EVs के लिए भारत की Advanced Chemistry Cell (ACC) PLI योजना के सामने आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण
Advanced Chemistry Cells (ACC) के लिए भारत की ₹18,100 करोड़ की Production Linked Incentive (PLI) योजना अपने लक्ष्यों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रही है। चीनी आयात पर निर्भरता कम करने के लिए 2021 में शुरू की गई इस योजना का लक्ष्य 2025 तक 50 GWh क्षमता हासिल करना था, लेकिन केवल 1.4 GWh ही चालू किया गया है। प्रमुख बाधाओं में gigafactories के निर्माण के लिए अवास्तविक दो साल की 'gestation periods', कड़े Domestic Value Addition (DVA) आवश्यकताएँ, और लिथियम तथा कोबाल्ट के लिए घरेलू खनिज प्रसंस्करण सुविधाओं की कमी शामिल है। इसके अलावा, चीनी तकनीकी विशेषज्ञों के लिए वीजा अनुमोदन में देरी ने प्रगति में बाधा डाली है, क्योंकि भारत में वर्तमान में सेल निर्माण के लिए कुशल कार्यबल की कमी है।
मुख्य बिंदु
- ACC PLI योजना 'technology agnostic' है, जो Lithium-ion और Sodium-ion जैसी विभिन्न chemistries का समर्थन करती है।
- अक्टूबर 2025 तक, लक्षित 50 GWh क्षमता का केवल 2.8% ही हासिल किया गया है।
- योजना के मूल्यांकन मानदंडों ने पूर्व विनिर्माण अनुभव पर DVA को प्राथमिकता दी, जिससे स्थापित खिलाड़ियों के बजाय नौसिखियों को लाभ हुआ।
- भारत कच्चे माल, तकनीकी क्षमता और विशेष जानकारी के लिए चीन पर अत्यधिक निर्भर है।
परीक्षा तथ्य
- ACC PLI योजना के लिए कुल परिव्यय ₹18,100 करोड़ है।
- लाभार्थियों में Ola Electric, Reliance New Energy और Rajesh Exports शामिल हैं।
- इस योजना के लिए दो साल के भीतर 25% Domestic Value Addition (DVA) और पाँचवें वर्ष तक 60% DVA की आवश्यकता है।
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