Union Finance Ministry ने 1 फरवरी, 2026 से तंबाकू उत्पादों के लिए एक नई कराधान व्यवस्था की घोषणा की है। Central Excise (Amendment) Act, 2025, नई उत्पाद शुल्क दरों को निर्दिष्ट करता है। Beedis को 18% GST श्रेणी में रखा गया है, जबकि अन्य तंबाकू उत्पाद 40% की श्रेणी में हैं। इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सिगरेट की कीमतें उपभोक्ता की आय की तुलना में तेजी से बढ़ें ताकि इसकी सामर्थ्य (affordability) को कम किया जा सके। इसके अतिरिक्त, तंबाकू पर GST compensation cess समाप्त हो जाएगा, और इसके स्थान पर राष्ट्रीय सुरक्षा कार्यों और स्वास्थ्य पहलों के वित्तपोषण के लिए Health Security se National Security Act, 2025 के तहत एक समर्पित उपकर (cess) लगाया जाएगा।
नई कर व्यवस्था का उद्देश्य उत्पाद शुल्क बढ़ाकर तंबाकू उत्पादों की सामर्थ्य को कम करना है।
Beedis को निष्क्रिय 28% स्लैब से हटाकर 18% GST श्रेणी में लाया गया है, जबकि अन्य उत्पादों पर 40% स्लैब लागू होगा।
Health Security se National Security Act, 2025 के तहत एक नया समर्पित उपकर (cess) GST compensation cess का स्थान लेगा।
परीक्षा बिंदु
प्रभावी तिथि: 1 फरवरी, 2026।
कानून: Central Excise (Amendment) Act, 2025।
नए GST स्लैब: Beedis के लिए 18% और अन्य तंबाकू उत्पादों के लिए 40%।
मध्य प्रदेश के इंदौर में हाल ही में हुई एक त्रासदी, जहाँ नगर निगम द्वारा आपूर्ति किए गए दूषित पानी से मौतें और बीमारियाँ हुईं, भारत के जल प्रबंधन में महत्वपूर्ण कमियों को उजागर करती है। Swachh Bharat Mission और Jal Jeevan Mission के तहत प्रगति के बावजूद, बुनियादी ढांचे के मुद्दे और निगरानी की कमी बनी हुई है। भारत के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में चुने गए इंदौर को आपूर्ति लाइनों में संदिग्ध संदूषण के कारण इस संकट का सामना करना पड़ा। लेख इस बात पर जोर देता है कि गुणवत्ता आश्वासन के बिना पानी तक पहुँच अर्थहीन है। यह जल-जनित बीमारियों को रोकने के लिए जल दिशानिर्देशों के सख्त प्रवर्तन, पुराने बुनियादी ढांचे की मरम्मत और नियमित रासायनिक और सीवेज संदूषक जांच का आह्वान करता है।
इंदौर में दूषित पानी के कारण कई मौतें हुईं और 200 से अधिक लोग अस्पताल में भर्ती हुए, जो शहरी बुनियादी ढांचे की विफलताओं को दर्शाता है।
National Family Health Survey के आंकड़े बताते हैं कि 96% परिवार बेहतर जल स्रोतों का उपयोग करते हैं, लेकिन गुणवत्ता अभी भी एक चिंता का विषय है।
यह संकट सभी स्तरों पर जल दिशानिर्देशों और पर्यावरणीय कानूनों के बेहतर प्रवर्तन की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
परीक्षा बिंदु
घटना का स्थान: इंदौर, मध्य प्रदेश।
संबंधित मिशन: Swachh Bharat Mission और Jal Jeevan Mission।
NFHS डेटा: 96% परिवार पीने के पानी के 'बेहतर स्रोत' (improved source) का उपयोग करते हैं।
रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने घोषणा की कि 'Sudarshan Chakra' पहल में Defence Research and Development Organisation (DRDO) की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। PM Modi द्वारा घोषित इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य अगले दशक में व्यापक हवाई सुरक्षा के लिए पूरे भारत में महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को उन्नत, स्वदेशी वायु रक्षा प्रणालियों से लैस करना है। यह पहल विकसित होते हवाई खतरों के खिलाफ तैयारी को मजबूत करने पर केंद्रित है। मंत्री ने Operation Sindoor के दौरान स्वदेशी क्षमताओं की सफलता पर प्रकाश डाला और DRDO से भविष्य के युद्ध क्षेत्रों में तैयारी सुनिश्चित करने के लिए नवाचार, डीप टेक और अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकियों पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया।
Sudarshan Chakra पहल का उद्देश्य महत्वपूर्ण राष्ट्रीय प्रतिष्ठानों के लिए व्यापक हवाई सुरक्षा प्रदान करना है।
DRDO को अगले दस वर्षों में उन्नत स्वदेशी वायु रक्षा प्रणालियों को विकसित करने और तैनात करने का कार्य सौंपा गया है।
यह परियोजना रक्षा में आत्मनिर्भरता (Atmanirbharta) और आधुनिक हवाई खतरों के खिलाफ तैयारी पर जोर देती है।
परीक्षा बिंदु
पहल का नाम: Sudarshan Chakra।
प्रमुख संगठन: Defence Research and Development Organisation (DRDO)।
भारत में ट्रांसजेंडर पुरुष और लिंग-विविध व्यक्ति स्वास्थ्य सेवा में महत्वपूर्ण बाधाओं का सामना करते हैं, जिनमें निर्णयात्मक दृष्टिकोण और गलत लिंग से संबोधित करने (misgendering) से लेकर देखभाल से पूरी तरह इनकार करना शामिल है। तमिलनाडु जैसे राज्यों में प्रगतिशील नीतियों के बावजूद, कई स्वास्थ्य पेशेवरों में ट्रांसजेंडर पहचान के बारे में जागरूकता और प्रशिक्षण की कमी है। इससे बिना निगरानी वाली हार्मोनल थेरेपी की स्थिति पैदा होती है, क्योंकि किफायती एंडोक्रिनोलॉजिस्ट की अनुपलब्धता के कारण व्यक्ति अक्सर स्वयं दवा (self-medicate) लेते हैं। लेख ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए गरिमापूर्ण और साक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करने के लिए चिकित्सा पेशेवरों के व्यवस्थित प्रशिक्षण, मानकीकृत प्रोटोकॉल के अनुप्रयोग और समुदाय-आधारित देखभाल मॉडल का आह्वान करता है।
ट्रांस पुरुषों के लिए स्वास्थ्य सेवा सीमित अनुसंधान, पहचान की खराब समझ और 'एक ही मॉडल सबके लिए' (one-size-fits-all) के कारण बाधित होती है।
पेशेवर मार्गदर्शन की कमी के कारण जोखिम भरी बिना निगरानी वाली हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी और स्व-दवा की स्थिति पैदा होती है।
चिकित्सा पेशेवर अक्सर ट्रांस पुरुषों को पितृसत्तात्मक और प्रजनन-उन्मुख दृष्टिकोण से देखते हैं, जिससे अनैतिक प्रथाएं जन्म लेती हैं।
परीक्षा बिंदु
संबंधित कानून: Transgender Persons (Protection of Rights) Act, 2019।
प्रगतिशील नीतियों के लिए उल्लेखित राज्य: तमिलनाडु।
भारत जलवायु परिवर्तन के कारण खाद्य सुरक्षा में गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है, क्योंकि इसका 51% शुद्ध बोया गया क्षेत्र वर्षा आधारित है और मौसम की परिवर्तनशीलता के प्रति संवेदनशील है। जलवायु-अनुकूल कृषि (CRA) पर्यावरण की रक्षा करते हुए उत्पादकता बढ़ाने के लिए जैव प्रौद्योगिकी, AI-संचालित उपकरणों और जीनोम-संपादित फसलों और जैव उर्वरकों जैसे टिकाऊ प्रथाओं को एकीकृत करती है। हालांकि 'National Innovations in Climate Resilient Agriculture' (NICRA) और BioE3 policy जैसी पहल मौजूद हैं, लेकिन CRA को बड़े पैमाने पर लागू करने के लिए एक सुसंगत राष्ट्रीय रोडमैप की आवश्यकता है। इसमें लचीली खेती तकनीकों को व्यापक रूप से अपनाने के लिए छोटे किसानों की सीमित पहुंच, जैव-इनपुट में गुणवत्ता की विसंगतियों और डिजिटल विभाजन जैसी बाधाओं को दूर करना शामिल है।
CRA रासायनिक इनपुट पर निर्भरता कम करने और गर्मी तथा सूखे के प्रति फसल प्रतिरोध में सुधार करने के लिए जैव प्रौद्योगिकी और AI का उपयोग करता है।
भारत का लगभग 51% शुद्ध बोया गया क्षेत्र वर्षा आधारित है, जो इसे जलवायु-प्रेरित उपज के उतार-चढ़ाव के प्रति अत्यधिक संवेदनशील बनाता।
BioE3 policy जैव प्रौद्योगिकी आधारित समाधानों और सतत विकास के लिए CRA को एक प्रमुख विषयगत क्षेत्र के रूप में रखती है।
परीक्षा बिंदु
कार्यक्रम: National Innovations in Climate Resilient Agriculture (NICRA), 2011 में शुरू किया गया।
नीति: BioE3 policy।
आंकड़ा: भारत का 51% शुद्ध बोया गया क्षेत्र वर्षा आधारित है।
अरावली पहाड़ियों को उन 'रणनीतिक छूटों' से खतरा है जो महत्वपूर्ण खनिजों के खनन के लिए पर्यावरणीय जांच को दरकिनार करती हैं। हालांकि Supreme Court ने खनन को प्रतिबंधित करने के लिए 'अरावली पहाड़ियों' और 'अरावली श्रृंखला' को परिभाषित करने की कोशिश की है, लेकिन सरकार अक्सर 'राष्ट्रीय रक्षा' या 'रणनीतिक विचारों' के लिए कार्यकारी विवेक का उपयोग करती है। Forest (Conservation) Act में 2023 के संशोधन ने छूट के दायरे को और बढ़ा दिया है। यह भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं और लिथियम और दुर्लभ-पृथ्वी तत्वों (rare-earth elements) जैसे खनिजों की औद्योगिक मांग के बीच संघर्ष पैदा करता है। विशेषज्ञों का तर्क है कि इन संघर्षों के समाधान के लिए एक पारदर्शी ढांचे की आवश्यकता है, जो सतत विकास और अरावली की महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करे।
अरावली पहाड़ियाँ भूजल पुनर्भरण और मरुस्थलीकरण को रोकने के लिए महत्वपूर्ण हैं, लेकिन अवैध खनन और शहरी विस्तार के दबाव का सामना कर रही हैं।
हालिया कानूनी लड़ाई खनन निषेध को लागू करने के लिए अरावली के भौगोलिक विस्तार को परिभाषित करने पर केंद्रित है।
Forest (Conservation) Amendment Act, 2023, 'रणनीतिक' और 'सुरक्षा संबंधी' परियोजनाओं के लिए व्यापक छूट प्रदान करता है।
परीक्षा बिंदु
संबंधित कानून: Forest (Conservation) Amendment Act, 2023।
शामिल खनिज: लिथियम, दुर्लभ-पृथ्वी तत्व (rare-earth elements), टंगस्टन।
न्यायालय: Supreme Court of India (20 नवंबर और 23 दिसंबर के आदेश)।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुवाहाटी और कोलकाता के बीच पहली Vande Bharat स्लीपर ट्रेन को हरी झंडी दिखाने के लिए तैयार हैं। 180 किमी प्रति घंटे की गति के लिए डिज़ाइन की गई इस 16-कोच वाली ट्रेन में 'Kavach' टक्कर-रोधी प्रणाली जैसे उन्नत सुरक्षा उपाय हैं। साथ ही, रेल मंत्री Ashwini Vaishnaw ने घोषणा की कि भारत की पहली बुलेट ट्रेन (मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल) अगस्त 2027 तक तैयार होने की उम्मीद है। 508 किमी का यह कॉरिडोर 320 किमी प्रति घंटे की गति से संचालित होगा, जिससे यात्रा का समय घटकर दो घंटे रह जाएगा। मार्ग के चरणबद्ध उद्घाटन के लिए वायडक्ट्स, पुलों और सुरंगों पर महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।
गुवाहाटी-कोलकाता Vande Bharat स्लीपर ट्रेन अपनी तरह की पहली ट्रेन है, जो लंबी दूरी के यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को बढ़ाती है।
स्वदेशी रूप से विकसित स्वचालित ट्रेन सुरक्षा तकनीक 'Kavach' प्रणाली को नई Vande Bharat ट्रेनों में एकीकृत किया गया है।
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना का लक्ष्य अगस्त 2027 तक पूरा होना है, जिसकी शुरुआत चरणबद्ध उद्घाटन से होगी।
परीक्षा बिंदु
Vande Bharat मार्ग: गुवाहाटी से कोलकाता।
बुलेट ट्रेन पूरा होने का लक्ष्य: अगस्त 2027।
बुलेट ट्रेन की गति: 320 किमी प्रति घंटा।
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