2027 की जनगणना के प्रश्नों की गोपनीयता और दायरे को लेकर चिंताएं जताई गईं
भारत की 2027 की जनगणना के लिए प्रस्तावित प्रश्नावली में बैंक खाता नंबर, आधार, वोटर आईडी और कोविड-19 टीकाकरण इतिहास जैसे व्यापक व्यक्तिगत विवरणों को कवर करने वाले 40 प्रश्न शामिल हैं, जिससे गोपनीयता और डेटा संग्रह के आदेशों को लेकर चिंताएं पैदा हो गई हैं। आलोचकों और विशेषज्ञों का तर्क है कि जनसांख्यिकीय आवश्यकताओं से परे डेटा एकत्र करने से जनगणना के संचालन और NPR जैसे जनसंख्या रजिस्टरों के बीच की रेखा धुंधली हो सकती है। गणनाकारों पर बढ़े हुए कार्यभार, 'उपलब्ध' जैसे शब्दों की अस्पष्टता और वैधानिक गोपनीयता सिद्धांतों के संभावित उल्लंघनों के बारे में भी चिंताएं जताई गई हैं।
मुख्य बिंदु
- 2027 की जनगणना की प्रश्नावली में बैंक खातों, आधार, वोटर आईडी और स्वास्थ्य इतिहास जैसे नए मापदंडों को कवर करने वाले 40 प्रश्न शामिल हैं।
- आलोचकों ने चेतावनी दी है कि जनगणना की गिनती को NPR जैसे जनसंख्या रजिस्टर अपडेट के साथ मिलाने से वैधानिक गोपनीयता गारंटी से समझौता करने का जोखिम है।
- कानूनी विशेषज्ञों का प्रकाश है कि जनगणना अधिनियम (Census Act) जनसंख्या रजिस्टरों को स्थापित करने के लिए डेटा एकत्र करने का आदेश नहीं देता है, जिससे प्रशासनिक और गोपनीयता संबंधी चिंताएं बढ़ती हैं।
- व्यापक प्रश्नों को शामिल करने से गणनाकारों के लिए कार्यभार और तार्किक जटिलता काफी बढ़ जाती है।
परीक्षा तथ्य
- 2027 की जनगणना की प्रश्नावली में 40 अलग-अलग प्रश्न शामिल हैं।
- आधिकारिक सांख्यिकी के संयुक्त राष्ट्र के मौलिक सिद्धांतों का सिद्धांत 6 व्यक्तिगत जानकारी की सख्त गोपनीयता पर जोर देता है।
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