CM विजय का कर्नाटक के साथ कावेरी वार्ता पर दांव नीतिगत बदलाव का प्रतीक
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय का कावेरी जल-बंटवारे विवाद पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार के साथ सीधी बातचीत शुरू करने का निर्णय तमिलनाडु की पारंपरिक अधिनिर्णय नीति से एक महत्वपूर्ण विचलन का प्रतिनिधित्व करता है। हालांकि इसका उद्देश्य राज्य के पानी के उचित हिस्से को सुरक्षित करना है, इस पहल ने कई राजनीतिक दलों और किसानों के नेताओं से अस्वीकृति प्राप्त की है, जो डरते हैं कि यह CWMA और CWRC जैसे स्थापित तंत्रों को दरकिनार कर देगा। यह चिंताएं भी मौजूद हैं कि कर्नाटक इस अवसर का उपयोग विवादास्पद Mekedatu बांध परियोजना को उठाने के लिए कर सकता है, जिससे लंबे समय से चले आ रहे विवाद को जटिल बनाया जा सकता है।
मुख्य बिंदु
- तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय कावेरी मुद्दे पर कर्नाटक के साथ सीधी बातचीत कर रहे हैं, जो पिछली नीतियों से हटकर है।
- इस कदम का उद्देश्य तमिलनाडु के पानी के हिस्से को सुरक्षित करना है, जो वर्तमान में कम है।
- आलोचकों को डर है कि सीधी बातचीत CWMA और CWRC जैसे स्थापित नियामक निकायों को दरकिनार कर सकती है।
- यह चिंताएं हैं कि कर्नाटक Mekedatu बांध परियोजना को चर्चाओं में ला सकता है।
परीक्षा तथ्य
- सी. जोसेफ विजय तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और Tamilaga Vettri Kazhagam (TVK) के अध्यक्ष हैं।
- डी. के. शिवकुमार कर्नाटक के मुख्यमंत्री हैं।
- Cauvery Water Disputes Tribunal (CWDT) का अंतिम निर्णय 2007 में आया था, जिसे 11 साल बाद Supreme Court ने संशोधित किया।
- Cauvery Water Management Authority (CWMA) और Cauvery Water Regulation Committee (CWRC) स्थापित कार्यान्वयन तंत्र हैं।
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