सुप्रीम कोर्ट ने 'बुलडोजर न्याय' अवमानना याचिकाओं को तथ्यात्मक जांच के लिए उच्च न्यायालयों में स्थानांतरित किया
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों द्वारा 'बुलडोजर न्याय' के लगातार मामलों का आरोप लगाने वाली अवमानना याचिकाओं को संबंधित उच्च न्यायालयों में स्थानांतरित करने का आदेश दिया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने तर्क दिया कि ऐसे मामलों के लिए आवश्यक गहन तथ्यात्मक जांच करने के लिए उच्च न्यायालय बेहतर सुसज्जित हैं। न्यायालय ने अपने नवंबर 2024 के फैसले को दोहराया, जिसने उचित प्रक्रिया के बिना अवैध विध्वंस को 'सत्ता का मनमाना उपयोग' और 'कानूनविहीन स्थिति' घोषित किया था, जिसमें राज्य की प्रतिशोधात्मक कार्रवाई में शामिल होने की अक्षमता पर जोर दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट द्वारा इन मामलों में दी गई अंतरिम सुरक्षा जारी रहेगी।
मुख्य बिंदु
- सुप्रीम कोर्ट ने 'बुलडोजर न्याय' से संबंधित अवमानना याचिकाओं को राज्य उच्च न्यायालयों में स्थानांतरित कर दिया।
- यह निर्णय विवादित तथ्यों की विस्तृत तथ्यात्मक जांच करने के लिए उच्च न्यायालयों की उपयुक्तता पर आधारित था।
- न्यायालय ने अपने नवंबर 2024 के फैसले की पुष्टि की, जिसने उचित प्रक्रिया के बिना अवैध विध्वंस को 'सत्ता का मनमाना उपयोग' माना था।
- फैसले में इस बात पर जोर दिया गया कि राज्य प्रतिशोधात्मक कार्रवाई में शामिल नहीं हो सकता और उसे उचित प्रक्रिया का पालन करना चाहिए।
- सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले दी गई अंतरिम सुरक्षाएं प्रभावी रहेंगी।
परीक्षा तथ्य
- भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ।
- यह फैसला अवैध विध्वंस पर SC के नवंबर 2024 के फैसले को संदर्भित करता है।
- न्यायमूर्ति एस.वी. मोहना भी पीठ का हिस्सा थे।
- इस निर्णय का उद्देश्य तथ्य-गहन अवमानना याचिकाओं के न्यायनिर्णयन को सुव्यवस्थित करना है।
पढ़ें। याद रखें। याद करें।
स्पेस्ड-रिपीटिशन फ्लैशकार्ड, दैनिक क्विज़ और ऑफ़लाइन एक्सेस पाएं — एंड्रॉइड पर मुफ़्त।