पर उन्नत किया। यह कदम भारत और पूर्वी अफ्रीकी राष्ट्र के बीच राजनयिक और आर्थिक सहयोग को गहरा करने का प्रतीक है, जो अफ्रीकी महाद्वीप तक भारत की पहुंच में एक मील का पत्थर है।
PM मोदी को इथियोपिया का सर्वोच्च पुरस्कार, 'The Great Honour Nishan of Ethiopia' प्राप्त हुआ।
भारत और इथियोपिया ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को strategic partnership में बदल दिया।
यह पुरस्कार इथियोपिया के साथ राजनयिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने में भारत के प्रयासों को मान्यता देता है।
परीक्षा बिंदु
पुरस्कार का नाम: 'The Great Honour Nishan of Ethiopia'।
केंद्र सरकार ने दो दशक पुराने MGNREGA को बदलने के लिए Viksit Bharat Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission (Gramin) (VB-G RAM G) Bill, 2025 पेश किया है। सरकार का दावा है कि नया Bill गांवों में 'राम राज्य' बनाने के गांधीवादी आदर्शों के अनुरूप है। हालांकि, विपक्षी नेताओं ने कड़ा विरोध किया है, उनका तर्क है कि यह Bill गरीबों के मांग-आधारित रोजगार अधिकारों को कमजोर करता है और मूल अधिनियम की अधिकार-आधारित संरचना को खत्म करता है। केंद्र की फंडिंग हिस्सेदारी 90% से घटाकर 60% करने पर भी चिंता जताई गई है, जिससे राज्य के वित्त पर बोझ पड़ सकता है।
VB-G RAM G Bill, 2025 का उद्देश्य Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act (MGNREGA) को बदलना है।
Bill केंद्र और राज्यों के बीच फंडिंग अनुपात को 90:10 से बदलकर 60:40 करने का प्रस्ताव करता है।
विपक्ष का दावा है कि Bill ग्रामीण रोजगार की 'मांग-आधारित' प्रकृति को हटा देता है और दायित्व राज्यों पर डाल देता है।
परीक्षा बिंदु
Bill का नाम: Viksit Bharat Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission (Gramin) Bill, 2025।
प्रस्तावित फंडिंग बदलाव: केंद्र की हिस्सेदारी 90% से घटाकर 60% की गई।
MGNREGA मूल रूप से एक मांग-आधारित रोजगार गारंटी अधिनियम था।
केंद्र सरकार ने Viksit Bharat Shiksha Adhishthan (VBSA) Bill, 2025 पेश किया है, जो भारत के उच्च शिक्षा नियामक ढांचे में सुधार करना चाहता है। यह Bill UGC, AICTE और NCTE को एक एकल शीर्ष आयोग, VBSA से बदलने का प्रस्ताव करता है। एक प्रमुख विशेषता तीन भूमिकाओं का पृथक्करण है: विनियमन (regulation), प्रत्यायन (accreditation) और मानक-निर्धारण (standards-setting)। महत्वपूर्ण रूप से, यह Bill नियामक प्राधिकरण से अनुदान वितरण (grant-disbursal) की शक्तियां छीन लेता है और उन्हें शिक्षा मंत्रालय के सीधे नियंत्रण में रखता है। जबकि अधिकारियों का दावा है कि यह हितों के टकराव को कम करता है, आलोचकों को बढ़ते राजनीतिक प्रभाव और संस्थागत स्वायत्तता के नुकसान का डर है।
VBSA Bill UGC, AICTE और NCTE को एक एकल शीर्ष आयोग से बदल देता है।
यह उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए विनियमन, प्रत्यायन और मानक-निर्धारण की भूमिकाओं को अलग करता है।
अनुदान वितरण की शक्ति नियामक से हटाकर सीधे शिक्षा मंत्रालय के नियंत्रण में कर दी गई है।
परीक्षा बिंदु
Bill का नाम: Viksit Bharat Shiksha Adhishthan Bill, 2025।
प्रतिस्थापित करता है: University Grants Commission (UGC), AICTE और NCTE।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में 'Param Vir Dirgha' का उद्घाटन किया, जिसमें सभी 21 परमवीर चक्र विजेताओं के चित्र प्रदर्शित हैं। इस पहल का उद्देश्य भारतीय राष्ट्रीय नायकों को सम्मानित करना और औपनिवेशिक मानसिकता को त्यागना है। औपनिवेशिक विरासत को खत्म करने के लिए एक संबंधित कदम में, सरकार ने कई स्थानों का नाम बदल दिया है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की राजधानी पोर्ट ब्लेयर का नाम बदलकर श्री विजया पुरम कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त, द्वीप समूह के 21 द्वीपों का नाम परमवीर चक्र विजेताओं के नाम पर रखा गया है, और मुगल गार्डन का नाम पहले ही बदलकर अमृत उद्यान कर दिया गया था।
'Param Vir Dirgha' गैलरी में सभी 21 परमवीर चक्र विजेताओं की वीरता को सम्मानित करने के लिए उनके चित्र हैं।
औपनिवेशिक विरासत को छोड़ने और भारतीय विरासत को अपनाने के लिए पोर्ट ब्लेयर का नाम बदलकर श्री विजया पुरम कर दिया गया है।
रॉस द्वीप का नाम बदलकर नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप और नील द्वीप का नाम शहीद द्वीप कर दिया गया।
परीक्षा बिंदु
पोर्ट ब्लेयर का नया नाम: 2024 में श्री विजया पुरम।
रॉस द्वीप का नया नाम: 2018 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप।
भारतीय सेना को तीन AH-64E Apache लड़ाकू हेलीकॉप्टरों का अंतिम जत्था प्राप्त हुआ है, जिससे उसका छह-इकाइयों वाला बेड़ा पूरा हो गया है। इन हेलीकॉप्टरों को पश्चिमी मोर्चे पर परिचालन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए जोधपुर, राजस्थान में 451 Army Aviation Squadron में तैनात किया जाएगा। फरवरी 2020 में संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ हस्ताक्षरित 600 मिलियन डॉलर का सौदा सेना के समर्पित Apache स्क्वाड्रन के पूर्ण संचालन को सुनिश्चित करता है। AH-64E Apache को दुनिया का सबसे उन्नत मल्टी-रोल लड़ाकू हेलीकॉप्टर माना जाता है, जो सेना की हवाई युद्ध क्षमताओं को महत्वपूर्ण बढ़ावा देता है।
भारतीय सेना को अमेरिका से अनुबंधित छह AH-64E Apache हेलीकॉप्टरों में से अंतिम तीन प्राप्त हुए।
हेलीकॉप्टर जोधपुर, राजस्थान में 451 Army Aviation Squadron में स्थित होंगे।
600 मिलियन डॉलर का यह सौदा फरवरी 2020 में संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ किया गया था।
भारतीय रुपया अपने नए सर्वकालिक निचले स्तर पर पहुंच गया, जो अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 91 के स्तर को पार कर 91.14 हो गया। यह इसे इस साल विश्व स्तर पर सबसे कमजोर प्रमुख मुद्रा और 2025 के लिए एशिया में सबसे कमजोर बनाता है। इस दबाव के कारकों में भारत-अमेरिका व्यापार सौदे पर अनिश्चितता, वैश्विक व्यापक आर्थिक स्थितियां और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) द्वारा महत्वपूर्ण पूंजी निकासी शामिल है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि RBI निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता का समर्थन करने के लिए कुछ मूल्यह्रास (depreciation) की अनुमति दे सकता है, क्योंकि भारत की वृद्धि मजबूत बनी हुई है और मुद्रास्फीति नियंत्रित है।
इंट्राडे ट्रेड के दौरान रुपया डॉलर के मुकाबले 91.14 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक गिर गया।
व्यापार अनिश्चितताओं और पूंजी निकासी के कारण यह वर्तमान में 2025 में सबसे कमजोर एशियाई मुद्रा है।
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने दिसंबर के पहले दो हफ्तों में लगभग 2.7 बिलियन डॉलर निकाले।
परीक्षा बिंदु
रुपये का रिकॉर्ड निचला स्तर: 91.14 प्रति डॉलर।
FPI निकासी: दिसंबर 2025 की शुरुआत में $2.7 बिलियन।
रुपया इस साल विश्व स्तर पर सबसे कमजोर प्रमुख मुद्रा है।
लोकसभा ने बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की सीमा को 74% से बढ़ाकर 100% करने के लिए एक ऐतिहासिक Bill पारित किया है। इस कदम का उद्देश्य पूंजी निवेश को सुगम बनाना, बेहतर तकनीक लाना और बीमा उत्पादों में सुधार करना है। यह Bill बीमा नियामक, IRDAI को बीमाकर्ताओं और मध्यस्थों से गलत तरीके से प्राप्त लाभ को वापस लेने (disgorge) का अधिकार भी देता है। इसके अतिरिक्त, यह कानूनी अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए मध्यस्थों पर अधिकतम जुर्माने को ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹10 करोड़ करता है। इस सुधार से भारत में और अधिक वैश्विक पुनर्बीमाकर्ताओं (reinsurers) के आने और सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियों के मजबूत होने की उम्मीद है।
पूंजी और तकनीक को बढ़ावा देने के लिए बीमा क्षेत्र में FDI को 74% से बढ़ाकर 100% कर दिया गया है।
IRDAI को अब गलत तरीके से प्राप्त लाभ को वापस लेने और गैर-अनुपालन के लिए उच्च दंड लगाने का अधिकार है।
बीमा मध्यस्थों पर अधिकतम जुर्माना बढ़ाकर ₹10 करोड़ कर दिया गया है।
परीक्षा बिंदु
FDI सीमा में वृद्धि: 74% से 100%।
मध्यस्थों पर अधिकतम जुर्माना: ₹10 करोड़।
विदेशी पुनर्बीमा शाखाओं के लिए नेट ओन्ड फंड (net owned fund) की आवश्यकता ₹5,000 करोड़ से घटाकर ₹1,000 करोड़ की गई।
माओवादी उग्रवाद में गिरावट के बावजूद, Fifth Schedule क्षेत्रों में प्रभावी शासन एक चुनौती बना हुआ है। आंदोलन के मूल कारण—अल्पविकास, संरचनात्मक बहिष्कार और प्रतिनिधित्व की कमी—अभी भी बने हुए हैं। जबकि संविधान Tribal Advisory Councils और PESA (Panchayat Extension to Scheduled Areas Act) का प्रावधान करता है, उनका कार्यान्वयन कमजोर रहा है। आदिवासी भूमि के अलगाव और प्रशासनिक इकाइयों में स्थानीय प्रतिनिधित्व की कमी ने शिकायतों को हवा दी है। भविष्य के शासन को स्थानीय स्तर पर अनिवार्य कोटा, सार्वजनिक संस्थानों में विश्वास बहाल करने और यह सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए कि स्वशासी निकायों के पास स्थानीय संसाधनों पर वास्तविक शक्ति हो।
माओवादी उग्रवाद की जड़ें अल्पविकास, संरचनात्मक बहिष्कार और आदिवासी प्रतिनिधित्व की कमी में हैं।
Fifth Schedule और PESA आदिवासी शासन के लिए प्रमुख संवैधानिक उपकरण हैं लेकिन कार्यान्वयन अंतराल का सामना करते हैं।
भूमि अधिग्रहण के संबंध में PESA का उल्लंघन आदिवासी शिकायतों का एक प्रमुख स्रोत रहा है।
परीक्षा बिंदु
PESA Act: 1996।
Fifth Schedule क्षेत्र: मध्य और पूर्वी भारत में स्थित।
विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट (2008) ने प्राकृतिक संसाधनों की उपेक्षा को खराब शासन से जोड़ा।
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