Supreme Court conflicting decisions के कारण गिरफ्तारी के आधार प्रस्तुत करने के प्रावधान को एक बड़ी Bench को संदर्भित करने पर विचार कर रहा है।
Supreme Court ने संकेत दिया कि वह इस सवाल को एक बड़ी Bench को संदर्भित कर सकता है कि क्या गिरफ्तारी के आधार एक आरोपी को लिखित रूप में प्रस्तुत किए जाने चाहिए। यह विचार मेघालय सरकार की Sonam Raghuvanshi को दी गई जमानत के खिलाफ अपील के दौरान उठा, जिस पर हत्या का आरोप है। राज्य ने तर्क दिया कि लिखित आधार प्रदान किए गए थे, जिसमें arrest memo में केवल एक 'typographical error' था। हालांकि, आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि प्रस्तुत दस्तावेज केवल एक pro forma था, न कि संवैधानिक जनादेश की सार्थक पूर्ति, इस मामले पर conflicting coordinate Bench judgments को उजागर करते हुए।
मुख्य बिंदु
- Supreme Court गिरफ्तारी के लिखित आधार प्रस्तुत करने के मुद्दे को एक बड़ी Bench को संदर्भित करने पर विचार कर रहा है।
- यह लिखित गिरफ्तारी के आधारों की अनिवार्य प्रकृति पर coordinate Benches के conflicting judgments से उत्पन्न होता है।
- मेघालय सरकार ने arrest memo में 'typographical error' का हवाला देते हुए अनुपालन का दावा किया।
- आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि प्रस्तुत दस्तावेज एक pro forma था, न कि आधारों का एक सार्थक संचार।
परीक्षा तथ्य
- Justices Manoj Misra और Shree Chandrashekhar की Bench।
- Sonam Raghuvanshi को दी गई जमानत के खिलाफ मेघालय सरकार की अपील।
- Typographical error ने Section 103 (हत्या) के बजाय Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS) के Section 403 का उल्लेख किया।
- Solicitor-General Tushar Mehta राज्य की ओर से पेश हुए।
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