सुप्रीम कोर्ट ने धर्मनिरपेक्षता को भारतीय संविधान की मूल संरचना के हिस्से के रूप में दोहराया
Supreme Court of India ने हाल ही में एक याचिका को खारिज कर दिया जिसमें राज्य प्रायोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम, Mysuru Dasara उत्सव को सांप्रदायिक बनाने की मांग की गई थी। अदालत ने पुष्टि की कि धर्मनिरपेक्षता (secularism) एक मौलिक सिद्धांत है और संविधान की 'मूल संरचना' (basic structure) का हिस्सा है। इसने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक कार्यक्रमों के आयोजन के समय राज्य धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं कर सकता। फैसले में इस बात पर जोर दिया गया कि धर्म का पालन करने का संवैधानिक अधिकार (Articles 25 और 26) व्यक्तियों को दूसरों को सार्वजनिक उत्सवों में भाग लेने से रोकने की अनुमति नहीं देता है। यह निर्णय भारत के बहुलवादी समाज और समानता तथा धर्मनिरपेक्षता के प्रति Preamble की प्रतिबद्धता को पुष्ट करता है।
मुख्य बिंदु
- धर्मनिरपेक्षता भारतीय संविधान के Basic Structure सिद्धांत का एक मुख्य घटक है।
- राज्य प्रायोजित कार्यक्रम सार्वजनिक होते हैं और व्यक्तियों को उनकी धार्मिक पहचान के आधार पर बाहर नहीं कर सकते।
- Articles 25 और 26 धर्म की स्वतंत्रता की गारंटी देते हैं लेकिन सार्वजनिक सभाओं में सांप्रदायिक बहिष्कार का समर्थन नहीं करते हैं।
- अदालत ने रेखांकित किया कि Preamble स्पष्ट रूप से समानता और धर्मनिरपेक्षता को बढ़ावा देती है।
परीक्षा तथ्य
- संविधान के Articles 25 और 26 (Freedom of Religion)।
- Basic Structure Doctrine (Kesavananda Bharati मामले में स्थापित)।
- Mysuru Dasara उत्सव मामला।
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