भारत का ऊर्जा क्षेत्र: उच्चतम मांग, नवीकरणीय ऊर्जा पर जोर और बुनियादी ढाँचे की चुनौतियाँ
भारत आर्थिक विकास और औद्योगीकरण के कारण अभूतपूर्व बिजली की मांग का अनुभव कर रहा है। यह लेख संभवतः इस मांग को पूरा करने और जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सौर और पवन जैसी नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की ओर सरकार के आक्रामक जोर को उजागर करता है। यह संभवतः ग्रिड एकीकरण, पारेषण बुनियादी ढाँचे और सुचारु परिवर्तन के लिए आवश्यक ऊर्जा भंडारण में चुनौतियों पर चर्चा करता है। ध्यान पारंपरिक बिजली उत्पादन को बढ़ती नवीकरणीय क्षमता के साथ संतुलित करने, ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने पर है, साथ ही डिस्कॉम के वित्तीय स्वास्थ्य को संबोधित करने और अंतिम-मील कनेक्टिविटी में सुधार करने पर भी है।
मुख्य बिंदु
- भारत रिकॉर्ड-उच्च बिजली की मांग देख रहा है, जिसके लिए उत्पादन और पारेषण क्षमताओं में महत्वपूर्ण विस्तार की आवश्यकता है।
- देश ऊर्जा मांगों को पूरा करने और जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों, विशेष रूप से सौर और पवन को आक्रामक रूप से बढ़ावा दे रहा है।
- चुनौतियों में राष्ट्रीय ग्रिड में रुक-रुक कर चलने वाली नवीकरणीय ऊर्जा को एकीकृत करना और कुशल बिजली निकासी के लिए पारेषण बुनियादी ढाँचे को उन्नत करना शामिल है।
- नवीकरणीय ऊर्जा की परिवर्तनशीलता को प्रबंधित करने के लिए ऊर्जा भंडारण समाधानों और स्मार्ट ग्रिड प्रौद्योगिकियों में निवेश महत्वपूर्ण है।
- सरकार का लक्ष्य ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाना, कार्बन उत्सर्जन कम करना और पूरे देश में विश्वसनीय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
परीक्षा तथ्य
- भारत का लक्ष्य 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ईंधन-आधारित ऊर्जा क्षमता प्राप्त करना है।
- National Green Hydrogen Mission हरित हाइड्रोजन उत्पादन को बढ़ावा देता है।
- PM-KUSUM योजना कृषि पंपों के सौरकरण का समर्थन करती है।
- भारत Paris Agreement का एक हस्ताक्षरकर्ता है, जो उत्सर्जन तीव्रता को कम करने के लिए प्रतिबद्ध है।
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