ट्राइबल काउंसिल ने ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना के लिए पैतृक भूमि सौंपने के लिए जबरदस्ती का आरोप लगाया

लिटिल और ग्रेट निकोबार में ट्राइबल काउंसिल के सदस्यों ने आरोप लगाया है कि जिला प्रशासन उन पर अपनी पैतृक भूमि के लिए 'समर्पण प्रमाण पत्र' (surrender certificates) पर हस्ताक्षर करने के लिए दबाव डाल रहा है। 92,000 करोड़ रुपये की ग्रेट निकोबार द्वीप मेगा-इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजना के लिए गलाथिया खाड़ी (Galathea Bay) और पेमाया खाड़ी (Pemmaya Bay) में वन भूमि के डायवर्जन की आवश्यकता है। 2004 की सुनामी से पहले इन क्षेत्रों में स्वदेशी निकोबारी समुदाय निवास करता था। काउंसिल का तर्क है कि इस भूमि को सौंपने से भविष्य की पीढ़ियों के लिए कुछ नहीं बचेगा। परियोजना अंतिम मंजूरी के करीब है, लेकिन समर्पण दस्तावेजों के संबंध में पारदर्शिता की कमी ने आदिवासी आबादी के बीच महत्वपूर्ण संकट पैदा कर दिया है।

मुख्य बिंदु

  • ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना 92,000 करोड़ रुपये की एक मेगा-इन्फ्रास्ट्रक्चर पहल है।
  • यह परियोजना निकोबारी और शोंपेन जनजातियों को प्रभावित करती है, जिन्हें अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribes) के रूप में मान्यता प्राप्त है।
  • प्रमुख परियोजना क्षेत्रों में गलाथिया खाड़ी और पेमाया खाड़ी शामिल हैं।
  • आदिवासी सदस्य 2004 की सुनामी से विस्थापित हो गए थे और अपने पैतृक गांवों में लौटने की मांग कर रहे हैं।

परीक्षा तथ्य

  • परियोजना की लागत 92,000 करोड़ रुपये अनुमानित है।
  • 2004 की सुनामी इस क्षेत्र में आदिवासी विस्थापन का संदर्भ बिंदु है।

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