SC: NEET लीक से छात्र, परिवार सदमे में; NTA में संस्थागत स्मृति का अभाव

सुप्रीम कोर्ट ने NEET-UG पेपर लीक मामले पर गहरी चिंता व्यक्त की, जिसमें कड़ी मेहनत के वर्षों के बर्बाद होने के कारण छात्रों और उनके परिवारों पर हुए आघात पर प्रकाश डाला गया। अदालत ने National Testing Agency (NTA) की "ad-hocism" और "institutional memory and framework" की कमी की आलोचना की, यह सवाल उठाते हुए कि यह UPSC के विपरीत गलतियों को क्यों दोहराता है। केंद्र सरकार ने अदालत को सूचित किया कि प्रधानमंत्री व्यक्तिगत रूप से स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। NTA ने कहा कि NEET-UG 2026 को रद्द करना और जांच को CBI को हस्तांतरित करना मुद्दे की गंभीरता को दर्शाता है, जिससे लगभग 23 लाख उम्मीदवार प्रभावित हुए हैं।

मुख्य बिंदु

  • सुप्रीम कोर्ट ने NEET-UG के उम्मीदवारों और उनके परिवारों द्वारा पेपर लीक के कारण अनुभव किए गए गंभीर भावनात्मक आघात पर प्रकाश डाला।
  • अदालत ने National Testing Agency (NTA) की "ad-hocism" और "institutional memory and framework" की कमी की आलोचना की, जिससे बार-बार गलतियाँ होती हैं।
  • केंद्र सरकार ने अदालत को आश्वासन दिया कि प्रधानमंत्री व्यक्तिगत रूप से स्थिति की निगरानी कर रहे हैं।
  • NTA ने अदालत को NEET-UG 2026 को रद्द करने और जांच को CBI को हस्तांतरित करने के बारे में सूचित किया।
  • पेपर लीक ने लगभग 23 लाख उम्मीदवारों के लिए उनके शैक्षणिक भविष्य के बारे में अनिश्चितता पैदा कर दी है।

परीक्षा तथ्य

  • यह मामला National Eligibility-cum-Entrance Test-Undergraduate (NEET-UG) पेपर लीक से संबंधित है।
  • सुप्रीम कोर्ट की बेंच की अध्यक्षता Justice P.S. Narasimha ने की थी।
  • जांच Central Bureau of Investigation (CBI) को हस्तांतरित कर दी गई थी।
  • NEET-UG 2026 के रद्द होने से लगभग 23 लाख उम्मीदवार प्रभावित हुए।

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