NIRF Rankings 2025: उच्च शिक्षा में गुणवत्ता, समानता और आउटरीच मापदंडों की खामियों को दूर करना
National Institutional Ranking Framework (NIRF) 2025 के परिणाम बताते हैं कि पुराने सार्वजनिक संस्थान अभी भी हावी हैं, लेकिन रैंकिंग पद्धति को महत्वपूर्ण आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। मुख्य मुद्दों में 'peer perception' की व्यक्तिपरक प्रकृति और 'Outreach and Inclusivity' (OI) मापदंड को अपर्याप्त प्राथमिकता देना शामिल है। जबकि OI का उद्देश्य क्षेत्रीय, लिंग और सामाजिक-आर्थिक विविधता को ध्यान में रखना है, वर्तमान डेटा अक्सर आर्थिक रूप से पिछड़े पृष्ठभूमि के छात्रों या विकलांग व्यक्तियों को छोड़ देता है। लेख NIRF की व्यापक समीक्षा का तर्क देता है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि यह केवल निजी संस्थानों के लिए ब्रांडिंग टूल के रूप में सेवा करने के बजाय वास्तविक गुणवत्ता और समानता को बढ़ावा दे।
मुख्य बिंदु
- NIRF पांच मापदंडों के आधार पर संस्थानों का मूल्यांकन करता है: Teaching, Research, Graduation Outcomes, Outreach & Inclusivity, और Perception.
- 'Peer Perception' मापदंड, जिसमें 10% वेटेज है, की आलोचना की जाती है क्योंकि यह प्रभाव के प्रति संवेदनशील है और स्थापित प्रतिष्ठा का पक्ष लेता है।
- 'Outreach and Inclusivity' घटक में आर्थिक रूप से वंचित छात्रों और विकलांग व्यक्तियों पर व्यापक डेटा की कमी है।
- 58% से अधिक प्रबंधन संस्थानों ने शून्य शोध प्रकाशन (research publications) की सूचना दी, जो शीर्ष स्तर के स्कूलों के बाहर शैक्षणिक आउटपुट में एक बड़े अंतर को उजागर करता है।
परीक्षा तथ्य
- NIRF को 2016 में Ministry of Education द्वारा लॉन्च किया गया था।
- भाग लेने वाले संस्थानों की संख्या 2016 में 3,565 से बढ़कर 2025 में 14,163 हो गई।
- Outreach and Inclusivity (OI) मापदंड का वेटेज: कुल स्कोर का 10%।
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