मतदाता सूची से नाम हटाने और नागरिकता सत्यापन शक्तियों पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से सवाल किए

सुप्रीम कोर्ट इस बात की जांच कर रहा है कि क्या केंद्र सरकार के अंतिम निर्णय से पहले नागरिकता पूछताछ के आधार पर Electoral Registration Officers (EROs) व्यक्तियों के नाम मतदाता सूची से हटा सकते हैं। Justices Surya Kant और Joymalya Bagchi की पीठ ने सवाल किया कि क्या ERO का निष्कर्ष किसी व्यक्ति के भारत में रहने के अधिकार की जांच शुरू कर सकता है। Election Commission का तर्क है कि Article 326, Representation of the People Act, और Registration of Electors Rules 1960 उन्हें यह सुनिश्चित करने के लिए ऐसी पूछताछ करने का अधिकार देते हैं कि केवल नागरिक ही सूची में हों। अदालत इन निष्कर्षों के कारण बिना उचित प्रक्रिया के निर्वासन (deportation) की संभावना को लेकर चिंतित है।

मुख्य बिंदु

  • EROs Special Intensive Revisions (SIR) के दौरान नागरिकता की जांच (inquisitorial enquiries) कर रहे हैं।
  • सुप्रीम कोर्ट चिंतित है कि नागरिकता के संदेह के आधार पर मतदाता का नाम हटाने से सरकार के अंतिम निर्णय से पहले उनके अधिकार छिन सकते हैं।
  • Election Commission का मानना है कि नागरिकता चुनावी प्रक्रिया का आधार है और गैर-नागरिकों को वोट देने का अधिकार नहीं है।
  • बताया गया है कि कई राज्यों में SIR प्रक्रिया के दूसरे चरण में लगभग 6.5 करोड़ नाम हटा दिए गए थे।

परीक्षा तथ्य

  • Article 326 (वयस्क भारतीय नागरिकों का मतदान का अधिकार)
  • Registration of Electors Rules 1960
  • Representation of the People Act

पढ़ें। याद रखें। याद करें।

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