करेंट अफेयर्स

करेंट अफेयर्स — 12 दिसंबर 2025

12 दिसंबर 2025

कर्नाटक का Hate Speech and Hate Crimes Bill: Free Speech और दुरुपयोग पर चिंताएं

Karnataka Hate Speech and Hate Crimes (Prevention) Bill, 2025 का उद्देश्य वैमनस्य भड़काने वाले Hate Speech को परिभाषित करना और दंडित करना है। हालांकि, आलोचकों का तर्क है कि "सद्भाव" और "दुर्भावना" जैसी अवधारणाओं की अस्पष्ट परिभाषाओं के कारण यह Free Speech और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के लिए खतरा पैदा करता है। विधेयक की व्यापक प्रकृति राज्य द्वारा दुरुपयोग और एक ऐसी स्थिति की ओर ले जा सकती है जहां सरकार तय करेगी कि कौन सा भाषण स्वीकार्य है। हालांकि Hate Speech एक वास्तविक मुद्दा है, लेकिन मौजूदा कानूनों को पर्याप्त माना जाता है, और नया विधेयक सामाजिक भलाई के समाधान के बजाय एक "अधिनायकवादी" (totalitarian) उपकरण बनने का जोखिम उठाता है। लेख चेतावनी देता है कि ऐसे कानून अक्सर नफरत फैलाने वालों को राजनीतिक शक्ति से पुरस्कृत करते हैं।

  • विधेयक धर्म, नस्ल, जाति या लिंग के आधार पर नफरत भड़काने वाले कृत्यों को दंडित करने का प्रयास करता है।
  • आलोचक इस बात पर प्रकाश डालते हैं कि 'नफरत' और 'शत्रुता' जैसे शब्द व्यक्तिपरक हैं और उन्हें कानूनी रूप से परिभाषित करना कठिन है।
  • ऐसी आशंका है कि सत्ता में बैठे लोग राजनीतिक विरोधियों को चुप कराने के लिए इस विधेयक का उपयोग करेंगे।
परीक्षा बिंदु
  • Karnataka Hate Speech and Hate Crimes (Prevention) Bill, 2025
  • विधेयक Hate Speech को सार्वजनिक रूप से जानबूझकर चोट या वैमनस्य पैदा करने के लिए की गई किसी भी अभिव्यक्ति के रूप में परिभाषित करता है।
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भारत में बढ़ती शैक्षिक लागत और असमानताओं की कठोर वास्तविकता

Right to Education (RTE) Act और National Education Policy (NEP) 2020 के बावजूद, भारत में शैक्षिक लागत एक महत्वपूर्ण बोझ बनी हुई है। NSS 80th Round (2023) के आंकड़े बताते हैं कि निजी स्कूली शिक्षा की लागत सबसे गरीब 5% परिवारों की मासिक आय के लगभग बराबर है। यह वित्तीय दबाव परिवारों को निजी ट्यूशन की ओर धकेलता है, जिससे अमीर और गरीब के बीच सीखने का अंतर और बढ़ जाता है। लेख इस बात पर जोर देता है कि शिक्षा को विशेषाधिकार नहीं बल्कि अधिकार बनाए रखने और सामाजिक-आर्थिक विभाजन को पाटने के लिए सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता और पहुंच को मजबूत करने की आवश्यकता है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए सरकारी स्कूल के बुनियादी ढांचे में तत्काल सुधार की आवश्यकता है।

  • ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में शहरी क्षेत्रों में निजी स्कूलों में नामांकन काफी अधिक है (प्री-प्राइमरी स्तर पर 62.9%)।
  • माध्यमिक स्तर पर निजी स्कूली शिक्षा की लागत तीसरे आय दशमक (income decile) वाले परिवारों के मासिक खर्च के बराबर है।
  • निजी ट्यूशन 'प्रतिष्ठा का प्रतीक' और कुछ निजी स्कूलों में कम योग्य शिक्षकों के कारण एक आवश्यकता बन गया है।
परीक्षा बिंदु
  • Article 21A (86th Amendment, 2002) मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार प्रदान करता है।
  • NSS 80th Round Survey (2023) 'Comprehensive Modular Survey: Education' पर आधारित है।
  • National Education Policy (NEP) 2020 का लक्ष्य 3 से 18 वर्ष की आयु के बच्चों को कवर करना है।
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Madras High Court Collegium और न्यायिक नियुक्तियों में पारदर्शिता संबंधी चिंताएं

यह लेख Madras High Court Collegium द्वारा न्यायाधीशों की सिफारिश से जुड़े विवाद पर चर्चा करता है। यह एक विशिष्ट उदाहरण पर प्रकाश डालता है जहां एक वरिष्ठ न्यायाधीश, Justice Nisha Banu को 'Collegium judge' पद के लिए दरकिनार कर एक कनिष्ठ न्यायाधीश, Justice M.S. Ramesh को प्राथमिकता दी गई। राज्य सरकार ने इस निर्णय के कानूनी अधिकार और प्रक्रियात्मक निरंतरता पर स्पष्टीकरण मांगा है। यह स्थिति Collegium प्रणाली में पारदर्शिता की कमी, भाई-भतीजावाद और न्यायिक स्वतंत्रता तथा सार्वजनिक विश्वास बनाए रखने के लिए सुधारों की आवश्यकता पर चल रही बहस को रेखांकित करती है। लेख का तर्क है कि जब संरचनात्मक अखंडता दांव पर हो तो चुप्पी कोई विकल्प नहीं है।

  • उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए Collegium प्रणाली न्यायिक मिसाल की देन है, न कि किसी कानून (statute) की।
  • Memorandum of Procedure (MoP) निर्देश देता है कि मुख्य न्यायाधीश और दो वरिष्ठतम न्यायाधीशों को Collegium बनाना चाहिए।
  • स्थापित वरिष्ठता और प्रक्रियात्मक मानदंडों से विचलन न्यायपालिका और राज्य के बीच संवैधानिक संकट पैदा कर सकता है।
परीक्षा बिंदु
  • भारत के संविधान का Article 217 उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति को नियंत्रित करता है।
  • Memorandum of Procedure (MoP) न्यायिक नियुक्तियों के नियमों की रूपरेखा तैयार करता है।
  • हृदय-आधारित न्याय के महत्व के संबंध में Kural 541 का उल्लेख किया गया है।
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डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये के मूल्यह्रास (Depreciation) के प्रभाव और कारणों का विश्लेषण

भारतीय रुपया हाल ही में ₹90 प्रति डॉलर से नीचे गिर गया है, जिससे अर्थव्यवस्था पर इसके प्रभाव को लेकर बहस छिड़ गई है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि यह गिरावट उच्च व्यापार घाटे (trade deficit), चालू खाता घाटे (current account deficit) और FPI बहिर्वाह (outflows) जैसे मौलिक कारकों के साथ-साथ अमेरिकी टैरिफ खतरों जैसे बाहरी कारकों से प्रेरित है। जबकि कमजोर रुपया निर्यातकों को उनके सामान को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाकर लाभ पहुंचा सकता है, यह आयात की लागत को भी बढ़ाता है, जिससे संभावित रूप से मुद्रास्फीति (inflation) बढ़ सकती है। हालांकि, मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार और मजबूत GDP विकास दर के साथ, वर्तमान मूल्यह्रास को कुछ लोगों द्वारा संरचनात्मक संकट के बजाय एक प्रबंधनीय परिवर्तन के रूप में देखा जा रहा है। RBI अस्थिरता की निगरानी करना जारी रखे हुए है।

  • रुपये की गिरावट आंशिक रूप से उच्च अमेरिकी टैरिफ की उम्मीदों और वैश्विक निवेशक भावना में बदलाव के कारण है।
  • RBI के हस्तक्षेप का उद्देश्य विनिमय दर के एक विशिष्ट स्तर का बचाव करने के बजाय अत्यधिक अस्थिरता को रोकना है।
  • 5% का निरंतर मूल्यह्रास मुद्रास्फीति को लगभग 0.3-0.4% तक बढ़ा सकता है।
परीक्षा बिंदु
  • रुपये का मूल्य हाल ही में ₹90 प्रति डॉलर के आंकड़े को पार कर गया है।
  • RBI का विदेशी मुद्रा भंडार वर्तमान में 11 महीने के आयात को कवर करता है।
  • मुद्रास्फीति प्रभाव विश्लेषण के लिए Consumer Price Index (CPI) प्राथमिक उपाय है।
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COP30 में भू-राजनीति और स्थिरता के प्रयास: चीन और भारत के Pavilions की तुलना

ब्राजील के बेलेम (Belem) में COP30 जलवायु वार्ता में, राष्ट्रीय पवेलियन (pavilions) वैश्विक भू-राजनीति के सूक्ष्म जगत के रूप में कार्य करते थे। चीन के पवेलियन ने 'चाय-युक्त कपड़े' और पर्यावरण के अनुकूल उपहारों के साथ नवाचार का प्रदर्शन किया, जो हरित तकनीक के लिए एक विनिर्माण पावरहाउस के रूप में उसकी स्थिति को दर्शाता है। इसके विपरीत, भारत के पवेलियन को 'किफायती' (austere) बताया गया, जो प्रचारक उपहारों के बिना सतत विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पर केंद्रित था। लेख जीवाश्म ईंधन को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने के संबंध में विकसित और विकासशील देशों के बीच तनाव पर प्रकाश डालता है, जिसमें चीन और भारत ने अनुकूलन (adaptation) और हरित संक्रमण के लिए आवश्यक वित्तीय सहायता पर जोर दिया। अफ्रीका पवेलियन के पास आग लगने के कारण कार्यक्रम में कुछ समय के लिए बाधा आई थी।

  • COP30 ब्राजील के बेलेम में आयोजित किया गया था, जिसमें जलवायु अनुकूलन और विकासशील देशों के लिए वित्त पोषण पर ध्यान केंद्रित किया गया था।
  • चीन ने अपनी छवि को जहरीले प्लास्टिक के उत्पादक से बदलकर टिकाऊ सामग्री के नेता के रूप में पेश करने के लिए अपने पवेलियन का उपयोग किया।
  • भारत विश्व स्तर पर तीसरा सबसे बड़ा सौर उत्पादक बना हुआ है, फिर भी इसकी 70% से अधिक बिजली अभी भी कोयले से आती है।
परीक्षा बिंदु
  • COP30 का स्थान: बेलेम (Belem), ब्राजील।
  • भारत विश्व स्तर पर तीसरा सबसे बड़ा सौर उत्पादक है।
  • भारत की 70% से अधिक बिजली कोयले से उत्पन्न होती है।
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AI ट्रेनिंग और कंटेंट रॉयल्टी के समाधान के लिए DPIIT ने Copyright Act में संशोधन का प्रस्ताव दिया

Department for Promotion of Industry and Internal Trade (DPIIT) आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) द्वारा उत्पन्न चुनौतियों का समाधान करने के लिए Copyright Act, 1957 में संशोधन करने की योजना बना रहा है। एक प्रमुख प्रस्ताव 'ब्लैंकेट लाइसेंसिंग' (blanket licensing) ढांचा है, जहां AI फर्में अपने मॉडल के व्यवसायीकरण के बाद एक कॉपीराइट सोसाइटी के माध्यम से कंटेंट प्रकाशकों को रॉयल्टी का भुगतान करेंगी। इसका उद्देश्य इंटरनेट डेटा स्क्रैप करने वाले AI डेवलपर्स और मुआवजा चाहने वाले प्रकाशकों के बीच तनाव को हल करना है। हालांकि, Nasscom जैसे तकनीकी उद्योग निकायों ने चिंता व्यक्त की है, विशेष रूप से जनरेटिव AI के युग में कॉपीराइट उल्लंघन के लिए सबूत के बोझ (burden of proof) के संबंध में। प्रस्ताव कॉपीराइट न्यायशास्त्र के लिए एक हाइब्रिड मॉडल का सुझाव देता है।

  • प्रस्तावित ढांचा AI डेवलपर्स को कंटेंट स्क्रैप करने की अनुमति देगा और साथ ही प्रकाशकों को अंततः भुगतान सुनिश्चित करेगा।
  • एक नई कॉपीराइट सोसाइटी, 'Copyright Royalties Collective for AI Training' (CRCAT), रॉयल्टी वितरण का प्रबंधन करेगी।
  • प्रकाशकों का तर्क है कि उनके पास AI ट्रेनिंग के लिए डेटा साझा करने से बाहर निकलने (opt out) का अधिकार होना चाहिए।
परीक्षा बिंदु
  • Copyright Act, 1957 वह प्राथमिक कानून है जिसमें संशोधन पर विचार किया जा रहा है।
  • Department for Promotion of Industry and Internal Trade (DPIIT) ने वर्किंग पेपर जारी किया।
  • Nasscom प्रमुख AI निवेशकों का प्रतिनिधित्व करने वाला तकनीकी उद्योग निकाय है।
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भारत में वायु प्रदूषण: भारत-गंगा के मैदान से परे एक राष्ट्रीय स्वास्थ्य आपातकाल

वायु प्रदूषण भारत में एक राष्ट्रव्यापी स्वास्थ्य संकट के रूप में विकसित हो गया है, जो जीवन प्रत्याशा (life expectancy) को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर रहा है और सालाना लगभग दो मिलियन मौतों का कारण बन रहा है। हालांकि इसे अक्सर उत्तरी सर्दियों से जोड़ा जाता है, लेकिन जहरीली हवा अब देश भर के लगभग हर जनसांख्यिकीय को प्रभावित करती है। सूक्ष्म कण पदार्थ (PM 2.5) हृदय रोगों, श्वसन संबंधी बीमारियों और यहां तक कि तंत्रिका संबंधी विकारों से जुड़ा हुआ है। लेख विशुद्ध रूप से पर्यावरणीय दृष्टिकोण से स्वास्थ्य-केंद्रित ढांचे की ओर बदलाव का आह्वान करता है, जिसमें सख्त औद्योगिक नियंत्रण, अपशिष्ट प्रबंधन सुधार और स्वच्छ हवा को एक मौलिक मानवाधिकार के रूप में मान्यता देने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। मौजूदा कार्यक्रमों का प्रवर्तन एक गंभीर चुनौती बनी हुई है।

  • लगभग 46% भारतीय उन क्षेत्रों में रहते हैं जहां वायु प्रदूषण जीवन प्रत्याशा को आठ साल से अधिक कम कर देता है।
  • PM 2.5 कण रक्त-मस्तिष्क अवरोध (blood-brain barrier) को पार कर सकते हैं, जिससे संभावित रूप से न्यूरोइन्फ्लेमेशन और संज्ञानात्मक गिरावट हो सकती है।
  • National Clean Air Programme (NCAP) ने कुछ सुधार शुरू किए हैं, लेकिन प्रवर्तन अभी भी कमजोर है।
परीक्षा बिंदु
  • भारत की PM 2.5 की 24 घंटे की सीमा 60 μg/m³ है, जबकि WHO का दिशानिर्देश 15 μg/m³ है।
  • प्रदूषण से जुड़ी मृत्यु दर में 2000 के बाद से 43% की वृद्धि हुई है।
  • National Clean Air Programme (NCAP) वायु गुणवत्ता सुधार के लिए केंद्रीय पहल है।
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सुप्रीम कोर्ट ने अनैच्छिक Narco-Analysis Tests के खिलाफ संवैधानिक सुरक्षा की पुष्टि की

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में पटना उच्च न्यायालय के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसने एक अनैच्छिक नार्को टेस्ट की अनुमति दी थी, और यह पुष्टि की कि सूचित सहमति के बिना ऐसे परीक्षण असंवैधानिक हैं। निर्णय इस बात पर जोर देता है कि जबरन परीक्षण संविधान के Article 20(3) का उल्लंघन करते हैं, जो आत्म-दोषारोपण (self-incrimination) से बचाता है, और Article 21 का, जो गोपनीयता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार की गारंटी देता है। हालांकि एक व्यक्ति अपने बचाव के हिस्से के रूप में स्वेच्छा से परीक्षण के लिए तैयार हो सकता है, अदालत ने कहा कि बिना स्वतंत्र सहमति के प्राप्त किसी भी जानकारी को साक्ष्य के रूप में उपयोग नहीं किया जा सकता है, जो Articles 14, 19 और 21 के 'स्वर्ण त्रिभुज' (Golden Triangle) को कायम रखता है। यह फैसला Selvi मामले में स्थापित मिसाल का अनुसरण करता है।

  • नार्को टेस्ट में विषय की झिझक को कम करने के लिए सोडियम पेंटोथल (Sodium Pentothal) जैसे पदार्थों का उपयोग किया जाता है।
  • Selvi v. State of Karnataka (2010) के दिशानिर्देशों ने स्थापित किया कि अनैच्छिक परीक्षण मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हैं।
  • अदालत ने स्पष्ट किया कि भले ही परीक्षण स्वैच्छिक हो, इसे चिकित्सा और कानूनी सुरक्षा उपायों के साथ आयोजित किया जाना चाहिए।
परीक्षा बिंदु
  • Article 20(3) आत्म-दोषारोपण (self-incrimination) से सुरक्षा प्रदान करता है।
  • Selvi v. State of Karnataka (2010) नार्को टेस्ट पर ऐतिहासिक निर्णय है।
  • Maneka Gandhi v. Union of India (1978) ने Articles 14, 19 और 21 के 'स्वर्ण त्रिभुज' (Golden Triangle) की व्याख्या की थी।
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भारत के Gaganyaan अंतरिक्ष मिशन के लिए Human-Rating मानकों का महत्व

जैसे-जैसे भारत अपने पहले मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन, Gaganyaan की तैयारी कर रहा है, LVM-3 लॉन्च वाहन की 'ह्यूमन-रेटिंग' (human-rating) की प्रक्रिया एक केंद्रीय फोकस बन गई है। ह्यूमन-रेटिंग में यह सुनिश्चित करने के लिए कठोर इंजीनियरिंग और परीक्षण शामिल है कि किसी विनाशकारी घटना की संभावना 0.2% या उससे कम हो। इसमें रिडंडेंट सिस्टम (redundant systems), एक मजबूत क्रू एस्केप सिस्टम (crew escape system) और विश्वसनीय पर्यावरण नियंत्रण जोड़ना शामिल है। हालांकि ह्यूमन-रेटिंग जटिलता और लागत को बढ़ाती है, लेकिन यह अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा के लिए आवश्यक है। ISRO का LVM-3, जिसे अब HLVM-3 नाम दिया गया है, भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित रूप से कक्षा में ले जाने के लिए इन अपग्रेड्स से गुजर रहा है, जो आत्मनिर्भर भारत पहल के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। मिशन का लक्ष्य उच्च विश्वसनीयता है।

  • ह्यूमन-रेटिंग के लिए मानक कार्गो रॉकेट की तुलना में बहुत अधिक सुरक्षा मार्जिन की आवश्यकता होती है।
  • HLVM-3 में बढ़ी हुई विश्वसनीयता के लिए अपग्रेड किए गए विकास लिक्विड इंजन और S200 बूस्टर शामिल हैं।
  • क्रू एस्केप सिस्टम को उड़ान के दौरान आपात स्थिति के मामले में क्रू मॉड्यूल को दूर खींचने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
परीक्षा बिंदु
  • LVM-3 (Launch Vehicle Mark-3) वह रॉकेट है जिसे ह्यूमन-रेटेड किया जा रहा है।
  • HLVM-3, LVM-3 के ह्यूमन-रेटेड संस्करण का पदनाम (designation) है।
  • ह्यूमन-रेटेड सिस्टम के लिए लक्षित विनाशकारी जोखिम 0.2% या उससे कम है।
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