भारत के संघीय ढांचे का संवैधानिक महत्व और Jammu and Kashmir की स्थिति
Supreme Court वर्तमान में Jammu and Kashmir को राज्य का दर्जा बहाल करने के मुद्दे की जांच कर रहा है, जो भारत के संघीय ढांचे के महत्व को रेखांकित करता है। Article 1 के तहत, भारत 'राज्यों का एक संघ' (Union of States) है, जो संघीय और एकात्मक विशेषताओं को जोड़ने वाली एक अनूठी प्रणाली है। जबकि Article 3 संसद को राज्यों के पुनर्गठन की अनुमति देता है, संघवाद (federalism) को संविधान के 'बुनियादी ढांचे' (Basic Structure) के हिस्से के रूप में मान्यता प्राप्त है। लेख का तर्क है कि एक मजबूत संघीय ढांचे के बिना, Article 83(1) के तहत Rajya Sabha की स्थायी स्थिति अपना उद्देश्य खो देगी। राज्य के दर्जे की बहाली को नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा और संघ की अखंडता बनाए रखने के लिए आवश्यक माना जाता है।
मुख्य बिंदु
- Supreme Court ने J&K के राज्य के दर्जे की समयसीमा के संबंध में केंद्र से विस्तृत जवाब मांगा है।
- Article 1 भारत को विनाशकारी राज्यों के अविनाशी संघ के रूप में परिभाषित करता है, जो 'Federation' के बजाय 'Union' पर जोर देता है।
- संघवाद संविधान के बुनियादी ढांचे का एक हिस्सा है, जिसका अर्थ है कि इसे संसद द्वारा कम नहीं किया जा सकता है।
- Rajya Sabha संघीय स्तर पर राज्यों का प्रतिनिधित्व करती है और राज्यों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए एक स्थायी सदन है।
परीक्षा तथ्य
- प्रासंगिक अनुच्छेद: Article 1 (Union of States), Article 3 (State Reorganization), Article 83(1) (Rajya Sabha)।
- कानूनी मामला: Zahoor Ahmed Bhat बनाम UT of Jammu and Kashmir।
- संवैधानिक सिद्धांत: Basic Structure Doctrine।
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