Viksit Bharat Shiksha Adhishthan Bill: उच्च शिक्षा में नियामक से फंडिंग को अलग करना

केंद्र सरकार ने Viksit Bharat Shiksha Adhishthan (VBSA) Bill, 2025 पेश किया है, जो भारत के उच्च शिक्षा नियामक ढांचे में सुधार करना चाहता है। यह Bill UGC, AICTE और NCTE को एक एकल शीर्ष आयोग, VBSA से बदलने का प्रस्ताव करता है। एक प्रमुख विशेषता तीन भूमिकाओं का पृथक्करण है: विनियमन (regulation), प्रत्यायन (accreditation) और मानक-निर्धारण (standards-setting)। महत्वपूर्ण रूप से, यह Bill नियामक प्राधिकरण से अनुदान वितरण (grant-disbursal) की शक्तियां छीन लेता है और उन्हें शिक्षा मंत्रालय के सीधे नियंत्रण में रखता है। जबकि अधिकारियों का दावा है कि यह हितों के टकराव को कम करता है, आलोचकों को बढ़ते राजनीतिक प्रभाव और संस्थागत स्वायत्तता के नुकसान का डर है।

मुख्य बिंदु

  • VBSA Bill UGC, AICTE और NCTE को एक एकल शीर्ष आयोग से बदल देता है।
  • यह उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए विनियमन, प्रत्यायन और मानक-निर्धारण की भूमिकाओं को अलग करता है।
  • अनुदान वितरण की शक्ति नियामक से हटाकर सीधे शिक्षा मंत्रालय के नियंत्रण में कर दी गई है।
  • Bill को आगे के विचार-विमर्श के लिए संसद की 31 सदस्यीय संयुक्त समिति (joint committee) के पास भेजा गया है।

परीक्षा तथ्य

  • Bill का नाम: Viksit Bharat Shiksha Adhishthan Bill, 2025।
  • प्रतिस्थापित करता है: University Grants Commission (UGC), AICTE और NCTE।
  • भेजा गया: संसद की 31 सदस्यीय संयुक्त समिति को।

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