CBI को जांच स्थानांतरित करने में न्यायिक सिद्धांत और चुनौतियां
यह विश्लेषण राज्य-स्तरीय जांच को Central Bureau of Investigation (CBI) को स्थानांतरित करने के संबंध में कानूनी ढांचे और न्यायिक सावधानी का परीक्षण करता है। करूर भगदड़ मामले को संदर्भ के रूप में उपयोग करते हुए, लेख इस बात पर प्रकाश डालता है कि Supreme Court, CBI हस्तांतरण को 'अंतिम उपाय' (measure of last resort) के रूप में देखता है, जो केवल उन असाधारण स्थितियों के लिए आरक्षित है जहां स्थानीय जांच की अखंडता से समझौता किया गया हो। Delhi Special Police Establishment (DSPE) Act, 1946 के तहत स्थापित CBI को जांच के लिए राज्य की सहमति की आवश्यकता होती है, हालांकि अदालतें Articles 32 या 226 के तहत इसे ओवरराइड कर सकती हैं। न्यायपालिका इस बात पर जोर देती है कि हस्तांतरण पक्षपात के प्रथम दृष्टया साक्ष्य (prima facie evidence) पर आधारित होना चाहिए, न कि केवल आरोपों पर।
मुख्य बिंदु
- CBI को अंतर-राज्यीय या राष्ट्रीय प्रभाव वाले अपराधों के लिए एक प्रमुख जांच निकाय माना जाता है।
- State List (Schedule VII) की Entry 1 और Entry 2 के तहत कानून और व्यवस्था के लिए राज्य सरकारें प्राथमिक रूप से जिम्मेदार हैं।
- अदालत द्वारा आदेशित CBI जांच कोई 'नियमित मामला' नहीं है और इसके लिए राज्य मशीनरी की विफलता के संबंध में उच्च स्तर के प्रमाण की आवश्यकता होती है।
- Supreme Court ने पर्याप्त सबूतों के बिना राज्य पुलिस पर आक्षेप लगाने के लिए CBI हस्तांतरण का उपयोग करने के खिलाफ चेतावनी दी है।
परीक्षा तथ्य
- Delhi Special Police Establishment (DSPE) Act, 1946.
- संविधान के Articles 32 और 226.
- Schedule VII (State List) Entry 1 (Public Order) और Entry 2 (Police)।
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