विदेश मंत्री S. Jaishankar ने न्यूयॉर्क में 80th UN General Assembly के इतर U.S. Secretary of State Marco Rubio से मुलाकात की। इस बैठक का उद्देश्य हाल के अमेरिकी कदमों, जिसमें भारतीय वस्तुओं पर 50% टैरिफ और H-1B visa शुल्क में भारी वृद्धि शामिल है, से तनावपूर्ण हुए संबंधों को सुधारना था। चर्चा में आपसी चिंता के द्विपक्षीय और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों को शामिल किया गया। यह बैठक तब हुई जब भारतीय व्यापार वार्ताकार U.S. Commerce Secretary Piyush Goyal के साथ बातचीत की तैयारी कर रहे थे। यह संवाद वीजा व्यवधानों के मानवीय परिणामों को संबोधित करने और जटिल India-U.S. व्यापार परिदृश्य को नेविगेट करने के लिए महत्वपूर्ण है।
यह बैठक United Nations General Assembly (UNGA) के 80th सत्र के दौरान हुई।
घर्षण के मुख्य बिंदुओं में भारतीय वस्तुओं पर 50% U.S. टैरिफ और H-1B visa आवेदनों के लिए $100,000 का शुल्क शामिल है।
भारत ने ईरान में Chabahar port परियोजना के लिए छूट (waiver) रद्द करने पर चिंता व्यक्त की।
परीक्षा बिंदु
80th United Nations General Assembly (UNGA) सत्र।
U.S. Secretary of State: Marco Rubio.
H-1B visa आवेदन शुल्क बढ़ाकर $100,000 कर दिया गया।
Supreme Court के Justice M.M. Sundresh ने हाल ही में टिप्पणी की कि मानहानि (defamation) को अपराध की श्रेणी से बाहर करने का समय आ गया है। उन्होंने निजी व्यक्तियों और राजनीतिक दलों द्वारा व्यक्तिगत हिसाब चुकता करने के लिए आपराधिक मानहानि कानूनों के बढ़ते उपयोग पर चिंता व्यक्त की। हालांकि अदालत ने 2016 के Subramanian Swamy मामले में आपराधिक मानहानि की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा था, लेकिन हालिया पीठें अधिक आलोचनात्मक रही हैं, जो अक्सर समन पर रोक लगाती हैं और 'बहुत अधिक संवेदनशील' न होने की सलाह देती हैं। बहस इस बात पर केंद्रित है कि क्या निजी पक्षों के बीच मानहानि से किसी सार्वजनिक हित की पूर्ति होती है या यह केवल Article 19(1)(a) के तहत गारंटीकृत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को दबाती है।
Justice M.M. Sundresh ने सुझाव दिया कि निजी व्यक्तियों द्वारा मानहानि को अपराध नहीं माना जाना चाहिए।
Supreme Court ने पहले 2016 में आपराधिक मानहानि को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर 'उचित प्रतिबंध' (reasonable restriction) के रूप में बरकरार रखा था।
हालिया न्यायिक टिप्पणियां बताती हैं कि अदालतों को मानहानि के मामलों के माध्यम से राजनीतिक हिसाब चुकता करने का मंच नहीं होना चाहिए।
परीक्षा बिंदु
Subramanian Swamy versus Union of India मामला (2016)।
संविधान का Article 19(1)(a) (भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार)।
भारतीय अर्थव्यवस्था एक ऐसी पहेली का सामना कर रही है जहाँ विकास के प्राथमिक चालक, घरेलू खर्च को एक महत्वपूर्ण शुरुआत की आवश्यकता है। जबकि सरकारी बुनियादी ढांचा खर्च मजबूत रहा है, निजी निवेश और शुद्ध निर्यात जैसे अन्य इंजन सुस्त पड़ रहे हैं। औद्योगिक क्षमता उपयोग 80% से नीचे बना हुआ है, जो निजी क्षेत्र के विस्तार को हतोत्साहित करता है। GST सुधारों और Budget 2025 में आयकर कटौती के बावजूद, उपभोक्ताओं द्वारा खर्च करने के बजाय बचत करने की अधिक संभावना है। श्रम की अधिकता और कौशल की कमी मजदूरी को कम रखती है, जिससे खर्च करने योग्य आय (disposable income) सीमित हो जाती है। 8% विकास लक्ष्य तक पहुँचने के लिए, अर्थव्यवस्था को खपत में उच्च जड़ता (inertia) को दूर करने के लिए अधिक राजकोषीय निवेश की आवश्यकता है।
अर्थव्यवस्था चार इंजनों पर निर्भर करती है: घरेलू खपत, निजी निवेश, सरकारी खर्च और शुद्ध निर्यात।
महामारी के तुरंत बाद के वर्षों की तुलना में सरकारी पूंजीगत व्यय (capital expenditure) वृद्धि धीमी होने की उम्मीद है।
22 सितंबर से प्रभावी GST सुधारों का उद्देश्य कीमतों को कम करना और ग्रामीण खर्च को प्रोत्साहित करना है।
परीक्षा बिंदु
औद्योगिक क्षमता उपयोग मार्च 2011 से 80% को पार नहीं कर पाया है।
भारत को अपने आर्थिक लक्ष्यों को पूरा करने के लिए 8% विकास की आवश्यकता है, जो वर्तमान में 6%-6.5% है।
Budget 2025 ने खर्च करने योग्य आय बढ़ाने के लिए आयकर दरों में कटौती की शुरुआत की।
Primary Health Centre (PHC) डॉक्टर भारत की ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा की रीढ़ हैं, फिर भी वे नैदानिक भार और प्रशासनिक कार्यों के अत्यधिक दबाव का सामना करते हैं। एक सामान्य PHC डॉक्टर 20,000 से 50,000 लोगों की सेवा करता है, जो मातृ स्वास्थ्य से लेकर संक्रामक रोगों तक सब कुछ संभालता है। IHIP और ABHA जैसे कई डिजिटल पोर्टलों की शुरुआत ने अनजाने में दस्तावेजीकरण के काम को बढ़ा दिया है, जिससे गंभीर बर्नआउट (burnout) हो रहा है। The Lancet और WHO ने इस वैश्विक संकट पर प्रकाश डाला है। Universal Health Coverage और SDG 3 प्राप्त करने के लिए, भारत को अनुपालन की संस्कृति से सुविधा की संस्कृति की ओर बढ़ना चाहिए, स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के कल्याण को प्राथमिकता देनी चाहिए।
PHC डॉक्टर प्रतिदिन 100 से अधिक बाह्य रोगियों (outpatients) के साथ-साथ आपातकालीन सेवाओं और राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों का प्रबंधन करते हैं।
IHIP और UWIN जैसे डिजिटल सिस्टम ने काम को सुव्यवस्थित करने के बजाय 'दस्तावेजों का दोहराव' (documentation duplication) पैदा कर दिया है।
PHC डॉक्टरों के बीच बर्नआउट एक प्रणालीगत मुद्दा है जो खराब स्टाफिंग और अत्यधिक प्रशासनिक रिपोर्टिंग से जुड़ा है।
परीक्षा बिंदु
SDG 3: स्वस्थ जीवन सुनिश्चित करना और सभी के लिए कल्याण को बढ़ावा देना।
स्वास्थ्य सर्वेक्षण और विकास पर Bhore Committee (1946)।
Supreme Court of India ने हाल ही में एक याचिका को खारिज कर दिया जिसमें राज्य प्रायोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम, Mysuru Dasara उत्सव को सांप्रदायिक बनाने की मांग की गई थी। अदालत ने पुष्टि की कि धर्मनिरपेक्षता (secularism) एक मौलिक सिद्धांत है और संविधान की 'मूल संरचना' (basic structure) का हिस्सा है। इसने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक कार्यक्रमों के आयोजन के समय राज्य धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं कर सकता। फैसले में इस बात पर जोर दिया गया कि धर्म का पालन करने का संवैधानिक अधिकार (Articles 25 और 26) व्यक्तियों को दूसरों को सार्वजनिक उत्सवों में भाग लेने से रोकने की अनुमति नहीं देता है। यह निर्णय भारत के बहुलवादी समाज और समानता तथा धर्मनिरपेक्षता के प्रति Preamble की प्रतिबद्धता को पुष्ट करता है।
धर्मनिरपेक्षता भारतीय संविधान के Basic Structure सिद्धांत का एक मुख्य घटक है।
राज्य प्रायोजित कार्यक्रम सार्वजनिक होते हैं और व्यक्तियों को उनकी धार्मिक पहचान के आधार पर बाहर नहीं कर सकते।
Articles 25 और 26 धर्म की स्वतंत्रता की गारंटी देते हैं लेकिन सार्वजनिक सभाओं में सांप्रदायिक बहिष्कार का समर्थन नहीं करते हैं।
परीक्षा बिंदु
संविधान के Articles 25 और 26 (Freedom of Religion)।
Basic Structure Doctrine (Kesavananda Bharati मामले में स्थापित)।
पारंपरिक चिकित्सा का अभ्यास 88% WHO सदस्य देशों में किया जाता है, जो अरबों लोगों के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा स्रोत के रूप में कार्य करता है। भारत के AYUSH क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है, जिसका विनिर्माण राजस्व ₹1.37 लाख करोड़ तक पहुँच गया है। भारत में WHO Global Traditional Medicine Centre की स्थापना एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। भविष्य कहने वाली देखभाल (predictive care) को बढ़ाने के लिए अब AI और big data जैसी आधुनिक तकनीकों को आयुर्वेद में एकीकृत किया जा रहा है। जैसे-जैसे दुनिया जीवनशैली की बीमारियों और जलवायु परिवर्तन का सामना कर रही है, पारंपरिक चिकित्सा टिकाऊ, निवारक स्वास्थ्य समाधान प्रदान करती है। Ayurveda Day 2025 का विषय 'Ayurveda for People & Planet' है।
पारंपरिक चिकित्सा जैव विविधता संरक्षण, पोषण सुरक्षा और टिकाऊ आजीविका में योगदान देती है।
भारत में AYUSH उद्योग में 92,000 से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSMEs) शामिल हैं।
भारत ने विश्व स्तर पर पारंपरिक चिकित्सा को बढ़ावा देने के लिए 25 द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं।
परीक्षा बिंदु
WHO Global Traditional Medicine Centre भारत के जामनगर में स्थित है।
Central Pollution Control Board (CPCB) की एक रिपोर्ट भारत में प्रदूषित नदी स्थानों की संख्या में मामूली गिरावट का संकेत देती है, जो 2022 में 815 से घटकर 2023 में 807 हो गई है। एजेंसी जैविक ऑक्सीजन मांग (Biological Oxygen Demand - BOD) को जैविक प्रदूषण के प्रतिनिधि के रूप में उपयोग करती है। 3 mg/litre से अधिक BOD वाले स्थानों को स्नान के लिए अनुपयुक्त माना जाता है, जबकि 30 mg/litre से अधिक वाले स्थानों को 'Priority 1' (सबसे प्रदूषित) के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। महाराष्ट्र में प्रदूषित नदी खंडों की संख्या सबसे अधिक है। जबकि 'Priority 1' खंड 45 से घटकर 37 हो गए हैं, समग्र प्रदूषण स्तर एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय चुनौती बना हुआ है।
नदी के स्वास्थ्य को मापने के लिए Biological Oxygen Demand (BOD) प्राथमिक पैरामीटर है।
BOD > 3 mg/l प्रदूषण का संकेत देता है; BOD > 30 mg/l गंभीर प्रदूषण (Priority 1) का संकेत देता है।
महाराष्ट्र, गुजरात और उत्तर प्रदेश में 'Priority 1' नदी खंडों की संख्या सबसे अधिक है।
भारत और U.S. मक्का आयात को लेकर असहमति में हैं। जबकि U.S. अपने अधिशेष मक्के के लिए बाजार पहुंच चाहता है, भारत Genetically Modified (GM) फसलों के खिलाफ अपनी सख्त नीति के कारण हिचकिचा रहा है। वर्तमान में, भारत केवल GM कपास (cotton) की खेती की अनुमति देता है। GM मक्के का आयात खाद्य श्रृंखला को दूषित करने का जोखिम पैदा कर सकता है। इसके अतिरिक्त, इथेनॉल सम्मिश्रण (ethanol blending) के लिए भारत के जोर ने मक्के की घरेलू मांग बढ़ा दी है, लेकिन सरकार आयात के बजाय स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देने को प्राथमिकता देती है। भारत का लघु-स्तरीय कृषि मॉडल U.S. के बड़े पैमाने के, सब्सिडी वाले औद्योगिक कृषि के बिल्कुल विपरीत है, जिससे भारतीय किसानों के लिए सीधी प्रतिस्पर्धा कठिन हो जाती है।
भारत अपनी जैव विविधता और खाद्य श्रृंखला की रक्षा के लिए GM खाद्य फसलों के आयात पर रोक लगाता है।
इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम के कारण भारत में मक्के की मांग बढ़ रही है।
U.S. कृषि अत्यधिक सब्सिडी वाली है और बड़े पैमाने पर औद्योगिक संचालन का प्रभुत्व है।
परीक्षा बिंदु
भारत में खेती के लिए अनुमति प्राप्त एकमात्र GM फसल: GM Cotton.
इथेनॉल सम्मिश्रण लक्ष्य: 2025-26 तक 20%.
भारत की मक्का उपज: ~3 टन प्रति हेक्टेयर (विश्व औसत: ~6 टन)।
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