Supreme Court समीक्षा करेगा कि क्या Digital Personal Data Protection Act 2023 सूचना के अधिकार को कमजोर करता है

Supreme Court याचिकाओं को Constitution Bench के पास भेजने के लिए सहमत हो गया है ताकि यह जांचा जा सके कि Digital Personal Data Protection (DPDP) Act, 2023 की Section 44(3), Right to Information (RTI) Act को पंगु बनाती है या नहीं। यह प्रावधान RTI Act की Section 8(1)(j) में संशोधन करता है, जिससे सार्वजनिक अधिकारियों की व्यक्तिगत जानकारी का खुलासा करने पर संभावित 'पूर्ण प्रतिबंध' लग सकता है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यह 'जनहित' (public interest) के अधिभावी प्रभाव और गोपनीयता एवं पारदर्शिता के बीच संतुलन बनाने के लिए Public Information Officers के विवेक को हटा देता है। अदालत यह परिभाषित करेगी कि 'व्यक्तिगत जानकारी' क्या है और क्या यह संशोधन Constitution के Article 19 के तहत सूचना के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करता है।

मुख्य बिंदु

  • DPDP Act 2023 की Section 44(3), RTI Act 2005 की Section 8(1)(j) में संशोधन करती है, जिससे जनहित प्रकटीकरण के प्रावधान को हटा दिया गया है।
  • आलोचकों का तर्क है कि यह संशोधन सार्वजनिक पदाधिकारियों की गोपनीयता को सामान्य नागरिकों के बराबर मानता है, जिससे सरकारी जवाबदेही में बाधा आती है।
  • 2019 के 'CPIO vs Supreme Court' के फैसले ने पहले गोपनीयता और सूचना के अधिकार को संतुलित करने के लिए एक आनुपातिकता परीक्षण (proportionality test) स्थापित किया था।
  • Supreme Court यह निर्धारित करेगा कि क्या यह संशोधन Article 19 के तहत सूचना के अधिकार पर 'अनुचित प्रतिबंध' लगाता है।

परीक्षा तथ्य

  • प्रासंगिक कानून: Digital Personal Data Protection (DPDP) Act, 2023।
  • संशोधित RTI धारा: Section 8(1)(j)।
  • संवैधानिक अनुच्छेद: Article 19 (वाक/सूचना की स्वतंत्रता) और Article 14 (समानता)।
  • प्रमुख मामला: CPIO vs Supreme Court (2019)।

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