सुप्रीम कोर्ट ने UAPA के प्रावधानों के तहत उमर खालिद और शारजील इमाम को जमानत देने से इनकार किया

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश के मामले में कार्यकर्ताओं उमर खालिद और शारजील इमाम को Unlawful Activities (Prevention) Act (UAPA) के कड़े प्रावधानों का हवाला देते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने 'भूमिकाओं का पदानुक्रम' (hierarchy of roles) स्थापित किया, जिसमें 'वैचारिक प्रेरकों' (ideological drivers) को 'स्थानीय स्तर के सुविधाप्रदाताओं' से अलग किया गया। UAPA की Section 43D(5) के तहत, सामान्य आपराधिक कानून की तुलना में जमानत प्राप्त करना काफी कठिन है, क्योंकि अदालत को संतुष्ट होना चाहिए कि आरोप प्रथम दृष्टया (prima facie) सच हैं। फैसले ने Section 15 के तहत 'आतंकवादी कृत्यों' की व्याख्या का विस्तार करते हुए इसमें सड़क नाकाबंदी (चक्का जाम) को भी शामिल किया, जिसका उद्देश्य आवश्यक सेवाओं को बाधित करना या राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा पैदा करना है।

मुख्य बिंदु

  • UAPA की Section 43D(5) जमानत के लिए एक उच्च सीमा निर्धारित करती है, जो सामान्य आपराधिक कानून में पाए जाने वाले 'जमानत, जेल नहीं' के सामान्य सिद्धांत से अलग है।
  • अदालत ने रणनीति तैयार करने वाले 'वैचारिक प्रेरकों' और विरोध प्रदर्शनों के लिए रसद सहायता प्रदान करने वाले 'व्युत्पन्न' (derivative) प्रतिभागियों के बीच अंतर किया।
  • UAPA की Section 15 'आतंकवादी कृत्यों' को व्यापक रूप से परिभाषित करती है, जिसमें भारत की एकता, अखंडता या सुरक्षा को खतरे में डालने के इरादे से किए गए कार्य शामिल हैं।
  • फैसले से पता चलता है कि निरंतर सड़क नाकाबंदी (चक्का जाम) को आतंकवादी कृत्यों के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है यदि वे नागरिक जीवन को बाधित करते हैं या आर्थिक सुरक्षा को खतरा पैदा करते हैं।

परीक्षा तथ्य

  • संबंधित कानून: Unlawful Activities (Prevention) Act (UAPA)।
  • प्रमुख धाराएं: Section 15 (आतंकवादी कृत्य की परिभाषा) और Section 43D(5) (जमानत पर प्रतिबंध)।
  • केस संदर्भ: Union of India बनाम K.A. Najeeb (2021)।

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