जलवायु जोखिमों और बुनियादी ढांचे की वास्तविकताओं को संबोधित करने में वैश्विक Urban Liveability Indices की सीमाएं

यह लेख UN-Habitat City Prosperity Index और Global Liveability Index जैसे लोकप्रिय शहरी मेट्रिक्स की आलोचना करता है। यह तर्क देता है कि ये सूचकांक अक्सर स्थिरता, स्वास्थ्य सेवा और संस्कृति पर ध्यान केंद्रित करते हैं, जबकि चरम मौसम की घटनाओं के प्रति शहर के लचीलेपन (resilience) की अनदेखी करते हैं। उदाहरण के लिए, चेन्नई या बैंकॉक जैसे शहर कनेक्टिविटी पर अच्छा स्कोर कर सकते हैं लेकिन उनमें 21वीं सदी की भारी बारिश के लिए पर्याप्त जल निकासी की कमी हो सकती है। लेखक का सुझाव है कि ये सूचकांक एक 'आधुनिकता' का पक्षपात (modernity bias) पैदा करते हैं, जहां हवाई अड्डों जैसे दृश्यमान बुनियादी ढांचे को नहरों से गाद निकालने या बाढ़ प्रवण क्षेत्रों में बिल्डिंग कोड लागू करने जैसे आवश्यक लेकिन 'अदृश्य' कार्यों पर प्राथमिकता दी जाती है, जिससे निवेश की प्राथमिकताएं बिगड़ जाती हैं।

मुख्य बिंदु

  • वर्तमान रहने योग्य सूचकांक (liveability indices) यह हिसाब लगाने में विफल रहते हैं कि कोई शहर बाढ़ या लू (heatwaves) जैसे जलवायु झटकों को कितनी अच्छी तरह सहन कर सकता है।
  • एक 'आधुनिकता' का पक्षपात है जो लचीली शहरी योजना और रखरखाव के बजाय दृश्यमान बुनियादी ढांचे का पक्ष लेता है।
  • सूचकांक अक्सर शहर-व्यापी औसत का उपयोग करते हैं, जो बाढ़ प्रवण क्षेत्रों में कम आय वाले निवासियों की संवेदनशीलता को छिपा देते हैं।
  • अंतरराष्ट्रीय फंडिंग अक्सर इन त्रुटिपूर्ण संकेतकों से जुड़ी होती है, जो अस्थिर शहरी विकास पैटर्न को मजबूत करती है।

परीक्षा तथ्य

  • UN-Habitat City Prosperity Index और Global Liveability Index चर्चा किए गए प्रमुख शहरी मेट्रिक्स हैं।
  • City Resilience Index इस बात पर ध्यान केंद्रित करता है कि शहर चरम मौसम जैसे झटकों को कितनी अच्छी तरह सहन करते हैं।
  • लेख इस बात पर प्रकाश डालता है कि कई 'आधुनिक' शहरों में 24 घंटों में 300 मिमी बारिश को संभालने में सक्षम जल निकासी प्रणालियों की कमी है।

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