राज्यों की स्वायत्तता बहाल करने और संघ-राज्य संबंधों को संतुलित करने के लिए भारतीय संघवाद के संरचनात्मक रीसेट का आह्वान

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री M.K. Stalin ने भारतीय संघवाद के पुनर्गठन का तर्क दिया है, जो विभाजन के बाद के युग के दौरान स्थापित 'केंद्रीकरण के झुकाव' (centralising bias) से दूर जाने की बात करता है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि यद्यपि Constitution संरचना में संघीय है, लेकिन Union Executive अक्सर सूक्ष्म प्रबंधन (micro-management) और concurrent list के कानूनों के माध्यम से राज्य की शक्तियों को दरकिनार कर देता है। लेख S.R. Bommai मामले का हवाला देता है, जिसने संघवाद को Basic Structure का हिस्सा घोषित किया था। Stalin ने स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में राज्य की स्वायत्तता बहाल करने के लिए विभिन्न आयोगों की सिफारिशों को लागू करने का आह्वान किया, जिससे विकेंद्रीकृत शक्ति और राजकोषीय स्वायत्तता के माध्यम से अधिक कुशल संघ और जवाबदेह शासन सुनिश्चित हो सके।

मुख्य बिंदु

  • S.R. Bommai vs Union of India (1994) के फैसले के अनुसार संघवाद संविधान का एक 'Basic Structure' है।
  • केंद्र सरकार पर अधीनस्थ विधान और सूक्ष्म प्रबंधन के माध्यम से राज्य की प्राथमिकताओं को संचालित करने के लिए Concurrent List का उपयोग करने का आरोप है।
  • तमिलनाडु सरकार ने समकालीन संघीय चुनौतियों और संघ-राज्य संबंधों की समीक्षा के लिए Justice Kurian Joseph Committee का गठन किया।
  • Rajamannar (1969), Sarkaria (1983-88), और Punchhi (2007-10) जैसे ऐतिहासिक आयोगों ने पहले शक्तियों के पुनर्संतुलन की सिफारिश की है।

परीक्षा तथ्य

  • प्रमुख मामला: S.R. Bommai vs Union of India (1994)।
  • समितियां: Rajamannar Committee (1969), Sarkaria Commission, Punchhi Commission, Justice Kurian Joseph Committee (2025)।
  • संवैधानिक अवधारणा: Basic Structure Doctrine।

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