भारत की ड्रोन रणनीति खरीद से हटकर रणनीतिक साझेदारी और स्वदेशी विकास की ओर बढ़ रही है

ड्रोन के लिए भारत की रक्षा और सुरक्षा रणनीति केवल तैयार प्रणालियों की खरीद से हटकर सह-विकास और सह-उत्पादन के लिए रणनीतिक साझेदारी को बढ़ावा देने की ओर विकसित हो रही है। इस बदलाव का उद्देश्य स्वदेशी विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाना, विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करना और विशिष्ट परिचालन आवश्यकताओं के अनुरूप ड्रोन प्रौद्योगिकी को तैयार करना है। यह लेख संभवतः प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, संयुक्त उद्यमों और एक मजबूत ड्रोन पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के लिए घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ियों के साथ सहयोग के महत्व पर जोर देता है। यह दृष्टिकोण सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण, निगरानी क्षमताओं में सुधार और कृषि और रसद जैसे विभिन्न नागरिक अनुप्रयोगों के लिए ड्रोन का लाभ उठाने के लिए महत्वपूर्ण है।

मुख्य बिंदु

  • भारत अपनी ड्रोन अधिग्रहण रणनीति को सीधी खरीद से हटाकर सह-विकास और सह-उत्पादन के लिए रणनीतिक साझेदारी स्थापित करने की ओर स्थानांतरित कर रहा है।
  • इस बदलाव का उद्देश्य स्वदेशी ड्रोन विनिर्माण को बढ़ावा देना, आयात निर्भरता को कम करना और विशिष्ट रक्षा आवश्यकताओं के लिए प्रौद्योगिकी को अनुकूलित करना है।
  • प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, संयुक्त उद्यमों और भारतीय तथा अंतर्राष्ट्रीय रक्षा फर्मों के बीच सहयोग पर जोर दिया गया है।
  • सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण और निगरानी तथा युद्ध क्षमताओं को बढ़ाने के लिए एक मजबूत घरेलू ड्रोन पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना महत्वपूर्ण है।
  • रक्षा के अलावा, ये साझेदारियाँ कृषि, रसद और बुनियादी ढाँचे की निगरानी जैसे क्षेत्रों में ड्रोन के नागरिक अनुप्रयोगों को भी लाभ पहुँचाएँगी।

परीक्षा तथ्य

  • 'Make in India' पहल स्वदेशी रक्षा उत्पादन के लिए केंद्रीय है।
  • Drone Rules 2021 ने भारत में ड्रोन संचालन के लिए नियमों को उदार बनाया।
  • सरकार ने ड्रोन और ड्रोन घटकों के लिए PLI योजना शुरू की है।
  • भारत का लक्ष्य 2030 तक एक वैश्विक ड्रोन हब बनना है।

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