सुप्रीम कोर्ट का Andrabi फैसला कठोर UAPA जमानत प्रतिबंध पर व्यक्तिगत स्वतंत्रता और त्वरित सुनवाई की पुष्टि करता है।

सुप्रीम कोर्ट ने Syed Iftikhar Andrabi vs National Investigation Agency मामले में इस सिद्धांत की पुष्टि की कि UAPA मामलों में भी जमानत नियम होना चाहिए। इस फैसले ने जोर दिया कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता और त्वरित सुनवाई का अधिकार UAPA की Section 43-D(5) के अधीन नहीं हो सकता, जो जमानत को मुश्किल बनाता है। इस फैसले ने पहले के दो-न्यायाधीशों की पीठ के फैसलों (Gurwinder Singh और Gulfisha Fatima) को अस्वीकृत कर दिया, जिन्होंने K.A. Najeeb (2021) में तीन-न्यायाधीशों की पीठ द्वारा निर्धारित सिद्धांत को कमजोर कर दिया था, जिसमें कहा गया था कि यदि उचित समय के भीतर मुकदमे का निष्कर्ष असंभव है और पर्याप्त कारावास हो चुका है तो UAPA की कठोरता 'पिघल' जाती है।

मुख्य बिंदु

  • सुप्रीम कोर्ट ने Andrabi मामले में जमानत दी, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और त्वरित सुनवाई पर जोर दिया।
  • यह फैसला स्पष्ट करता है कि यदि मुकदमे में देरी होती है तो UAPA की Section 43-D(5) अनिश्चित काल के लिए जमानत से इनकार नहीं कर सकती।
  • यह K.A. Najeeb (2021) के फैसले को मजबूत करता है, जिसमें कहा गया था कि UAPA की कठोर जमानत शर्तों को कुछ परिस्थितियों में शिथिल किया जा सकता है।
  • इस फैसले ने हाल के दो-न्यायाधीशों की पीठ के उन फैसलों को अस्वीकृत कर दिया जिन्होंने Najeeb के पूर्ववर्ती की व्याख्या को संकुचित कर दिया था।

परीक्षा तथ्य

  • मामला: Syed Iftikhar Andrabi vs National Investigation Agency।
  • अधिनियम: The Unlawful Activities (Prevention) Act (UAPA), विशेष रूप से Section 43-D(5)।
  • पूर्ववर्ती: K.A. Najeeb (2021) तीन-न्यायाधीशों की पीठ का फैसला।
  • पहले के अस्वीकृत फैसले: Gurwinder Singh (2024) और Gulfisha Fatima।

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