मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने भोजशाला परिसर को मंदिर घोषित किया, 2003 के ASI आदेश को रद्द किया।
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया कि धार जिले में विवादित भोजशाला परिसर और कमल मौला मस्जिद देवी वाग्देवी (सरस्वती) को समर्पित एक मंदिर है, जिसमें हिंदू समुदाय को वहां पूजा करने की अनुमति दी गई, जबकि मुस्लिम समुदाय के दावों को खारिज कर दिया गया। अदालत ने 2003 के ASI आदेश को रद्द कर दिया जिसने मुसलमानों को साइट पर शुक्रवार की नमाज अदा करने की अनुमति दी थी। जस्टिस विनय कुमार शुक्ला और आलोक अवस्थी द्वारा 242 पेज के इस फैसले ने मुस्लिम पक्ष के इस तर्क को खारिज कर दिया कि 1935 की एक उद्घोषणा ने साइट को मस्जिद घोषित किया था। अदालत ने केंद्र सरकार को लंदन संग्रहालय से देवी सरस्वती की एक मूर्ति को पुनः प्राप्त करने और इसे स्मारक में फिर से स्थापित करने का निर्देश दिया, जिसमें वैज्ञानिक सर्वेक्षण निष्कर्षों पर जोर दिया गया।
मुख्य बिंदु
- मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने धार जिले में भोजशाला परिसर को देवी वाग्देवी (सरस्वती) को समर्पित एक मंदिर घोषित किया।
- अदालत ने 2003 के ASI आदेश को रद्द कर दिया जिसने मुस्लिम समुदाय को साइट पर शुक्रवार की नमाज अदा करने की अनुमति दी थी।
- इस फैसले ने मुस्लिम और जैन समुदायों की याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिसमें मुसलमानों को मस्जिद के लिए वैकल्पिक भूमि तलाशने का सुझाव दिया गया।
- अदालत ने केंद्र सरकार को लंदन संग्रहालय से देवी सरस्वती की मूर्ति को पुनः प्राप्त कर फिर से स्थापित करने का निर्देश दिया।
- यह फैसला वैज्ञानिक सर्वेक्षण निष्कर्षों पर आधारित था, जिसमें 1935 की उद्घोषणा के बारे में मुस्लिम पक्ष के दावों को खारिज कर दिया गया।
परीक्षा तथ्य
- स्थान: Bhojshala complex और Kamal Maula Mosque, Dhar district, Madhya Pradesh।
- देवता: Goddess Vagdevi (Saraswati)।
- न्यायालय: Madhya Pradesh High Court (Justices Vinay Kumar Shukla और Alok Awasthi की Division Bench)।
- रद्द किया गया आदेश: Archaeology Survey of India (ASI) का 2003 का आदेश।
- ऐतिहासिक संदर्भ: Ram Janmabhoomi-Babri Masjid verdict।
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