तुंगभद्रा बांध: गाद जमा होने और नई परियोजनाओं की चुनौतियों के बीच अंतर-राज्यीय सहयोग का एक मॉडल।

यह लेख कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्रियों और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री द्वारा हाल ही में इसके स्पिलवे गेट्स के उद्घाटन के बाद तुंगभद्रा बांध को अंतर-राज्यीय सहयोग के एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में उजागर करता है। यह बांध इन तीनों दक्षिणी राज्यों में 16.4 लाख एकड़ भूमि की सिंचाई के लिए महत्वपूर्ण है। स्थापित जल-बंटवारे के इतिहास के बावजूद, नई चुनौतियाँ उभर रही हैं, जैसे Upper Bhadra परियोजना, जो आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के लिए एक परेशानी का सबब बन गई है। इसके अतिरिक्त, अत्यधिक गाद जमा होने से बांध की भंडारण क्षमता में भारी कमी आई है, जिसके लिए गाद हटाने और पुनर्वास के लिए तत्काल उपायों की आवश्यकता है, जिसमें केंद्र सरकार ने बांध सुरक्षा के लिए इन परियोजनाओं की निगरानी के लिए अपनी प्रतिबद्धता का आश्वासन दिया है।

मुख्य बिंदु

  • तुंगभद्रा बांध अंतर-राज्यीय सहयोग का एक उदाहरण है, जो कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में सिंचाई के लिए महत्वपूर्ण है।
  • यह तीनों दक्षिणी राज्यों में 16.4 लाख एकड़ के विशाल क्षेत्र को सिंचाई प्रदान करता है।
  • Upper Bhadra जैसी नई परियोजनाएँ परेशानी का सबब बन गई हैं, जो मौजूदा जल-बंटवारे समझौतों को संभावित रूप से चुनौती दे सकती हैं।
  • अत्यधिक गाद जमा होने से बांध की भंडारण क्षमता में काफी कमी आई है, जो तत्काल पुनर्वास प्रयासों की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
  • गाद हटाने और बांध पुनर्वास परियोजनाओं की निगरानी के लिए केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता दीर्घकालिक बांध सुरक्षा सुनिश्चित करने और विनाशकारी परिणामों को रोकने के लिए महत्वपूर्ण है।

परीक्षा तथ्य

  • तुंगभद्रा बांध कर्नाटक के Koppal जिले में स्थित है।
  • यह कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में लगभग 16.4 लाख एकड़ भूमि की सिंचाई करता है।
  • गाद जमा होने के कारण बांध की भंडारण क्षमता 133 tmc ft से घटकर लगभग 106 tmc ft हो गई है।
  • केंद्रीय जल शक्ति मंत्री C.R. Patil स्पिलवे गेट्स के उद्घाटन के अवसर पर उपस्थित थे।

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