शक्तिशाली राज्यों के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून तेजी से वैकल्पिक, वैश्विक शांति और स्थिरता को कमजोर कर रहा है
लेख का तर्क है कि सार्वजनिक अंतरराष्ट्रीय कानून को शक्तिशाली राज्यों द्वारा तेजी से "optional" माना जा रहा है, जिससे नियम-आधारित व्यवस्था कमजोर हो रही है। यह UN Charter के बल प्रयोग पर प्रतिबंध, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता सहित मूलभूत सिद्धांतों के कई उल्लंघनों पर प्रकाश डालता है, जिसमें रूस के यूक्रेन पर आक्रमण और U.S.-इजरायल के ईरान पर युद्ध का हवाला दिया गया है। UNCLOS, अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून, मानवाधिकार संधियों और हथियार-नियंत्रण व्यवस्थाओं के उल्लंघनों पर भी चर्चा की गई है। लेखक का तर्क है कि जिस दंडमुक्ति के साथ शक्तिशाली राज्य कार्य करते हैं, वह यह संकेत देता है कि "might is right", जिससे एक ऐसा शून्य पैदा होता है जहां शक्ति वैधता निर्धारित करती है और वैश्विक शांति और स्थिरता को खतरा होता है।
मुख्य बिंदु
- अंतरराष्ट्रीय कानून को शक्तिशाली राज्यों द्वारा तेजी से अनदेखा किया जा रहा है, जिससे नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था कमजोर हो रही है।
- UN Charter के बल प्रयोग पर प्रतिबंध और संप्रभुता के सिद्धांतों का उल्लंघन आम होता जा रहा है।
- उदाहरणों में रूस का यूक्रेन पर आक्रमण, U.S.-इजरायल का ईरान पर युद्ध और दक्षिण चीन सागर में चीन के कार्य शामिल हैं।
- अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून, मानवाधिकार संधियों और हथियार-नियंत्रण व्यवस्थाओं ने भी विश्व स्तर पर गंभीर उल्लंघन झेले हैं।
- अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करने में शक्तिशाली राज्यों की दंडमुक्ति एक ऐसा शून्य पैदा करती है जहां सिद्धांत नहीं, बल्कि शक्ति परिणाम तय करती है, जिससे वैश्विक अस्थिरता पैदा होती है।
परीक्षा तथ्य
- UN Charter बल प्रयोग पर प्रतिबंध लगाता है और संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की गारंटी देता है।
- 2003 का इराक आक्रमण और रूस का 2022 का यूक्रेन पर आक्रमण उल्लंघन के रूप में उद्धृत किए गए हैं।
- UNCLOS (UN Convention on the Law of the Sea) सबसे व्यापक रूप से अनुसमर्थित संधियों में से एक है।
- Intermediate-Range Nuclear Forces (INF) Treaty के पतन का उल्लेख किया गया है।
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