बार काउंसिल के पास छात्रों को दंडित करने की कोई शक्ति नहीं है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि Bar Council of India (BCI) के पास लॉ के छात्रों को अनुशासित या दंडित करने का अधिकार क्षेत्र नहीं है, यह देखते हुए कि Advocates Act, 1961 केवल रजिस्टर्ड अधिवक्ताओं पर शक्तियां प्रदान करता है। यह फैसला NALSAR के स्नातकों की एक याचिका पर आया, जिसमें पूर्व चीफ जस्टिस सूर्यकांत की टिप्पणियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ BCI की दंडात्मक कार्रवाइयों और पत्रों को चुनौती दी गई थी। शीर्ष अदालत ने इस बात की पुष्टि की कि केवल विश्वविद्यालय ही छात्रों को अनुशासित कर सकते हैं, जिससे पेशेवर निकायों द्वारा विनियामक अतिरेक (regulatory overreach) के खिलाफ भाषण की स्वतंत्रता, असंतोष और शैक्षणिक स्वायत्तता के छात्र अधिकारों की रक्षा होती है।
मुख्य बिंदु
- सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि Bar Council of India के पास Advocates Act, 1961 के तहत लॉ के छात्रों को अनुशासित करने की कोई वैधानिक शक्ति नहीं है।
- BCI की disciplinary शक्तियां सख्ती से रजिस्टर्ड अधिवक्ताओं तक सीमित हैं, छात्रों तक नहीं।
- अदालत ने शैक्षणिक स्थानों में विश्वविद्यालय की स्वायत्तता और भाषण की स्वतंत्रता तथा असंतोष के छात्रों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की।
- छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का अधिकार क्षेत्र केवल विश्वविद्यालयों या सक्षम शैक्षिक प्राधिकरणों के पास है।
परीक्षा तथ्य
- इस मामले में NALSAR के स्नातक शामिल थे जिनका प्रतिनिधित्व वरिष्ठ अधिवक्ताओं के. परमेश्वर और रुपाली सैमुअल ने किया था।
- फैसले में विनियामक अधिकार क्षेत्र के संबंध में Advocates Act, 1961 के प्रावधानों का विश्लेषण किया गया।
- तीन जजों की बेंच का नेतृत्व चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने किया।
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