Right to Information और पारदर्शिता पर Digital Personal Data Protection Act का प्रभाव

यह लेख चर्चा करता है कि कैसे Digital Personal Data Protection (DPDP) Act, 2023, Right to Information (RTI) Act के दायरे को महत्वपूर्ण रूप से संकुचित करता है। RTI Act की Section 8(1)(j) में संशोधन करके, DPDP Act 'व्यक्तिगत जानकारी' की परिभाषा को व्यापक बनाता है, जिससे Public Information Officers (PIOs) के लिए अनुरोधों को अस्वीकार करना आसान हो जाता है। आलोचकों का तर्क है कि यह RTI को 'सूचना से इनकार करने के अधिकार' में बदल देता है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही कमजोर होती है। यह संशोधन व्यक्तिगत जानकारी के लिए 'व्यापक सार्वजनिक हित' परीक्षण को हटा देता है, जो संभावित रूप से भ्रष्ट अधिकारियों और फर्जी कर्मचारियों को सार्वजनिक जांच से बचा सकता है, जिससे संविधान के तहत गारंटीकृत सूचना के मौलिक अधिकार को खतरा पैदा हो सकता है।

मुख्य बिंदु

  • DPDP Act, RTI Act की Section 8(1)(j) में संशोधन करता है, उस प्रावधान को हटाता है जो प्रकटीकरण की अनुमति देता था यदि यह व्यापक सार्वजनिक हित में हो।
  • 'व्यक्तिगत जानकारी' की नई परिभाषा अत्यंत व्यापक है, जो संभावित रूप से किसी व्यक्ति से संबंधित लगभग किसी भी डेटा को कवर करती है।
  • यह बदलाव संविधान के Article 19(1)(a) के तहत गारंटीकृत सूचना के मौलिक अधिकार के लिए खतरा है।
  • पारदर्शिता समर्थकों को डर है कि यह संशोधन भ्रष्टाचार की निगरानी और सार्वजनिक सेवाओं के वितरण में बाधा डालेगा।

परीक्षा तथ्य

  • RTI Act की Section 8(1)(j)।
  • Digital Personal Data Protection (DPDP) Act, 2023।
  • Justice K.S. Puttaswamy (Retd) vs Union Of India (निजता का निर्णय)।
  • संविधान का Article 19(1)(a)।

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