ECI स्थानांतरण विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने शक्तियों और सीमाओं को स्पष्ट किया
Election Commission of India (ECI) ने हाल ही में चुनाव वाले राज्यों, जिनमें पश्चिम बंगाल भी शामिल है, में वरिष्ठ अधिकारियों का स्थानांतरण किया, जिससे विवाद और प्रशासनिक गतिरोध के दावे उत्पन्न हुए। ECI ने संविधान के Article 324 के तहत इन कार्रवाइयों को उचित ठहराया, जिसमें स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के लिए अपनी पूर्ण शक्तियों का हवाला दिया गया। हालांकि, लेख में बताया गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने Mohinder Singh Gill जैसे मामलों में स्पष्ट किया था कि ECI की शक्तियां असीमित नहीं हैं और उन्हें मौजूदा कानूनों के अनुरूप होना चाहिए। कोर्ट ने जोर दिया कि ECI, All India Service अधिकारियों के स्थानांतरण के संबंध में संसदीय कानूनों को दरकिनार नहीं कर सकता है, और उसके कार्य सद्भावपूर्ण (bona fide) होने चाहिए तथा प्राकृतिक न्याय के अधीन होने चाहिए।
मुख्य बिंदु
- ECI द्वारा चुनाव वाले राज्यों में वरिष्ठ राज्य अधिकारियों के हालिया स्थानांतरण ने विवाद और उसकी शक्तियों के बारे में सवाल खड़े किए।
- ECI संविधान के Article 324 के तहत अपनी कार्रवाइयों को उचित ठहराता है, जो उसे चुनावों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण का अधिकार देता है।
- सुप्रीम कोर्ट ने Mohinder Singh Gill मामले में स्पष्ट किया कि ECI की पूर्ण शक्तियां असीमित नहीं हैं और उन्हें मौजूदा कानूनों के भीतर काम करना चाहिए।
- कोर्ट ने कहा कि ECI संसदीय कानूनों को दरकिनार करके या मनमाने ढंग से All India Service अधिकारियों का स्थानांतरण नहीं कर सकता है।
परीक्षा तथ्य
- संवैधानिक अनुच्छेद: Article 324 (चुनावों का अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण)।
- सुप्रीम कोर्ट का मामला: Mohinder Singh Gill and Anr. vs The Chief Election Commissioner, New Delhi and Ors. (1978)।
- All India Services को नियंत्रित करने वाले कानून: All India Services Act और उसके तहत नियम।
- Article 324(6) के अनुसार राज्य/केंद्र सरकार को ECI को कर्मचारी उपलब्ध कराने होंगे।
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