IACS: महेंद्रलाल सरकार का वैज्ञानिक आत्मनिर्भरता का दृष्टिकोण

यह लेख Indian Association for the Cultivation of Science (IACS) की 150वीं वर्षगांठ मनाता है, जिसकी स्थापना महेंद्रलाल सरकार ने की थी। बंगाल पुनर्जागरण के एक प्रमुख व्यक्ति सरकार ने भारतीयों के लिए वैज्ञानिक जांच करने और विज्ञान में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए एक संस्था की कल्पना की थी, क्योंकि औपनिवेशिक प्रशासन ने सीमित अवसर प्रदान किए थे। 29 जुलाई, 1876 को स्थापित, IACS वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए भारत की पहली राष्ट्रीय संस्था बन गई। यहीं पर C.V. Raman ने अपना अग्रणी कार्य किया, जिससे 1928 में Raman effect की खोज हुई, जिसके लिए उन्हें 1930 में भौतिकी का Nobel Prize मिला। IACS शोधकर्ताओं की पीढ़ियों को प्रेरित करना और भारत की वैज्ञानिक प्रगति में योगदान देना जारी रखता है।

मुख्य बिंदु

  • Indian Association for the Cultivation of Science (IACS) अपनी 150वीं वर्षगांठ मना रहा है।
  • IACS की स्थापना महेंद्रलाल सरकार ने 1876 में भारत में वैज्ञानिक आत्मनिर्भरता के दृष्टिकोण के साथ की थी।
  • C.V. Raman ने IACS प्रयोगशालाओं में Raman effect पर अपना Nobel Prize विजेता अनुसंधान किया।
  • संस्था ने बंगाल पुनर्जागरण और आधुनिक भारतीय विज्ञान की उन्नति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

परीक्षा तथ्य

  • संस्था: Indian Association for the Cultivation of Science (IACS)।
  • संस्थापक: Mahendralal Sircar (1833-1904)।
  • स्थापना तिथि: 29 जुलाई, 1876।
  • Nobel विजेता: C.V. Raman (Raman effect की खोज 1928, Nobel Prize 1930)।

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