Supreme Court ने Bills को सहमति देने के लिए Governor की शक्तियों और समय सीमा की समीक्षा की
Supreme Court एक Presidential Reference की सुनवाई कर रहा है ताकि State Assemblies द्वारा पारित Bills को सहमति देने की समय सीमा के संबंध में Governors की संवैधानिक स्थिति को स्पष्ट किया जा सके। यह 8 April, 2025 के एक महत्वपूर्ण निर्णय के बाद आया है। Bench ने इस बात पर जोर दिया कि Articles 200 और 201 में विशिष्ट समय सीमा पर संविधान की चुप्पी Governors को अनिश्चित काल के लिए Bills को रोकने का 'असीमित विवेक' (unlimited discretion) नहीं देती है। कार्यवाही लोकतांत्रिक सिद्धांतों और कानून पर नियंत्रण के रूप में Governor की भूमिका के बीच तनाव को उजागर करती है। Court का लक्ष्य संघीय सहयोग और State autonomy के बीच संतुलन बनाए रखना है।
मुख्य बिंदु
- भारतीय संविधान के Articles 200 और 201 Bills को सहमति देने या रोकने की Governor की शक्ति से संबंधित हैं।
- Supreme Court ने स्पष्ट किया कि Governors अनिश्चित काल तक Bills को दबाकर नहीं रख सकते, क्योंकि यह लोकतांत्रिक शासन को पंगु बनाता है और विधानसभाओं को निष्क्रिय कर देता है।
- कार्यवाही में Article 143 के तहत एक Presidential Reference शामिल है, जो Centre को Court की सलाहकार राय (advisory opinion) प्रदान करता है।
- Court ने उल्लेख किया कि judicial review, Article 356 (President's Rule) के तहत Governors की सिफारिशों पर लागू होता है, जो Article 200 के लिए भी इसी तरह की निगरानी का सुझाव देता है।
परीक्षा तथ्य
- Article 200: Governor द्वारा Bills को सहमति।
- Article 201: President के विचार के लिए आरक्षित Bills।
- Article 143: Power of President to consult Supreme Court (Advisory Jurisdiction)।
- Article 141: Supreme Court द्वारा घोषित कानून सभी अदालतों पर बाध्यकारी होगा।
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