OBC क्रीमी लेयर के फैसले पर स्पष्टीकरण के लिए केंद्र की याचिका पर SC करेगा सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट OBC क्रीमी लेयर से बाहर करने के लिए आय परीक्षण से संबंधित अपने 11 मार्च के फैसले पर स्पष्टीकरण मांगने वाले केंद्र के आवेदन की समीक्षा करेगा। केंद्र का तर्क है कि पूर्वव्यापी (retrospective) कार्यान्वयन "बेहद कठिन" है, जिससे 2012 से तय सेवाओं पर "कैस्केडिंग प्रभाव" (cascading effect) पड़ सकता है और सभी श्रेणियां प्रभावित हो सकती हैं। SC ने पहले पाया था कि कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने आय परीक्षण को गलत तरीके से लागू किया, जिससे OBC उम्मीदवारों को बाहर कर दिया गया और सुपरन्यूमेरी (supernumerary) पदों के सृजन का निर्देश दिया। अब केंद्र सरकार स्पष्टीकरण के लंबित रहने तक, पुराने आय परीक्षण के आधार पर CSE 2025 के उम्मीदवारों के लिए वर्तमान सेवा आवंटन को जारी रखना चाहती है।

मुख्य बिंदु

  • सुप्रीम कोर्ट OBC क्रीमी लेयर आय परीक्षण पर अपने 11 मार्च के फैसले पर स्पष्टीकरण के लिए केंद्र के अनुरोध पर विचार करेगा।
  • केंद्र का दावा है कि फैसले को पूर्वव्यापी रूप से लागू करना प्रशासनिक रूप से चुनौतीपूर्ण है और 2012 से तय सेवाओं को बाधित कर सकता है।
  • SC ने पहले फैसला सुनाया था कि DoPT का आय परीक्षण का आवेदन गलत था, जिससे OBC उम्मीदवारों के खिलाफ "शत्रुतापूर्ण भेदभाव" हुआ।
  • केंद्र ने पूर्व-निर्णय आय परीक्षण के आधार पर CSE 2025 के लिए सेवाओं का आवंटन जारी रखने की अनुमति मांगी है।
  • यह मामला न्यायिक निर्देशों, प्रशासनिक व्यवहार्यता और आरक्षण नीतियों में निष्पक्षता सुनिश्चित करने के बीच के तनाव को उजागर करता है।

परीक्षा तथ्य

  • OBC क्रीमी लेयर आय परीक्षण पर SC का फैसला 11 मार्च को आया था।
  • यह फैसला रोहित नाथन मामले में था।
  • संबंधित संवैधानिक अनुच्छेदों में 14, 15(4) और 16(4) शामिल हैं।
  • कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DoPT) आरक्षण नियमों की व्याख्या करने वाली नोडल एजेंसी है।

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