ECI के Special Intensive Revision से तेलंगाना और कर्नाटक में बड़े पैमाने पर मतदाता हटाए गए
Election Commission of India (ECI) की Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया के परिणामस्वरूप तेलंगाना में लगभग 22% और कर्नाटक में 19.5% मतदाताओं को हटा दिया गया है। ये 'अमानवीय कटौती' विशेष रूप से राजधानी शहरों में बहुत अधिक है, जिससे मताधिकार से वंचित होने की चिंताएं बढ़ गई हैं। लेख ECI की अपारदर्शिता की आलोचना करता है, जिसमें मतदाता-से-जनसंख्या अनुपात और लिंग-वार हटाए गए मतदाताओं का विवरण प्रकाशित करने में उसकी विफलता का उल्लेख किया गया है, जिससे सत्यापन कठिन हो गया है। यह इस बात पर प्रकाश डालता है कि यह प्रक्रिया, जो मतदाताओं पर जिम्मेदारी डालती है, इस तरह की बड़े पैमाने पर कटौती की ओर ले जाती है, जो सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के संरक्षक के रूप में ECI की भूमिका पर सवाल उठाती है।
मुख्य बिंदु
- ECI के Special Intensive Revision (SIR) के कारण तेलंगाना (22%) और कर्नाटक (19.5%) में बड़ी संख्या में मतदाताओं को हटा दिया गया है।
- मताधिकार से वंचित होने की चिंताएं बढ़ गई हैं, खासकर बेंगलुरु के कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में आधे से अधिक मतदाताओं को हटा दिया गया है।
- ECI की अपारदर्शिता की आलोचना की जाती है, जो अनिवार्य मतदाता-से-जनसंख्या अनुपात और लिंग-वार हटाए गए मतदाताओं का विवरण प्रकाशित करने में विफल रहा है।
- यह प्रक्रिया सत्यापन का बोझ मतदाताओं पर डालती है, जिससे बड़े पैमाने पर कटौती होती है।
- लेख इन परिणामों को देखते हुए सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के प्रति ECI की प्रतिबद्धता पर सवाल उठाता है।
परीक्षा तथ्य
- प्रक्रिया: Election Commission of India (ECI) द्वारा Special Intensive Revision (SIR)।
- हटाए गए मतदाता: तेलंगाना में लगभग 22%, कर्नाटक में 19.5%।
- प्रभाव: हैदराबाद के 15 निर्वाचन क्षेत्रों में से 9 में 40% से अधिक मतदाता हटाए गए; बेंगलुरु के 5 निर्वाचन क्षेत्रों में 50% से अधिक।
- पिछली घटना: Bihar SIR; West Bengal में 38 लाख अपीलें आईं जिनमें से 82,000 पर निर्णय लिया गया।
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