वैश्विक जलवायु कार्रवाई पर UN Climate Frameworks से अमेरिका के हटने के निहितार्थ

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संयुक्त राज्य अमेरिका को UN Framework Convention on Climate Change (FCCC) और Intergovernmental Panel on Climate Change (IPCC) से वापस लेने का कदम उठाया है। यह कदम प्रभावी रूप से अमेरिका को पेरिस समझौते सहित मुख्य बहुपक्षीय जलवायु कूटनीति ढांचे से बाहर करता है। इस वापसी से वैश्विक जलवायु वित्त (climate finance) में महत्वपूर्ण कमी आने की संभावना है, क्योंकि अमेरिका अब Green Climate Fund या Global Environment Facility में योगदान नहीं देगा। इसके अलावा, यह IPCC की वैज्ञानिक आम सहमति बनाने की प्रक्रिया को कमजोर करता है और अन्य उच्च-उत्सर्जन वाले देशों को उनकी जलवायु प्रतिबद्धताओं को पूरा करने से हतोत्साहित कर सकता है, जिससे संभावित रूप से वैश्विक जलवायु कार्रवाई में देरी हो सकती है।

मुख्य बिंदु

  • FCCC से हटने से अमेरिका स्वतः ही पेरिस समझौते और वार्षिक COP वार्ताओं से बाहर हो जाता है।
  • अमेरिका ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन और प्रगति ट्रैकिंग के लिए FCCC की रिपोर्टिंग प्रणाली में भाग लेने की अपनी क्षमता खो देगा।
  • यह निकास वैश्विक जलवायु वित्त को कमजोर करता है, विशेष रूप से Green Climate Fund और Global Environment Facility को प्रभावित करता है।
  • यह कदम जलवायु रिपोर्टों के लिए अमेरिकी सरकार द्वारा नामित विशेषज्ञता और फंडिंग को कम करके IPCC के वैज्ञानिक आकलन को प्रभावित करता है।

परीक्षा तथ्य

  • संगठन: UNFCCC (UN Framework Convention on Climate Change) और IPCC (Intergovernmental Panel on Climate Change)।
  • जलवायु वित्त लक्ष्य: 2035 तक प्रति वर्ष कम से कम $300 बिलियन का COP29 लक्ष्य।
  • अनुकूलन अंतर (Adaptation Gap): UN Adaptation Gap Report 2025 ने 2035 तक प्रति वर्ष $310-365 बिलियन की आवश्यकताओं का अनुमान लगाया है।

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