सुप्रीम कोर्ट ने EVM में मतदाता पहचान को रोकने के लिए टोटलइज़र की मांग वाली जनहित याचिका पर विचार किया

सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) में 'टोटलइज़र' की शुरुआत की वकालत करने वाली एक जनहित याचिका (PIL) पर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग से जवाब मांगा। टोटलइज़र बूथ-वार मतदान पैटर्न की पहचान और मतदाता डराने-धमकाने को रोकने के लिए कई मतदान केंद्रों पर डाले गए वोटों को एकत्रित करते हैं। हालांकि याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि टोटलइज़र चुनावी गोपनीयता सुनिश्चित करते हैं, लेकिन केंद्र और चुनाव आयोग ने गिनती की प्रक्रिया में प्रशासनिक, तार्किक और कानूनी चुनौतियों के कारण ऐतिहासिक रूप से इनका विरोध किया है।

मुख्य बिंदु

  • सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और चुनाव आयोग से EVM वोटों की गिनती के लिए टोटलइज़र शुरू करने की याचिका पर जवाब मांगा।
  • टोटलइज़र बूथ-वार मतदाता पहचान और डराने-धमकाने से बचने के लिए कई मतदान बूथों के वोटों को मिलाते हैं।
  • चुनाव आयोग और केंद्र ने पहले तार्किक और कानूनी बाधाओं का हवाला देते हुए टोटलइज़र का विरोध किया है।
  • याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि बूथ-वार खुलासे से उम्मीदवारों को कम समर्थन वाले क्षेत्रों में मतदाताओं को निशाना बनाने की अनुमति मिलती है।

परीक्षा तथ्य

  • यह PIL योगेश गुप्ता और इमरान खान द्वारा दायर की गई थी, जिसमें एक निर्वाचन क्षेत्र के सभी 14 मतदान बूथों के लिए टोटलइज़र की मांग की गई थी।
  • टोटलइज़र भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ECIL) द्वारा विकसित किए गए थे।

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