Supreme Court ने RTE Act से अल्पसंख्यक स्कूलों की छूट के प्रश्न को बड़ी बेंच के पास भेजा
Supreme Court की दो न्यायाधीशों की बेंच ने इस प्रश्न को एक बड़ी बेंच के पास भेज दिया है कि क्या अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान Right to Education (RTE) Act, 2009 से पूरी तरह मुक्त हैं। यह संदर्भ 2014 के संविधान पीठ के फैसले (Pramati case) को चुनौती देता है जिसने अल्पसंख्यक स्कूलों को Section 12(1)(c) के तहत वंचित बच्चों के लिए 25% आरक्षण प्रदान करने से छूट दी थी। Justice Dipankar Datta ने टिप्पणी की कि अल्पसंख्यक दर्जा कभी-कभी सार्वभौमिक प्रारंभिक शिक्षा और Article 21A के जनादेश को 'धता बताने का माध्यम' बन गया है, जिससे सामान्य स्कूली शिक्षा की दृष्टि खंडित हो रही है।
मुख्य बिंदु
- अदालत इस बात पर पुनर्विचार कर रही है कि क्या अल्पसंख्यक संस्थानों को वंचित समूहों के लिए 25% आरक्षण से छूट दी जानी चाहिए।
- Justice Dipankar Datta ने उल्लेख किया कि 2014 के Pramati फैसले ने सार्वभौमिक प्रारंभिक शिक्षा की नींव को खतरे में डाल दिया होगा।
- यह संदर्भ स्कूल विभागों द्वारा अल्पसंख्यक स्कूलों में शिक्षकों के लिए TET योग्यता पर जोर देने के खिलाफ अपीलों से उपजा है।
- Article 21A शिक्षा में समावेशिता और सार्वभौमिकता की कल्पना करता है, जिसके बारे में कुछ लोगों का तर्क है कि इन छूटों से यह कमजोर होता है।
परीक्षा तथ्य
- संविधान का Article 21A
- RTE Act, 2009 की Section 12(1)(c)
- Pramati Educational and Cultural Trust case (2014)
- Teachers Eligibility Test (TET)
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