Supreme Court और NHRC ने कुष्ठ रोग से प्रभावित व्यक्तियों के खिलाफ भेदभावपूर्ण कानूनों को हटाने पर जोर दिया
भारत का Supreme Court उन 97 केंद्रीय और राज्य कानूनों को हटाने की याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है जिनमें अभी भी कुष्ठ रोग (leprosy) से प्रभावित लोगों के खिलाफ भेदभावपूर्ण प्रावधान हैं। ये 'प्राचीन' कानून सार्वजनिक परिवहन तक पहुंच, चुनाव लड़ने के अधिकार और रोजगार को प्रतिबंधित करते हैं। National Human Rights Commission (NHRC) ने अपमानजनक शब्दावली को बदलने और Aadhaar नामांकन के लिए आईरिस स्कैन (iris scans) का उपयोग करने की सिफारिश की है, क्योंकि कुष्ठ रोग से होने वाली तंत्रिका क्षति अक्सर उंगलियों के पोरों को प्रभावित करती है। चूंकि कुष्ठ रोग अब आधुनिक चिकित्सा से पूरी तरह से साध्य और गैर-संक्रामक है, इसलिए अदालत ने राज्यों को इन कलंकों को खत्म करने और मौलिक अधिकार सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों पर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है।
मुख्य बिंदु
- भारत में दुनिया के लगभग 57% कुष्ठ रोग के मामले दर्ज होते हैं, जो Mycobacterium leprae बैक्टीरिया के कारण होता है।
- Multi-Drug Therapy (MDT) के साथ कुष्ठ रोग के साध्य और गैर-संक्रामक होने के बावजूद भेदभावपूर्ण कानून बने हुए हैं।
- NHRC ने Aadhaar के लिए आईरिस स्कैन के उपयोग की वकालत की है क्योंकि कुष्ठ रोग अक्सर संवेदना की हानि और उंगलियों के पोरों को नुकसान पहुंचाता है।
- Supreme Court के हस्तक्षेप का उद्देश्य प्रभावित व्यक्तियों के लिए गरिमा और मौलिक अधिकारों तक समान पहुंच सुनिश्चित करना है।
परीक्षा तथ्य
- Mycobacterium leprae कुष्ठ रोग का कारक एजेंट है।
- NHRC द्वारा 97 केंद्रीय और राज्य कानूनों को भेदभावपूर्ण के रूप में पहचाना गया है।
- वर्तमान स्वास्थ्य आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक कुष्ठ रोग के मामलों में भारत की हिस्सेदारी 57% है।
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