निकोबार बंदरगाह परियोजना: पर्यावरणीय चिंताओं के बीच रणनीतिक औचित्य पर सवाल

ग्रेट निकोबार के गलाथिया बे में प्रस्तावित International Container Transhipment Port (ICTP) के "रणनीतिक" औचित्य पर गहन जांच चल रही है। प्रारंभ में, Public Investment Board (PIB) ने अगस्त 2024 में इसे रणनीतिक उद्देश्यों से रहित माना था, लेकिन Ministry of Defence ने बाद में मार्च 2026 में इसे रणनीतिक घोषित कर दिया। इस बदलाव पर सवाल उठाए जा रहे हैं, खासकर जब पर्यावरणीय प्रभाव रिपोर्ट अभी भी सार्वजनिक नहीं की गई हैं। आलोचकों का तर्क है कि ₹81,000-करोड़ की यह परियोजना, जिसमें एक हवाई अड्डा और पर्यटन क्षेत्र शामिल है, मुख्य रूप से व्यावसायिक है और सैन्य उपस्थिति को व्यापक पारिस्थितिक क्षति के बिना बढ़ाया जा सकता है, जिससे पारदर्शिता और पर्यावरणीय प्रभाव के बारे में चिंताएं बढ़ रही हैं।

मुख्य बिंदु

  • Public Investment Board ने शुरू में ग्रेट निकोबार बंदरगाह परियोजना के रणनीतिक उद्देश्यों पर सवाल उठाया था।
  • Ministry of Defence ने बाद में, पहले के आकलन के बावजूद, परियोजना को रणनीतिक घोषित किया।
  • ₹81,000-करोड़ की परियोजना के लिए पर्यावरणीय प्रभाव रिपोर्ट सार्वजनिक पहुंच से रोकी गई हैं।
  • कुछ लोगों द्वारा इस परियोजना को मुख्य रूप से व्यावसायिक माना जाता है, जिसका उद्देश्य ट्रांसशिपमेंट कार्गो को आकर्षित करना है।
  • पारिस्थितिक क्षति और परियोजना के रणनीतिक औचित्य की पारदर्शिता के संबंध में चिंताएं मौजूद हैं।

परीक्षा तथ्य

  • परियोजना: International Container Transhipment Port (ICTP), गलाथिया बे, ग्रेट निकोबार द्वीप पर।
  • अनुमानित लागत: ₹81,000-करोड़।
  • Public Investment Board (PIB) का आकलन: रणनीतिक उद्देश्यों का अभाव (अगस्त 2024)।
  • Ministry of Defence का पदनाम: रणनीतिक परियोजना (मार्च 2026)।

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